देहरादून/रुद्रपुर, 19 जून
उधम सिंह नगर जिले के गदरपुर से गिरफ्तार किए गए मोहम्मद सलाउद्दीन मामले में उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच लगातार विस्तार ले रही है। डिजिटल साक्ष्यों और सोशल मीडिया गतिविधियों की पड़ताल में कई महत्वपूर्ण सुराग मिलने के बाद जांच का दायरा उत्तराखंड से बाहर उत्तर प्रदेश तक पहुंच गया है।

STF के अनुसार, आरोपी के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट्स और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय संपर्कों की गहन जांच की जा रही है। प्रारंभिक पड़ताल में सिग्नल और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर कई समूहों और चैट्स से जुड़े डिजिटल साक्ष्य सामने आए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि कुछ चैट्स में कट्टरपंथी विचारधारा, जिहाद, शहादत और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से संबंधित संदिग्ध सामग्री मिली है, जिसकी तकनीकी और फॉरेंसिक जांच जारी है।

जांच के दौरान आरोपी के कुछ संभावित अंतरराष्ट्रीय और सीमापार संपर्कों के संकेत भी प्राप्त हुए हैं। इन संपर्कों की वास्तविकता और उद्देश्य का पता लगाने के लिए विभिन्न एजेंसियां समन्वित रूप से काम कर रही हैं। कुछ चैट्स में हथियारों और विस्फोटक सामग्री से जुड़ी संदिग्ध बातचीत भी सामने आने की बात कही गई है, जिसकी स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जा रही है।

पूछताछ में सलाउद्दीन द्वारा कुछ चैट्स और संपर्कों को डिलीट किए जाने की जानकारी मिलने के बाद STF ने जांच का दायरा और बढ़ाया। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के रामपुर निवासी अताउल्ला समीर नामक युवक से पूछताछ की गई। STF का कहना है कि उसके मोबाइल फोन और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच में ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि उसे विभिन्न ऑनलाइन माध्यमों के जरिए कट्टरपंथी विचारधारा की ओर प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा था।

पूछताछ के बाद युवक को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया, जबकि उसके मोबाइल फोन को विस्तृत जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

STF के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने बताया कि सलाउद्दीन के मोबाइल फोन और सोशल मीडिया खातों की जांच में कई ऐसे डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जो उसे संदिग्ध कट्टरपंथी नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में जांच को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी के संपर्क में रहे सभी व्यक्तियों की भूमिका की गंभीरता से जांच की जा रही है।

फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है और एजेंसियां डिजिटल, तकनीकी तथा फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर कथित नेटवर्क की वास्तविकता और व्यापकता का पता लगाने में जुटी हैं।

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