हरिद्वार, 24 जून
रेलवे की प्रस्तावित अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई को लेकर क्षेत्र के निवासियों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। आज बुधवार सुबह स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वर्षों से वे रेलवे अधिकारियों से मूल नक्शा, भूमि संबंधी दस्तावेज और स्पष्ट सीमांकन प्रस्तुत करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

निवासियों का कहना है कि रेलवे को पहले क्षेत्रवासियों की मौजूदगी में अपने मूल अभिलेखों और नक्शों के आधार पर पैमाइश करनी चाहिए और सभी पक्षों की संतुष्टि के बाद ही किसी प्रकार की कार्रवाई करनी चाहिए। उनका आरोप है कि रेलवे अधिकारी बार-बार मौके पर पहुंचते हैं, लेकिन भूमि स्वामित्व और सीमांकन से जुड़े पुख्ता दस्तावेज सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं कर पाते, जिसके कारण उन्हें कई बार वापस लौटना पड़ा है।

कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का आरोप
क्षेत्रवासियों ने दावा किया कि कई परिवारों के पास न्यायालय के आदेश और अन्य कानूनी दस्तावेज मौजूद हैं, लेकिन रेलवे प्रशासन इन दस्तावेजों को स्वीकार करने या उन पर विचार करने के बजाय अपनी कार्रवाई जारी रखने की बात करता है। लोगों का आरोप है कि रेलवे का रवैया ऐसा प्रतीत होता है मानो वह न्यायालय के निर्देशों को भी महत्व नहीं दे रहा हो।

प्रशासन को गुमराह करने का भी आरोप
स्थानीय निवासियों का कहना है कि रेलवे प्रशासन शासन और जिला प्रशासन को अधूरी जानकारी देकर कार्रवाई के लिए दबाव बना रहा है। उनका आरोप है कि वास्तविक स्थिति और कानूनी पहलुओं को पूरी तरह सामने नहीं रखा जा रहा, जिससे प्रशासन भी भ्रम की स्थिति में है।

मानसिक दबाव और डर का माहौल
क्षेत्र के लोगों ने कहा कि रेलवे अधिकारियों की कार्यप्रणाली से आम नागरिकों में भय और असमंजस का माहौल बन गया है। उनका आरोप है कि रात के समय लाउडस्पीकर से अनाउंसमेंट कर लोगों को चेतावनी दी जाती है, जिससे परिवारों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां क्षेत्रवासियों को डराने और असहज करने का काम कर रही हैं।

प्रॉपर्टी डीलरों की मौजूदगी पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों ने यह भी आरोप लगाया कि हाल ही में जब अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही थी, तब रेलवे अधिकारियों के साथ कुछ प्रॉपर्टी डीलर भी मौके पर मौजूद थे। लोगों का कहना है कि इससे कार्रवाई की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि रेलवे स्पष्ट करे कि कार्रवाई के दौरान निजी प्रॉपर्टी कारोबारियों की मौजूदगी किस उद्देश्य से थी।

पारदर्शी कार्रवाई की मांग
क्षेत्रवासियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि वह मूल नक्शे, भूमि अभिलेख और सीमांकन संबंधी सभी दस्तावेज सार्वजनिक करे तथा स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में निष्पक्ष पैमाइश कराए। उनका कहना है कि पारदर्शिता और संवाद के जरिए ही इस विवाद का समाधान संभव है।

फिलहाल रेलवे प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर जारी है और लोग रेलवे से स्पष्ट जवाब की मांग कर रहे हैं।

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