हरिद्वार,12 अगस्त।
कांवड़ मेला 2026 के सकुशल संपन्न होने के बाद अब हरिद्वार को स्वच्छ, सुंदर और निर्मल बनाने की मुहिम तेज होने जा रही है। विशाल कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही के कारण गंगा घाटों, तटों, प्रमुख मार्गों और बस्तियों के आसपास जमा हुए कचरे की सफाई के लिए जिला प्रशासन की ओर से आज 12 अगस्त से विशेष स्वच्छता अभियान शुरू किया जा रहा है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए साधु-संतों ने समाज के प्रत्येक वर्ग से आगे आकर सहयोग करने की अपील की है।
अध्यक्ष मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट एवं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव महंत रविंद्र पुरी जी महाराज ने कहा कि कांवड़ मेला सकुशल संपन्न हो चुका है और अब हरिद्वार की स्वच्छता हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार केवल एक शहर नहीं, बल्कि देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र और हम सभी का साझा घर है। ऐसे में इसकी पवित्रता, सुंदरता और स्वच्छता को बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
उन्होंने कहा कि मेले के विशाल स्वरूप के चलते वर्तमान में गंगा तटों, घाटों, प्रमुख मार्गों और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में कचरा जमा हुआ है। नगर निगम और स्थानीय प्रशासन दिन-रात सफाई कार्य में जुटे हैं, लेकिन इतने बड़े स्तर पर सफाई अभियान केवल सरकारी तंत्र के भरोसे पूरा नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
महंत रविंद्र पुरी ने अखाड़ों, मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों एवं सेवकों, एसएमजेएन पीजी कॉलेज के शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं, सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं, व्यापारिक संगठनों तथा आम नागरिकों से 12 अगस्त से शुरू होने वाले सफाई अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि सभी लोग अपने आसपास पड़े प्लास्टिक, पन्नियों और अन्य कचरे को एकत्रित कर नगर निगम के सफाई अभियान में सहयोग करें। विशेष रूप से गंगा घाटों और तटों पर पड़ा कचरा गंगा में प्रवाहित करने के बजाय निर्धारित डस्टबिन में डालने की अपील की गई।
उन्होंने कहा कि “स्वच्छ हरिद्वार, सुंदर हरिद्वार और पावन हरिद्वार” का संकल्प तभी साकार होगा, जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति इसमें अपनी भूमिका निभाएगा। स्वच्छता केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
साधु समाज भी अभियान में निभाएगा सक्रिय भूमिका
महंत रविंद्र पुरी जी महाराज ने कहा कि कनखल स्थित भगवान दक्षेश्वर की पावन नगरी में कांवड़ यात्रा संपन्न होने के बाद अब स्वच्छता अभियान में साधु समाज भी पूरी तत्परता के साथ भाग लेगा। उन्होंने कहा कि जहां स्वच्छता रहती है, वहां सकारात्मक वातावरण के साथ भगवान और लक्ष्मी का निवास माना जाता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने आसपास के वातावरण को साफ रखने का संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यात्रियों की ओर से रास्तों और आसपास के क्षेत्रों में छोड़ी गई प्लास्टिक पन्नियां अथवा अन्य सामग्री को इकट्ठा कर नगर निगम के कर्मचारियों को सौंपा जाए, ताकि उसका उचित निस्तारण हो सके। उन्होंने विशेष रूप से गंगा की निर्मलता बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि गंगा किनारे या घाटों पर पड़ा कोई भी कचरा नदी में न डाला जाए।
“गंगा में कचरा न डालें, स्वच्छता में हाथ बंटाएं”
महंत रविंद्र पुरी ने कहा कि हरिद्वार मां गंगा, भगवान शिव और भगवान विष्णु की पावन नगरी है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को स्वच्छ और सुंदर वातावरण का अनुभव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हरिद्वार की स्वच्छता केवल प्रशासन की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी और प्रतिष्ठा से जुड़ा विषय है।
उन्होंने राज्य सरकार और जिला प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे स्वच्छता अभियान की सराहना करते हुए कहा कि साधु समाज प्रत्येक वर्ष ऐसे अभियानों में अपनी भागीदारी निभाता रहा है और इस बार भी संत समाज पूरी निष्ठा के साथ सहयोग करेगा।
साधु-संतों ने आम नागरिकों से अपील की कि कांवड़ मेला समाप्त होने के बाद अब सभी मिलकर हरिद्वार को फिर से स्वच्छ और सुंदर बनाने का संकल्प लें। गंगा तटों पर स्वच्छता बनाए रखें, प्लास्टिक एवं अन्य कचरे को निर्धारित स्थान पर डालें और प्रशासन एवं नगर निगम के सफाईकर्मियों का सहयोग करें।
संत समाज का संदेश स्पष्ट है—कांवड़ यात्रा की आस्था के बाद अब स्वच्छता की सेवा का समय है। जनभागीदारी से ही हरिद्वार की पवित्रता और प्राकृतिक सुंदरता को कायम रखा जा सकता है।