एक ही व्यक्ति द्वारा पांच से अधिक बार फॉर्म-7 लगाने के दावे से मचा हड़कंप, बीएलओ-2 की रिपोर्ट और शिकायतों की जांच की मांग…
हरिद्वार,12 अगस्त ।
हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से वैध मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने इस संबंध में गंभीर आरोप लगाते हुए जिला निर्वाचन तंत्र से शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। विधायक की ओर से यह मामला राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और भारत निर्वाचन आयोग के समक्ष भी उठाए जाने की बात कही गई है।
विधायक अनुपमा रावत का कहना है कि जिस तरह अन्य राज्यों में वोट काटने को लेकर विवाद सामने आए हैं, उसी तरह उत्तराखंड में भी मतदाता सूची से वैध मतदाताओं के नाम हटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उनके अनुसार हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में फॉर्म-7 के माध्यम से मतदाताओं के नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में आवेदन किए गए हैं।
6 अगस्त को भी सामने आया मामला
ज्ञापन में विधायक ने बताया कि 6 अगस्त 2026 को हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में फॉर्म-7 भरकर एक मतदाता का नाम हटाने की कोशिश की गई। विधायक के अनुसार संबंधित मतदाता अपने भाग के मतदान केंद्र पर पहले ही कई बार मतदान कर चुका है। ऐसे में उसके नाम को हटाने के लिए फॉर्म-7 का इस्तेमाल किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं।
विधायक का कहना है कि उन्होंने हरिद्वार ग्रामीण के बीएलओ-1 के साथ-साथ बीएलओ-2 को भी फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग को रोकने तथा गलत तरीके से आवेदन करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के लिए ज्ञापन दिया है।
तीन दिनों में सैकड़ों नाम हटाने के आवेदन का दावा
अनुपमा रावत के अनुसार, 7 अगस्त को 126, 8 अगस्त को 426 और 9 अगस्त को 331 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 का इस्तेमाल किए जाने की शिकायत सामने आई है। उनका दावा है कि इन मतदाताओं के बीएलओ-2 से संबंधित विवरण की जांच करने पर वे अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में निवास करते हैं और किसी अन्य मतदान केंद्र पर मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं हैं।
इस आधार पर विधायक ने कहा कि संबंधित मतदाता अपने विधानसभा क्षेत्र में वैध और पात्र मतदाता हैं तथा उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का कोई आधार नहीं बनता।
एक व्यक्ति द्वारा पांच से अधिक बार फॉर्म-7 लगाने का आरोप
विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि नियमानुसार किसी विधानसभा क्षेत्र का एक मतदाता अधिकतम पांच बार फॉर्म-7 का इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन हरिद्वार ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जहां कथित तौर पर एक ही व्यक्ति ने पांच से अधिक बार फॉर्म-7 का प्रयोग किया।
ज्ञापन में जोगेंद्र सिंह द्वारा 11, गुरबाज सिंह द्वारा 7 और अर्धव यादव द्वारा 7 बार फॉर्म-7 भरकर वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटवाने का प्रयास किए जाने का दावा किया गया है। विधायक ने कहा कि फॉर्म-10 के अवलोकन से भी ऐसे अन्य मामलों का पता चलने की बात सामने आई है।
फॉर्म-10 की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग
अनुपमा रावत ने आरोप लगाया कि फॉर्म-7 के आधार पर मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। उनका कहना है कि निर्वाचन आयोग के मतदाता मैनुअल के अनुसार फॉर्म-10 को सार्वजनिक सूचना के लिए नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि पूर्व में भी प्री-एसआईआर प्रक्रिया के दौरान एएसडी/एएसडीटी के कारण जिन मतदाताओं के नाम काटे गए, उनके फॉर्म-10 सार्वजनिक नहीं किए गए और न ही संबंधित मतदाताओं को नोटिस भेजे गए। विधायक ने आशंका जताई कि इस बार भी ऐसी ही स्थिति बन रही है।
शिकायतों की जांच के लिए विशेष समिति बनाने की मांग
विधायक ने निर्वाचन अधिकारियों के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें प्रत्येक फॉर्म-7 से जुड़ी शिकायत की मौके पर जांच कराने की मांग शामिल है। इसके लिए मतदान केंद्र की बीएलए समिति के अध्यक्ष, संबंधित सुपरवाइजर, सचिव, तृतीय श्रेणी कर्मचारी और सभी दलों के बीएलए-2 सदस्यों को शामिल कर जांच कराने की मांग की गई है।
यदि जांच में शिकायत गलत पाई जाती है तो उसे निरस्त कर संबंधित मतदाता का नाम मतदाता सूची में यथावत रखने की मांग की गई है।
इसके अलावा 14 जुलाई 2026 के बाद फॉर्म-7 के जरिए प्रतिदिन प्राप्त शिकायतों को फॉर्म-10 में संकलित कर वेबसाइट पर प्रदर्शित करने, संबंधित आपत्तिकर्ता को फॉर्म-13 तथा संबंधित मतदाता को फॉर्म-14 का नोटिस देकर सुनवाई कराने की मांग की गई है।
फर्जी शिकायत करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग
विधायक ने कहा कि प्रत्येक फॉर्म-7 में आपत्तिकर्ता का ईपीआईसी नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज होता है। ऐसे में शिकायतों की जांच कर यह स्पष्ट किया जा सकता है कि आवेदन वास्तविक है या गलत तरीके से किया गया है।
यदि शिकायत झूठी पाई जाती है तो अनुपमा रावत ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत आवश्यक वैधानिक कार्रवाई और आर्थिक दंड सुनिश्चित करने की मांग की है।
जिला प्रशासन को आंदोलन की चेतावनी
अनुपमा रावत ने कहा कि उन्होंने अपना ज्ञापन राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी तथा भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को भी भेजा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग के जरिए मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया तत्काल नहीं रोकी गई तो वह जिला मतदाता पंजीकरण अधिकारी/जिलाधिकारी हरिद्वार कार्यालय पर धरना देंगी।
उन्होंने बीएलओ-2 तबरेज आलम के साथ आज संबंधित मुद्दे को लेकर अधिकारियों के समक्ष मांगें रखे जाने की बात भी कही।
विधायक का कहना है कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है और किसी भी वैध मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया जाना गंभीर विषय है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखना जरूरी है।