भगवान परशुराम का रूप धारण कर संत कार्तिकेय महाराज ने उठाई कांवड़, ‘यूजीसी रोलबैक’ और ‘काला कानून वापस लो’ के लगे नारे
हरिद्वार,11 अगस्त ।
शिवरात्रि के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में यूजीसी के नियमों/कानूनों के विरोध में एक अनोखी कांवड़ यात्रा निकाली गई। अखंड परशुराम अखाड़े के तत्वावधान में आयोजित इस कांवड़ यात्रा में संतों और सवर्ण समाज से जुड़े लोगों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। यात्रा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के कथित प्रावधानों को लेकर सवाल उठाते हुए उन्हें वापस लेने की मांग की।
कांवड़ यात्रा की शुरुआत हरिद्वार के बिरला घाट से हुई, जो विभिन्न मार्गों से होते हुए रेलवे स्टेशन स्थित शिवमूर्ति तक पहुंची। यात्रा में भगवान परशुराम का रूप धारण किए संत कार्तिकेय महाराज विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। उन्होंने कांवड़ को अपने कंधों पर उठाकर यात्रा में भाग लिया और भगवान शिव का जलाभिषेक कर देश एवं समाज के हित में प्रार्थना की।
यात्रा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने हाथों में विभिन्न संदेश लिखी तख्तियां लेकर तथा नारे लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया। ‘यूजीसी रोलबैक’ और ‘काला कानून वापस लो’ जैसे नारे यात्रा के दौरान गूंजते रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार को ऐसे निर्णय लेने से पहले समाज के विभिन्न वर्गों और विशेषकर विद्यार्थियों एवं अभिभावकों की चिंताओं पर विचार करना चाहिए।
संत कार्तिकेय महाराज ने सरकार की नीतियों पर साधा निशाना
मीडिया से बातचीत करते हुए भगवान परशुराम का रूप धारण किए संत कार्तिकेय महाराज ने कहा कि संत का कार्य समाज में अच्छे और बुरे की पहचान कराना तथा जनहित के मुद्दों पर समाज को जागरूक करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की कुछ नीतियां समाज के विभिन्न वर्गों के बीच मतभेद पैदा करने का काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि संत समाज समाज में शांति, सद्भाव और न्याय की स्थापना का पक्षधर है। संत कार्तिकेय महाराज ने कहा कि वे भगवान शिव के समक्ष जलाभिषेक कर प्रार्थना कर रहे हैं कि देश के नेतृत्व को सद्बुद्धि मिले और ऐसे कानून न बनाए जाएं, जिनसे समाज के किसी वर्ग को अपने भविष्य को लेकर चिंता उत्पन्न हो।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने ऐसे निर्णयों पर पुनर्विचार नहीं किया तो सवर्ण समाज और संन्यासी समाज लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर हो सकता है।
अधीर कौशिक ने उठाई यूजीसी रोलबैक की मांग
प्रदर्शन में अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने भी यूजीसी से जुड़े प्रावधानों को वापस लेने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लागू किए गए नियमों को लेकर समाज में गंभीर चिंता है और इनका प्रभाव विद्यार्थियों तथा उनके भविष्य पर पड़ सकता है।
पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि उनका संगठन समाज के हितों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाता रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार संबंधित निर्णय पर पुनर्विचार नहीं करती अथवा आरक्षण नीति में अपेक्षित सुधार नहीं किए जाते हैं, तो सवर्ण समाज अपने आंदोलन को और व्यापक करने पर विचार करेगा।
उन्होंने कहा कि विरोध का उद्देश्य किसी वर्ग विशेष के खिलाफ माहौल बनाना नहीं, बल्कि सरकार तक अपनी मांग और चिंताएं पहुंचाना है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने तथा सभी पक्षों से संवाद स्थापित करने की अपील की।
बिरला घाट से शिवमूर्ति तक निकली कांवड़ यात्रा
बिरला घाट से शुरू हुई कांवड़ यात्रा के दौरान संतों, अखाड़े से जुड़े पदाधिकारियों और समर्थकों ने भाग लिया। भगवान परशुराम के स्वरूप में संत कार्तिकेय महाराज द्वारा कांवड़ उठाए जाने को लेकर लोगों में विशेष उत्सुकता दिखाई दी। यात्रा के दौरान धार्मिक आस्था और सामाजिक मुद्दे को एक साथ जोड़ते हुए प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया।
यात्रा के समापन पर भगवान शिव का जलाभिषेक कर देश, समाज और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। आयोजकों ने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में मुख्य पुजारी शिव शंकर शास्त्री, स्वामी रुद्रानंद महाराज, कमल मुनि, स्वामी आनंद महाराज, स्वामी अमित जी, स्वामी कृष्णा, स्वामी कमल जी महाराज, आचार्य पवन कृष्ण शास्त्री, आचार्य संजय कृष्ण शास्त्री, जलज कौशिक, दिनेश बाली, ऋषि शर्मा, रोहित गिरी, चमन गिरी, शेरू कुमार, गौरव कुमार, मुकेश कुमार, संजू अग्रवाल, कुलदीप शर्मा, अमित कुमार, संदीप कुमार, हेमराज कुमार सहित बड़ी संख्या में संत एवं समर्थक मौजूद रहे।
आयोजकों ने कहा कि यूजीसी से जुड़े नियमों को लेकर उनकी मांगों पर सरकार सकारात्मक रुख अपनाए और संबंधित पक्षों के साथ संवाद स्थापित करे, ताकि इस मुद्दे का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जा सके।