देहरादून,16 जून।
सात सूत्रीय मांगों को लेकर राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ के आह्वान पर सोमवार से आयुष चिकित्सकों का अनिश्चितकालीन पूर्ण कार्य बहिष्कार और धरना आंदोलन शुरू हो गया। आंदोलन के पहले दिन प्रदेशभर से 500 से अधिक आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्साधिकारी आयुर्वेदिक एवं यूनानी सेवाएं निदेशालय, देहरादून में एकत्रित हुए और अपनी मांगों के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया।

प्रातः 10 बजे से शुरू हुआ धरना सायं 5 बजे तक जारी रहा। इस दौरान चिकित्सकों ने विभागीय उपेक्षा, लंबित पदोन्नति, सेवा संबंधी प्रकरणों, एसीपी/डीएसीपी लाभ, संवर्ग निदेशक की नियुक्ति तथा बायोमेट्रिक उपस्थिति व्यवस्था से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं सहित सात सूत्रीय मांगों के शीघ्र समाधान की मांग उठाई।

आंदोलन को उस समय और मजबूती मिली जब राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष अरविंद चौहान तथा राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विजय बिष्ट ने धरना स्थल पहुंचकर अपना पूर्ण समर्थन दिया।
फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने मंगलवार से आंदोलन में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होने की भी घोषणा की।

धरना सभा में वक्ताओं ने कहा कि सरकार और विभाग की उदासीनता के कारण चिकित्सकों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। उन्होंने बताया कि कार्य बहिष्कार के चलते प्रदेश के करीब 800 आयुष चिकित्सालय प्रभावित हुए हैं, जिससे हजारों मरीजों को उपचार संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

आंदोलन के अंत में चिकित्सकों और कर्मचारियों ने निदेशालय परिसर के चारों ओर विशाल मानव श्रृंखला बनाकर अपनी एकजुटता और संगठनात्मक शक्ति का प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक उनकी सात सूत्रीय मांगों पर शासन की ओर से कोई लिखित अथवा सकारात्मक समाधान नहीं दिया जाता, तब तक पूर्ण कार्य बहिष्कार और धरना आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।

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