हल्द्वानी, 11 सितंबर 2026।
ज्योलिकोट और आसपास के क्षेत्रों में जलजनित बीमारी के मामलों के सामने आने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, घर-घर स्वास्थ्य परीक्षण कराने, सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने और जलस्रोतों की जांच के लिए विभिन्न विभागों की टीमें लगातार मैदान में जुटी हुई हैं। प्रशासन का फोकस बीमारी के तत्काल नियंत्रण के साथ-साथ इसके संभावित स्रोतों की पहचान कर भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने पर भी है।
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक सर्वेक्षण, स्वास्थ्य शिविर, दवा वितरण और मरीजों को हरसंभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और पेयजल विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर जलजनित बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने को कहा गया है।
घर-घर पहुंच रही स्वास्थ्य टीमें, अब तक 380 लोगों की जांच
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि पंत के निर्देश पर ज्योलिकोट और आसपास के क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। एक दिन में 105 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और 72 ब्लड सैंपल जांच के लिए लिए गए। इसके साथ ही क्षेत्र से 7 पानी के नमूने भी जांच के लिए भेजे गए हैं।
गांजा, वीरभट्टी, बेलुवाखान, सरियाताल, ज्योलिकोट तथा भल्यूटी-चोपड़ा में लगाए गए स्वास्थ्य शिविरों में कुल 380 लोगों की जांच की गई। मरीजों की आवश्यकता के अनुसार दवाइयों के साथ ORS, जिंक और क्लोरीन की गोलियां वितरित की गईं।
ग्रामीणों को उनके घर के नजदीक ही उपचार और चिकित्सकीय सलाह मिल सके, इसके लिए सचल चिकित्सा वाहन भी तैनात किया गया है। वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ज्योलिकोट की OPD पर्ची नि:शुल्क कर दी गई है, जिससे क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं लेने में अतिरिक्त आर्थिक बोझ न उठाना पड़े।
15,500 लीटर शुद्ध पानी पहुंचाया, पेयजल लाइनों की भी फ्लशिंग
जलजनित बीमारी की रोकथाम में पेयजल व्यवस्था को सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मानते हुए उत्तराखंड जल संस्थान ने भी व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। विभागीय टैंकरों और पिकअप वाहनों के माध्यम से ज्योलिकोट के रामलीला ग्राउंड, डाक बंगला, ज्योलिकोट मार्केट तथा बेलुवाखान के अमुवा और गांजा तोक के करीब 110 परिवारों तक लगभग 15,500 लीटर शुद्ध पेयजल पहुंचाया गया।
इसके साथ ही पेयजल लाइनों की फ्लशिंग, जलस्रोतों की सफाई और पानी की टंकियों में क्लोरीनेशन का काम भी जारी है। विभाग को मिली 14 पेयजल संबंधी शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है।
रामलीला ग्राउंड, दुर्गापुर-वीरभट्टी स्रोत सहित विभिन्न स्थानों से पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। शेरमुख स्रोत की जांच और सफाई भी कराई गई। वहीं सरियाताल-वीरभट्टी की पुरानी पेयजल लाइन की जांच में क्लोरीनेशन संतोषजनक पाया गया।
स्कूल की पानी की टंकियों में अस्वच्छ जल मिलने पर सख्ती
ज्योलिकोट स्थित सेंट एंथोनीज कॉन्वेंट स्कूल में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर मिली शिकायत और जांच में सामने आए तथ्यों के बाद प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाया है। उप जिलाधिकारी/परगना मजिस्ट्रेट न्यायालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 152(1) के तहत आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
स्कूल परिसर की पानी की टंकियों में अस्वच्छ जल पाए जाने के मद्देनजर उस पानी के पेयजल के रूप में उपयोग और वितरण पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। टंकियों की सफाई और विसंक्रमण कराने तथा पानी के नमूनों को अधिकृत प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजने को कहा गया है।
स्कूल प्रबंधन को विद्यार्थियों और कर्मचारियों के लिए तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित जलस्रोत का दोबारा उपयोग तभी किया जा सकेगा, जब जांच में पानी निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाया जाएगा।
प्रशासन ने अनुपालन 13 सितंबर तक सुनिश्चित करने और 14 सितंबर को अनुपालन आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
अस्पतालों में भर्ती मरीजों का हाल जानने पहुंचे सीडीओ
ज्योलिकोट क्षेत्र के जिन मरीजों का हल्द्वानी के विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है, उनकी स्थिति और उपचार व्यवस्था की जानकारी लेने के लिए मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पांडे ने अस्पतालों का निरीक्षण किया।
उन्होंने उजाला सिग्नस अस्पताल, नीलकंठ अस्पताल, वात्सल्य मदर एंड चाइल्ड केयर अस्पताल और चंदन अस्पताल का निरीक्षण कर वहां भर्ती मरीजों से मुलाकात की। चिकित्सा अधीक्षकों और मुख्य चिकित्साधिकारी को मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
सीडीओ ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मरीजों को आयुष्मान योजना के तहत उपचार की आवश्यकता है, उन्हें जरूरत के अनुसार संबंधित सूचीबद्ध अस्पताल में रेफर किया जाए, ताकि आर्थिक परेशानी किसी मरीज के इलाज में बाधा न बने।
ज्योलिकोट पहुंच रहे विशेषज्ञ डॉक्टर, पीएचसी में हो रही ओपीडी
प्रभावित क्षेत्र में विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निजी अस्पतालों के विशेषज्ञ चिकित्सकों को भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ज्योलिकोट में ओपीडी के लिए लगाया गया है। 10 सितंबर को विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मरीजों की जांच की, जबकि 11 सितंबर को गैस्ट्रोलॉजी सहित अन्य विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य यही है कि गंभीर या जटिल लक्षण वाले मरीजों की समय रहते पहचान हो और उन्हें आवश्यकता के अनुसार उच्च चिकित्सा केंद्र में रेफर किया जा सके।
इलाज में परेशानी हो तो सीधे सीएमओ से संपर्क की अपील
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने लोगों से अपील की है कि आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध अथवा अन्य निजी अस्पताल में उपचार के दौरान किसी भी प्रकार की समस्या आने पर सीधे सीएमओ से संपर्क करें। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव, उबालकर पिएं पानी
स्वास्थ्य विभाग ने क्षेत्रवासियों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। लोगों को फिलहाल पानी अच्छी तरह उबालकर पीने, आसपास साफ-सफाई रखने और दूषित या संदिग्ध पानी के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य संबंधी किसी भी प्रकार की परेशानी, विशेषकर उल्टी-दस्त, कमजोरी अथवा अन्य लक्षण दिखाई देने पर स्वयं इलाज करने के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या क्षेत्र में तैनात स्वास्थ्य टीम से संपर्क करने को कहा गया है।
प्रशासन की सक्रियता के बीच अब सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल की नियमित आपूर्ति बनी रहे, सभी जलस्रोतों की लगातार निगरानी हो और बीमारी के नए मामलों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और जल संस्थान की संयुक्त निगरानी से क्षेत्र में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।