नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत और सेवा निवृत्त स्टाफ नर्सों को बड़ी राहत देते हुए वेतन पुनर्निर्धारण से जुड़े शासनादेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने सरकार द्वारा पूर्व में दिए गए उच्चीकृत वेतन की रिकवरी को नियम विरुद्ध मानते हुए नर्सों के पक्ष में फैसला सुनाया।

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि जिन स्टाफ नर्सों से उच्चीकृत वेतन की रिकवरी की गई है, वह राशि छह महीने के भीतर वापस की जाए। साथ ही यदि वेतन पुनर्निर्धारण से संबंधित कोई अन्य मामला लंबित है, तो उसे तीन महीने के भीतर निस्तारित किया जाए।

मामले के अनुसार स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एवं सेवा निवृत्त स्टाफ नर्स सुनीता सिंह और अन्य ने नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनकी नियुक्ति स्टाफ नर्स के रूप में हुई थी और नियुक्ति के समय उनका वेतनमान 5000 से 8000 रुपये निर्धारित था।

वर्ष 2011 में राज्य सरकार ने शासनादेश जारी कर स्टाफ नर्सों को उच्चीकृत वेतनमान प्रदान किया था। बाद में सरकार ने एक अन्य जीओ जारी कर वेतन का पुनर्निर्धारण कर दिया और पूर्व में दिए गए वेतन की रिकवरी शुरू कर दी।

स्वास्थ्य विभाग की नर्सों ने इसे नियमों के विरुद्ध बताते हुए कोर्ट में चुनौती दी और रिकवरी पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि पहले निर्धारित वेतनमान सही था और उसी के अनुरूप वेतन दिया जाना चाहिए, न कि पुनर्निर्धारण वाले शासनादेश के अनुसार।

हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद वेतन पुनर्निर्धारण शासनादेश को निरस्त कर दिया और नर्सों के पक्ष में फैसला सुनाया। इस निर्णय से प्रदेशभर की स्टाफ नर्सों में खुशी की लहर है।

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