हरिद्वार में नशे के खिलाफ मुहिम छेड़ने वालों को डराने की कोशिश, खबर प्रकाशित करने पर पत्रकार को भी मिली धमकी

हरिद्वार, 25 मई।
धर्मनगरी हरिद्वार में अवैध शराब, नशा और सट्टे के खिलाफ आवाज उठाना अब आसान नहीं रह गया है। जनहित में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं और निष्पक्ष पत्रकारों को कथित तौर पर धमकियों और दबाव का सामना करना पड़ रहा है। ताजा मामला नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान चला रहे सामाजिक कार्यकर्ता मोहित चौहान और इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने वाले वरिष्ठ पत्रकार बृजेश त्रिपाठी से जुड़ा है।

जानकारी के अनुसार, भैरव सेना संगठन से जुड़े मोहित चौहान, निवासी जमालपुर, कनखल, ने हर की पौड़ी सहित आसपास के धार्मिक क्षेत्रों में अवैध शराब, नशा और सट्टे के खिलाफ अभियान चलाया। उन्होंने मई महीने में ही लगातार 4 से 5 दिनों तक फेसबुक लाइव के माध्यम से कथित अवैध गतिविधियों को उजागर किया और प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करने का प्रयास किया। अभियान के दौरान कथित रूप से अवैध शराब पकड़े जाने की घटनाओं के बाद संबंधित तत्वों में हड़कंप मच गया।

मोहित चौहान का आरोप है कि अवैध कारोबार से जुड़े प्रमोद जायसवाल और उसके सहयोगी तभी से उनके खिलाफ रंजिश रखने लगे हैं। उनका कहना है कि उन्हें लगातार दबाव बनाने, डराने और धमकाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि वे अपनी मुहिम को बंद कर दें।

मामला तब और अधिक गंभीर हो गया जब वरिष्ठ पत्रकार बृजेश त्रिपाठी ने इस पूरे प्रकरण को निष्पक्ष पत्रकारिता के तहत समाचार के रूप में प्रकाशित किया। आरोप है कि खबर प्रकाशित होते ही पत्रकार को भी धमकी भरे फोन कॉल आने शुरू हो गए। सूत्रों के अनुसार, इन कॉल्स की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी गई है। इतना ही नहीं, समाचार को हटाने के लिए लगातार दबाव बनाया गया और गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी गई।

क्या सच लिखना और सच बोलना बन गया है अपराध ?
यह घटनाक्रम कई गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर अवैध गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार ही क्यों निशाने पर हैं? क्या नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे खुलेआम धमकियां देने से भी नहीं डर रहे ?

प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
पत्रकार संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी अपील की गई है।

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला
लोकतंत्र में पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता समाज की आंख, कान और आवाज होते हैं। यदि जनहित के मुद्दों को उठाने वालों को धमकाकर चुप कराने की कोशिश की जाती है, तो यह केवल किसी एक व्यक्ति पर हमला नहीं बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनसरोकारों पर सीधा प्रहार है।

अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करता है और सच की आवाज को दबाने वालों पर कब तक शिकंजा कसता है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

error: Content is protected !!