भीख में ज्यादा पैसे कमाने के लालच में चुराया गया था बच्चा, दिव्यांग महिला और उसका साथी गिरफ्तार…
रुड़की/पिरान कलियर, 12 जून।
पिरान कलियर दरगाह क्षेत्र से 7 माह के मासूम बच्चे के अपहरण के मामले का हरिद्वार पुलिस ने मात्र चार दिन के भीतर खुलासा कर एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने अपहृत बच्चे को सकुशल बरामद करते हुए एक दिव्यांग महिला और उसके साथी को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों ने भीख मांगने के दौरान अधिक पैसे हासिल करने के लालच में इस वारदात को अंजाम दिया था।
नमाज के दौरान गायब हुआ था मासूम
7 जून 2026 को कलियर दरगाह परिसर में उस समय हड़कंप मच गया था जब बिहार निवासी कलसूम खातून का सात माह का नाती मोहम्मद अली रजा अचानक लापता हो गया। परिवार दरगाह में नमाज अदा कर रहा था, तभी अज्ञात व्यक्ति बच्चे को लेकर फरार हो गया।
पीड़िता ने तत्काल कोतवाली कलियर में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने मुकदमा संख्या 120/2026 धारा 137(2) बीएनएस के तहत अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया।
मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटी और नाती के साथ रह रही थी महिला
पुलिस जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता कलसूम खातून पिछले लगभग नौ माह से अपनी मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटी रजिया खातून, पुत्र खुशराज तथा सात माह के नाती मोहम्मद अली रजा के साथ कलियर में किराये पर रह रही थीं।
परिवार रोजाना दरगाह में हाजिरी देने आता था। इसी दौरान अपराधियों ने परिवार को निशाना बनाया।
एसएसपी के निर्देश पर बनी विशेष टीम
घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह ने तत्काल विशेष पुलिस टीम गठित कर बच्चे की तलाश के निर्देश दिए।
पुलिस टीम ने:
🔹दरगाह परिसर के सीसीटीवी फुटेज खंगाले।
🔹आने-जाने वाले मार्गों की निगरानी की।
🔹स्थानीय लोगों से पूछताछ की।
🔹मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया।
🔹सोशल मीडिया का भी सहारा लिया।
सीसीटीवी फुटेज से मिला पहला बड़ा सुराग
जांच के दौरान पुलिस को सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध युवक बच्चे को गोद में लेकर दरगाह परिसर से बाहर जाता हुआ दिखाई दिया।
इसके बाद पुलिस ने संदिग्ध की गतिविधियों का विश्लेषण कर उसके संपर्कों की जानकारी जुटाई। जांच के दौरान एक दिव्यांग महिला और युवक पर शक गहराया।
बैसाखी और छह-छह उंगलियां बनी पहचान की सबसे बड़ी कड़ी
11 जून को मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने लक्सर रेलवे स्टेशन के पास एक दिव्यांग महिला और युवक को बच्चे के साथ भीख मांगते हुए देखा।
पुलिस की नजर जैसे ही महिला की बैसाखियों और बच्चे के दोनों हाथों में मौजूद छह-छह उंगलियों पर पड़ी, टीम को विश्वास हो गया कि यही अपहृत बच्चा है।
इसके बाद दोनों संदिग्धों को हिरासत में लेकर बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया गया।
मां के छलनी आंचल पर पुलिस ने लगाया मरहम
चार दिन से अपने मासूम की तलाश में भटक रही मां और परिवार के लिए यह राहत भरी खबर थी।
पुलिस ने अपहृत बच्चे को सकुशल परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू करते हुए कहा कि आरोपी कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई का सामना करेंगे।
एक सप्ताह तक की थी रेकी, फिर रची अपहरण की साजिश
पूछताछ में सामने आया कि दोनों आरोपियों ने वारदात से पहले लगभग एक सप्ताह तक बच्चे और उसके परिवार पर नजर रखी थी।
उन्होंने देखा कि परिवार की महिला मानसिक रूप से कमजोर है और अक्सर बच्चे के साथ दरगाह आती है। इसके बाद अपहरण की योजना बनाई गई।
भीख में अधिक पैसे कमाने के लिए उठाया खौफनाक कदम
गिरफ्तार दिव्यांग महिला ने पुलिस को बताया कि वह बचपन से पोलियो से ग्रस्त है और करीब 20 वर्ष पहले पति की मृत्यु के बाद भीख मांगकर जीवन यापन कर रही है।
दो वर्ष पहले उसकी मुलाकात समीर उर्फ सोनू से हुई। दोनों ने देखा कि छोटे बच्चों को गोद में लेकर भीख मांगने वालों को अधिक पैसे मिलते हैं। इसी लालच में उन्होंने बच्चे का अपहरण कर लिया।
वारदात का पूरा प्लान
🔹पहले परिवार की गतिविधियों पर नजर रखी गई।
🔹दिव्यांग महिला को लण्ढौरा भेज दिया गया।
🔹7 जून की शाम समीर अकेले कलियर पहुंचा।
🔹मौका मिलते ही बच्चे को लेकर फरार हो गया।
🔹बाद में दोनों बच्चे को गोद में लेकर भीख मांगने लगे।
🔹लेकिन हरिद्वार पुलिस की सक्रियता ने उनकी योजना को विफल कर दिया।
इलेक्ट्रॉनिक और मैनुअल पुलिसिंग का शानदार उदाहरण
इस मामले में तकनीकी जांच और पारंपरिक पुलिसिंग दोनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया निगरानी, मुखबिर तंत्र और लगातार फील्ड वर्क के समन्वय से पुलिस ने बेहद कम समय में मामले का खुलासा कर दिया।
गिरफ्तार आरोपीयो की पहचान
समीर उर्फ सोनू उर्फ बड़ा (उम्र 22 वर्ष) पुत्र नूर आलम,निवासी: गोल्डन कॉलोनी, लण्ढौरा,कोतवाली मंगलौर, जनपद हरिद्वार व महिला (उम्र लगभग 45 वर्ष) अभियुक्ता (दिव्यांग)के रूप में हुई।
खुलासे में शामिल पुलिस टीम
इस सफल अभियान में सीओ कलियर दिव्येश उपाध्याय, निरीक्षक कमल मोहन भंडारी, निरीक्षक रविंद्र शाह, वरिष्ठ उपनिरीक्षक राजेश बिष्ट, उपनिरीक्षक शहजाद अली, उपनिरीक्षक विनोद गोला सहित एसओजी और कोतवाली कलियर की संयुक्त टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एसएसपी ने पुलिस टीम को दी बधाई
मामले के सफल खुलासे और मासूम बच्चे की सुरक्षित बरामदगी पर एसएसपी नवनीत सिंह ने पूरी पुलिस टीम को बधाई देते हुए कहा कि बच्चों से जुड़े अपराधों में हरिद्वार पुलिस पूरी संवेदनशीलता और तत्परता से कार्रवाई करती रहेगी।
निष्कर्ष
चार दिन तक चले इस संवेदनशील ऑपरेशन ने न केवल एक मासूम को उसके परिवार तक सुरक्षित पहुंचाया, बल्कि यह भी साबित किया कि सतर्क पुलिसिंग, तकनीकी जांच और मानवीय संवेदनशीलता के समन्वय से गंभीर से गंभीर अपराधों का भी शीघ्र खुलासा किया जा सकता है। हरिद्वार पुलिस की इस कार्रवाई ने एक परिवार की खुशियां लौटाने के साथ-साथ समाज में सुरक्षा का भरोसा भी मजबूत किया है।