हरिद्वार, 10 अगस्त।
हरिद्वार में संत समाज से जुड़े कथित वायरल वीडियो को लेकर अखाड़ा परिषद ने कड़ी नाराजगी जताई है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं श्री मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने वायरल हो रहे वीडियो का खंडन करते हुए इसे संत समाज और सनातन धर्म की छवि खराब करने की साजिश बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का दुरुपयोग कर फर्जी फोटो और वीडियो तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित कर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है।

श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि संत समाज की प्रतिष्ठा और सनातन धर्म की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले इस तरह के कृत्यों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से पूरे मामले की तकनीकी जांच कराकर वायरल वीडियो की वास्तविकता सामने लाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि हरिद्वार की धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान पूरी दुनिया में है। संत समाज लगातार सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार, जनसेवा और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है। ऐसे समय में संतों के नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल कर फर्जी सामग्री तैयार करना समाज में भ्रम और अविश्वास पैदा करने का प्रयास है।

श्रीमहंत ने कहा कि हरिद्वार में आगामी कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन को लेकर भी संत समाज सक्रिय है, लेकिन कुछ तत्व धार्मिक वातावरण को प्रभावित करने के उद्देश्य से दुष्प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी भी वीडियो या फोटो को देखकर तुरंत विश्वास करने के बजाय उसकी सत्यता की जांच करना बेहद जरूरी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि आने वाले समय में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं और ऐसे माहौल में सोशल मीडिया के जरिए धार्मिक एवं सामाजिक मुद्दों को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिशें बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि एआई तकनीक का सकारात्मक इस्तेमाल विकास और जनहित के लिए होना चाहिए, न कि किसी व्यक्ति या धार्मिक समुदाय की छवि खराब करने के लिए।

महामंडलेश्वर बनाए जाने को लेकर भी उन्होंने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि महामंडलेश्वर बनाने का अधिकार अखाड़ों के पंचों को होता है। उन्होंने कहा कि अखाड़ों की संत परंपरा में धर्म, सेवा और सनातन संस्कृति का प्रचार प्रमुख उद्देश्य रहा है। संत समाज पर लगाए जा रहे अनर्गल आरोपों और भ्रामक प्रचार को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी आपत्तिजनक या संदिग्ध सामग्री की जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वीडियो वास्तविक है या एआई अथवा अन्य तकनीक के माध्यम से तैयार किया गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री और प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर दोषियों को चिन्हित करने की मांग की।

उन्होंने चेतावनी दी कि संत समाज की छवि खराब करने और धार्मिक भावनाओं को भड़काने के लिए फर्जी सामग्री फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

अखाड़ा परिषद के इस बयान के बाद अब वायरल वीडियो की सत्यता और उसके स्रोत की जांच को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर रहेगी। साथ ही, संत समाज ने आम लोगों से भी अपील की है कि बिना सत्यापन के किसी भी संदिग्ध फोटो या वीडियो को सोशल मीडिया पर आगे प्रसारित न करें।

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