हरिद्वार, 20 सितंबर 2026।
अंतरराष्ट्रीय संत महासभा के पदाधिकारियों ने रविवार को हरिद्वार प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर उत्तराखंड की धार्मिक एवं तीर्थ व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाए। प्रेस वार्ता में संगठन के मुख्य संरक्षक हिन्दू पीठाधीश्वर आचार्य मदन जी महाराज, अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र वर्मा, राष्ट्रीय अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ उर्मिला यादव, अंतरराष्ट्रीय महामंत्री आचार्य अजय कृष्ण महाराज तथा प्रदेश अध्यक्ष विजय पाण्डेय सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे
वार्ता के दौरान पदाधिकारियों ने कहा कि उत्तराखंड को देवभूमि के रूप में विशेष धार्मिक पहचान प्राप्त है। उन्होंने चारधाम—बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री—के साथ हरिद्वार एवं ऋषिकेश को भी प्रमुख तीर्थस्थलों के रूप में रेखांकित किया। संगठन ने इन क्षेत्रों की धार्मिक और सांस्कृतिक व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार के समक्ष कई मांगें रखीं।
धर्मगुरुओं के लिए वेतन और अधिकारों की मांग
संत महासभा की ओर से मांग रखी गई कि देवभूमि के प्रमुख धार्मिक स्थलों के धर्मगुरुओं तथा अखाड़ा मठ-मंदिरों के महंतों के लिए सरकार द्वारा वेतन की व्यवस्था की जाए और उनके अधिकारों की रक्षा की जाए।
संगठन ने चारधाम सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर भूमि खरीद और निर्माण से संबंधित गतिविधियों को लेकर भी सरकार से सख्त व्यवस्था बनाने की मांग की। प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर धार्मिक स्थलों के आसपास ऐसी गतिविधियां हो रही हैं, जिन पर सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि प्रेस वार्ता में प्रस्तुत नहीं की गई।
चारधाम क्षेत्रों में प्रवेश और व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर मांग
संगठन ने बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे चारधाम क्षेत्रों में धार्मिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई सुझाव दिए। इनमें क्षेत्र में प्रवेश, संस्थाओं और व्यवसायों के संचालन तथा होटल, घोड़ा-खच्चर आदि से जुड़ी गतिविधियों को विनियमित करने की मांग शामिल है।
प्रेस वार्ता में यह भी कहा गया कि इन क्षेत्रों की धार्मिक प्रकृति को ध्यान में रखते हुए वहां की व्यवस्थाओं के संबंध में स्थानीय धार्मिक संस्थाओं और सरकार के बीच समन्वय बढ़ाया जाना चाहिए।
हरिद्वार कुंभ क्षेत्र को लेकर भी उठाया मुद्दा
संत महासभा ने हरिद्वार कुंभ क्षेत्र की धार्मिक मर्यादा और व्यवस्थाओं का मुद्दा भी उठाया। संगठन की ओर से कुंभ क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों और विभिन्न समुदायों की भागीदारी को लेकर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई।
प्रेस वार्ता में वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए जनसंख्या से संबंधित दावे भी किए गए। इन आंकड़ों और वर्तमान जनसंख्या संबंधी दावों के बीच अंतर को स्पष्ट करने के लिए आधिकारिक नवीनतम आंकड़ों की आवश्यकता होगी।
भू-कानून की मांग
संगठन ने हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में भी मूल निवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए भू-कानून बनाए जाने की मांग की। प्रेस वार्ता में उत्तराखंड राज्य गठन के बाद जनसांख्यिकीय बदलाव से संबंधित दावे करते हुए सरकार से इस दिशा में तत्काल कदम उठाने की मांग की गई।
कुंभ क्षेत्र में अलग रिंग रोड का सुझाव
प्रेस वार्ता में हरिद्वार और ऋषिकेश के कुंभ क्षेत्र के लिए अलग रिंग रोड की व्यवस्था किए जाने का सुझाव भी दिया गया। संगठन का कहना है कि इससे यातायात व्यवस्था को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकता है और धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन में मदद मिल सकती है।
तीर्थ परिषद के गठन की मांग
संत महासभा ने उत्तराखंड सरकार से हरिद्वार तीर्थ क्षेत्र के लिए तीर्थ परिषद गठित करने की मांग की। प्रस्ताव के अनुसार परिषद में तीर्थ पुरोहित, मठ-मंदिरों के संचालक, जनप्रतिनिधि और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े लोगों को प्रतिनिधित्व दिया जाए।
संगठन ने सुझाव दिया कि तीर्थ परिषद के अधीन पुलिस-प्रशासन सहित संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि तीर्थ क्षेत्र की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जा सके। वार्ता में आचार्य मदन जी महाराज, आचार्य अजय कृष्ण जी महाराज, योगेंद्र वर्मा, विश्वास भार्गव, साक्षी वर्मा, उर्मिला यादव, अमरेश त्यागी, विजय पाण्डेय, दीपक कुमार, पंकज कुमार, अशोक शर्मा, शिवम शर्मा, शेष दत्त तिवारी, हरिद्वार जिलाध्यक्ष बृजेश शर्मा सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
संत महासभा ने कहा कि उसका उद्देश्य उत्तराखंड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषयों को सरकार के समक्ष रखना और तीर्थ क्षेत्रों की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग करना है।