नैनीताल/देहरादून, 11 अगस्त।
उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। मामले के मुख्य आरोपी पुलकित आर्य समेत तीनों दोषियों की ओर से दायर अपील और जमानत प्रार्थना पत्र पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अब इस मामले में 18 अगस्त को अभियोजन पक्ष और शिकायतकर्ता की ओर से अपना पक्ष रखा जाएगा।
सोमवार को न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ के समक्ष मुख्य आरोपी पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता की ओर से पक्ष रखा गया। बचाव पक्ष ने अदालत में दावा किया कि तीनों आरोपी निर्दोष हैं और उन्हें मामले में जबरन फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि मामले की कहानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कुछ व्हाट्सऐप संदेश सत्यापित नहीं हैं और उनके आधार पर आरोप तय किए गए हैं।
सुनवाई के दौरान तीनों आरोपियों की ओर से अपने बचाव में विभिन्न तथ्यों और तर्कों को अदालत के सामने रखा गया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुना। अब 18 अगस्त को अभियोजन पक्ष और शिकायतकर्ता की ओर से जवाब पेश किया जाएगा, जिसके बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।
गौरतलब है कि कोटद्वार की तत्कालीन अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीना नेगी की अदालत ने 30 मई 2025 को तीनों आरोपियों को अंकिता भंडारी की हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। मुख्य आरोपी पुलकित आर्य को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 201 और 354-ए के तहत दोषी ठहराया गया था। वहीं सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को धारा 302 और 201 के तहत दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा दी गई थी।
निचली अदालत के फैसले के खिलाफ तीनों दोषियों की ओर से हाईकोर्ट में अपील दायर की गई है, जिस पर सुनवाई लंबित है। इसी क्रम में अब 18 अगस्त की सुनवाई को अहम माना जा रहा है।
बता दें कि, सितंबर 2022 में अंकिता भंडारी हत्याकांड ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया था। अंकिता ऋषिकेश के पास स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। वह 18 सितंबर 2022 को संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुई थीं। छह दिन बाद 24 सितंबर को उनका शव चीला बैराज से बरामद किया गया था। इसके बाद मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया ने पूरे प्रदेश में व्यापक चर्चा पैदा की।
अब सबकी निगाहें 18 अगस्त को होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं।