दिवाली से पहले होने वाले आकलन में छह प्रमुख बिंदुओं पर परखी जाएगी विधायकों की स्थिति, हारी हुई 23 सीटों पर भी संगठन की नजर
देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों को और तेज करने के संकेत दिए हैं। संगठन के स्तर पर जहां बूथ से लेकर विधानसभा क्षेत्र तक तैयारियों को मजबूत करने की कवायद चल रही है, वहीं मौजूदा विधायकों की राजनीतिक स्थिति और संभावित टिकट को लेकर पार्टी एक और महत्वपूर्ण सर्वे कराने की तैयारी में बताई जा रही है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक अक्टूबर में दिवाली से पहले प्रस्तावित यह सर्वे मौजूदा विधायकों को लेकर अंतिम या निर्णायक आकलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। सर्वे के माध्यम से विधायकों की क्षेत्र में पकड़, जनता के बीच स्वीकार्यता, संगठन के साथ तालमेल और उनके कामकाज को लेकर जमीनी फीडबैक जुटाया जाएगा। तैयार रिपोर्ट को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ साझा किए जाने की संभावना है।
छह कसौटियों पर होगी विधायकों की परीक्षा
प्रस्तावित सर्वे में विधायकों की स्थिति को मुख्य रूप से छह बिंदुओं पर परखे जाने की बात सामने आ रही है।
पहला—क्षेत्रीय लोकप्रियता: विधायक की अपने विधानसभा क्षेत्र में व्यक्तिगत पकड़ और सक्रियता कितनी है।
दूसरा—जनता के बीच स्वीकार्यता: आम मतदाताओं के बीच विधायक को लेकर सकारात्मक अथवा नकारात्मक फीडबैक क्या है।
तीसरा—कार्यकर्ताओं से समन्वय: स्थानीय संगठन और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ विधायक का तालमेल किस स्तर का है।
चौथा—कामकाज का फीडबैक: विधायक के कार्यकाल के दौरान किए गए विकास कार्यों और जनता की अपेक्षाओं के बीच कितना तालमेल रहा।
पांचवां—दोबारा टिकट मिलने की स्थिति: यदि मौजूदा विधायक को ही प्रत्याशी बनाया जाता है तो संभावित चुनावी परिस्थितियां कैसी बन सकती हैं।
छठा—विकल्प की तलाश: यदि टिकट में बदलाव किया जाता है तो विधानसभा क्षेत्र में किन संभावित चेहरों पर संगठन विचार कर सकता है।
इन छह बिंदुओं के जरिए पार्टी यह समझने का प्रयास कर सकती है कि मौजूदा विधायक के पक्ष में जमीनी माहौल कितना मजबूत है और किन सीटों पर चेहरे में बदलाव की आवश्यकता महसूस हो सकती है।
सिर्फ विधायकों पर नहीं, हारी हुई सीटों पर भी फोकस
भाजपा की रणनीति केवल सिटिंग विधायकों के मूल्यांकन तक सीमित नहीं बताई जा रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी जिन 23 विधानसभा सीटों पर चुनाव हार गई थी, उन क्षेत्रों को भी आगामी चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इन सीटों पर संगठनात्मक स्थिति, स्थानीय राजनीतिक समीकरण, पिछले चुनाव के परिणाम, क्षेत्रीय मुद्दे और संभावित उम्मीदवारों को लेकर फीडबैक जुटाने पर भी जोर दिया जा सकता है। पार्टी का उद्देश्य इन सीटों पर पिछले चुनाव की कमियों को समझते हुए आगामी चुनाव के लिए पहले से रणनीति तैयार करना बताया जा रहा है।
सर्वे रिपोर्ट के बाद बदल सकता है टिकट का गणित
अक्टूबर में होने वाला प्रस्तावित आकलन इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके बाद पार्टी के भीतर संभावित टिकटों को लेकर तस्वीर धीरे-धीरे स्पष्ट हो सकती है। हालांकि किसी भी विधायक का टिकट केवल सर्वे रिपोर्ट के आधार पर तय होगा, यह कहना जल्दबाजी होगी। अंतिम निर्णय पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और निर्धारित संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत ही होगा।
राजनीतिक तौर पर सर्वे का महत्व इस लिहाज से भी देखा जा रहा है कि चुनाव से पहले पार्टी संभावित उम्मीदवारों की जमीनी स्वीकार्यता और संगठनात्मक स्थिति को समय रहते समझना चाहती है। ऐसे में मौजूदा विधायकों के साथ-साथ टिकट के संभावित दावेदारों की सक्रियता भी आने वाले समय में बढ़ सकती है।
मिशन 2027 के लिए अभी से बिछने लगी चुनावी बिसात
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियों को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है। भाजपा का प्रस्तावित सर्वे इसी व्यापक चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
अब अक्टूबर के सर्वे पर राजनीतिक गलियारों की नजर रहेगी। किस विधायक के पक्ष में जनता और कार्यकर्ताओं का फीडबैक आता है, किन सीटों पर मौजूदा चेहरे को लेकर सवाल सामने आते हैं और हारी हुई 23 सीटों पर पार्टी किस तरह की नई रणनीति तैयार करती है—इन सवालों के जवाब आने वाले समय में उत्तराखंड की चुनावी राजनीति की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
हालांकि अभी टिकट को लेकर किसी अंतिम निर्णय की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए सर्वे और संभावित बदलावों से जुड़ी चर्चाओं को फिलहाल पार्टी की चुनावी तैयारियों और आंतरिक आकलन के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।