मुंबई,22 अगस्त!
उत्तराखंड की लोक आस्था, संस्कृति और सदियों पुरानी लोकगाथाओं को बड़े पर्दे पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। उत्तराखंड के आराध्य एवं न्याय देवता गोलज्यू के बाल जीवन पर आधारित बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बाला गोरिया’ का पोस्टर मुंबई में भव्य रूप से रिलीज किया गया। फिल्म के पोस्टर लॉन्च के साथ ही उत्तराखंड की लोक संस्कृति और लोक देवताओं की गाथाओं को आधुनिक सिनेमा के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाने की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं।

हिमाद्रि प्रोडक्शंस के बैनर तले तैयार की जा रही ‘बाला गोरिया’ केवल मनोरंजन के उद्देश्य से बनाई गई फिल्म नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की लोक परंपराओं, आस्था, संस्कृति और पहाड़ की भावनात्मक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास है। फिल्म का पहला टीजर पहले ही जारी किया जा चुका है, जबकि अब फिल्म को अक्टूबर के पहले सप्ताह में सिनेमाघरों में रिलीज करने की तैयारी चल रही है।
मुंबई में हुआ पोस्टर लॉन्च
फिल्म के पोस्टर लॉन्च कार्यक्रम में उत्तराखंड और हिंदी सिनेमा से जुड़े कई प्रमुख कलाकार एवं फिल्म से जुड़े सदस्य मौजूद रहे। इस दौरान अभिनेता हेमंत पांडे, विजेंद्र काला, करण शर्मा, कृष्णा सिंह, निर्देशक नितिन तिवारी तथा निर्माता मनोज चंदोला सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
पोस्टर में फिल्म की विषयवस्तु और पहाड़ी लोक परिवेश की झलक देखने को मिलती है। फिल्म निर्माताओं का मानना है कि गोलज्यू की बाल जीवन की कथा के माध्यम से दर्शकों को लोक देवता के उस स्वरूप से परिचित कराया जाएगा, जिसकी जड़ें उत्तराखंड की लोक स्मृतियों और जनआस्था में गहराई से जुड़ी हैं।
पहाड़ की गोद में फिल्माई गई पूरी कहानी
‘बाला गोरिया’ की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसकी लोकेशन भी शामिल है। फिल्म की शूटिंग उत्तराखंड के प्राकृतिक और दूरस्थ क्षेत्रों में की गई है। बागेश्वर के लीती, तेजम और चकौड़ी के अलावा अल्मोड़ा और नैनीताल के विभिन्न क्षेत्रों को फिल्म की कहानी और दृश्यों का हिस्सा बनाया गया है।
निर्माता मनोज चंदोला के अनुसार फिल्म का पोस्ट प्रोडक्शन अंतिम चरण में है। फिल्म को आधुनिक तकनीक से प्रभावशाली बनाने के लिए AI और BFX जैसी तकनीकों का भी इस्तेमाल किया गया है। उद्देश्य यह है कि उत्तराखंड की पारंपरिक लोकगाथा को उसकी मौलिकता और भावनात्मक जुड़ाव के साथ आधुनिक सिनेमाई प्रस्तुति दी जा सके।
तीन भागों में सामने आएगी गोलज्यू की गाथा
हिमाद्रि प्रोडक्शंस ने उत्तराखंड के लोक देवताओं और लोक आख्यानों को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करने की एक व्यापक योजना तैयार की है। इसी श्रृंखला की पहली फिल्म ‘बाला गोरिया’ है, जिसे तीन भागों में बनने वाली श्रृंखला की शुरुआत बताया जा रहा है।
आने वाले भागों में न्याय देवता गोलज्यू के जीवन के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को दर्शाया जाएगा। इसके बाद उत्तराखंड के अन्य प्रमुख लोक देवताओं और लोकगाथाओं पर भी फिल्में बनाने की योजना है। इनमें हरज्यू, सैम, गंगनाथ और ऐड़ी जैसे लोक देवताओं की कथाओं को भी बड़े पर्दे पर लाने का प्रस्ताव है।
तीन दशक से पहाड़ की संस्कृति से जुड़ा है प्रोडक्शन हाउस
हिमाद्रि प्रोडक्शंस पिछले करीब तीन दशकों से हिंदी के साथ-साथ उत्तराखंड की विभिन्न भाषाओं और लोक संस्कृति से जुड़ी फिल्मों एवं नाटकों के माध्यम से पहाड़ की परंपराओं को मंच देता रहा है।
वर्ष 2014 में इसी बैनर ने उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोकगाथा पर आधारित फिल्म ‘राजुला’ का निर्माण किया था। फिल्म को देश के कई PVR सिनेमाघरों में एक साथ प्रदर्शित किया गया था। अब ‘बाला गोरिया’ के माध्यम से प्रोडक्शन हाउस ने लोक देवताओं और पहाड़ की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है।
बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ने की कोशिश
‘बाला गोरिया’ को खास तौर पर इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह प्रस्तावित श्रृंखला की पहली बाल फिल्म है। फिल्म में उत्तराखंड के बच्चों के साथ-साथ मुंबई में सक्रिय पहाड़ से जुड़े कलाकार भी नजर आएंगे।
फिल्म निर्माताओं के अनुसार आज की पीढ़ी आधुनिक तकनीक और मनोरंजन के विभिन्न माध्यमों से जुड़ी है। ऐसे में लोक कथाओं और लोक देवताओं की कहानियों को उसी आधुनिक माध्यम में प्रस्तुत करना जरूरी है, ताकि बच्चे अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक विरासत से परिचित हो सकें।
मनोरंजन से आगे लोक थाती को बचाने का संकल्प
निर्माता मनोज चंदोला का कहना है कि ‘बाला गोरिया’ बनाने का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोक थाती, संस्कृति, परंपराओं और आस्था को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। फिल्म के जरिए प्रयास किया जा रहा है कि पहाड़ की लोकगाथाएं केवल स्थानीय क्षेत्रों तक सीमित न रहें, बल्कि देश के अन्य हिस्सों और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक भी पहुंचें।
‘बाला गोरिया’ के पोस्टर रिलीज के बाद अब दर्शकों की निगाहें फिल्म के अंतिम रूप और अक्टूबर में प्रस्तावित रिलीज पर टिक गई हैं। यदि यह प्रयास सफल रहता है तो उत्तराखंड के लोक देवताओं और लोक आख्यानों पर आधारित फिल्मों के लिए सिनेमा के क्षेत्र में एक नई राह खुल सकती है।