धर्म रक्षा और सनातन के प्रचार-प्रसार में निभाएंगे अहम भूमिका – श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज…
हरिद्वार, 12 जुलाई।
साध्वी ऋतम्भरा के शिष्य स्वामी सत्यश्रेयानंद गिरी को रविवार को निरंजनी अखाड़े की ओर से महामंडलेश्वर की पदवी प्रदान की गई। कनखल स्थित बेंकट हॉल में आयोजित भव्य पट्टाभिषेक समारोह में देशभर से आए संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति के बीच वैदिक मंत्रोच्चार, तिलक, चादर विधि और पुष्पवर्षा के साथ उनका विधिवत अभिषेक किया गया। समारोह आध्यात्मिक आस्था, संत परंपरा और अखाड़ा संस्कृति का अनुपम संगम बन गया।



मुख्य अतिथि निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि स्वामी सत्यश्रेयानंद गिरी एक विद्वान, तेजस्वी और कर्मशील संत हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे अखाड़ा परंपरा और सनातन धर्म की मर्यादाओं का पालन करते हुए धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।



पट्टाभिषेक समारोह अखाड़े के पंच परमेश्वरों के सानिध्य में आयोजित हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता आनंद पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरी महाराज ने की, जबकि संचालन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने किया। इस अवसर पर सभी 13 अखाड़ों के संत-महात्माओं ने स्वामी सत्यश्रेयानंद गिरी को महामंडलेश्वर पद की गरिमा के अनुरूप आशीर्वाद प्रदान करते हुए उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक भविष्य की कामना की।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य ने धर्म रक्षा और राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना को सशक्त बनाए रखने के उद्देश्य से अखाड़ों की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि अखाड़ा परंपरा में महामंडलेश्वर का पद अत्यंत महत्वपूर्ण और जिम्मेदारीपूर्ण होता है। उन्हें विश्वास है कि स्वामी सत्यश्रेयानंद गिरी इस दायित्व का सफलतापूर्वक निर्वहन करते हुए धर्म रक्षा, सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार तथा निरंजनी अखाड़े की उन्नति में उल्लेखनीय योगदान देंगे।
अपने शिष्य को महामंडलेश्वर पद प्राप्त होने पर साध्वी ऋतम्भरा ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सनातन की संन्यास परंपरा विश्व की सबसे प्राचीन और गौरवशाली परंपराओं में से एक है। उन्होंने कहा कि स्वामी सत्यश्रेयानंद गिरी मानव कल्याण, राष्ट्र सेवा और सनातन धर्म के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित भाव से कार्य करेंगे तथा समाज को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करेंगे।
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरी महाराज ने कहा कि युवा संतों में स्वामी सत्यश्रेयानंद गिरी का व्यक्तित्व प्रेरणादायी है। वे अपने दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करते हुए समाज में आध्यात्मिक चेतना जागृत करेंगे और युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति एवं सनातन मूल्यों से जोड़ने का कार्य करेंगे।
इस अवसर पर जगद्गुरु महामंडलेश्वर कुमार स्वामी, आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अरुण गिरी, आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद भारती, निर्मल अखाड़े के सचिव महंत बलवंत सिंह, निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रामरतन गिरी तथा महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद सहित अनेक संतों ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक एकता और अखंडता को बनाए रखने में संत समाज की सदैव महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि स्वामी सत्यश्रेयानंद गिरी युवा संतों को साथ लेकर समाज को सांस्कृतिक रूप से सशक्त और संगठित करने में अहम योगदान देंगे।
नवनियुक्त महामंडलेश्वर स्वामी सत्यश्रेयानंद गिरी ने अपने संबोधन में सभी संत-महापुरुषों, अखाड़ा परिषद और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वे अपनी गुरु साध्वी ऋतम्भरा से प्राप्त संस्कारों और शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज के नेतृत्व में सनातन धर्म के संरक्षण, संवर्धन और निरंजनी अखाड़े की प्रगति के लिए पूर्ण समर्पण के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि संत समाज का दायित्व केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करना भी है।
समारोह में पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति और मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट मंत्री सावित्री ठाकुर ने भी स्वामी सत्यश्रेयानंद गिरी को महामंडलेश्वर पद की शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद, महामंडलेश्वर स्वामी रामानुज सरस्वती, महामंडलेश्वर स्वामी सहजानंद पुरी, महामंडलेश्वर स्वामी वेदमूर्ति, महामंडलेश्वर स्वामी अंजना देवानंद गिरी, स्वामी संतोषानंद, स्वामी सच्चिदानंद, स्वामी रूपेंद्र प्रकाश, स्वामी वैराग्यानंद गिरी, महंत दर्शन भारती, महंत भूपेंद्र गिरी, महंत राज गिरी, स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी सत्यशील गिरी, स्वामी सत्यश्रवानंद गिरी, राज्यमंत्री राजेश अग्रवाल, मेयर किरण जैसल, विश्वास सक्सेना सहित बड़ी संख्या में संत, जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित रहे। समारोह आध्यात्मिक उल्लास, संत परंपरा और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण का भव्य प्रतीक बनकर संपन्न हुआ।