हरिद्वार, 1 अगस्त।
समाज में आध्यात्मिक चेतना और नैतिक मूल्यों के प्रसार के साथ-साथ बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से श्री अखंड परशुराम अखाड़े द्वारा शनिवार को जिला कारागार रोशनाबाद में भव्य गंगा कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ किया गया। श्रद्धा, भक्ति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आरंभ हुए इस आयोजन में संत-महात्माओं, जेल प्रशासन तथा अखाड़े के पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कथा के प्रथम दिवस में कथाव्यास आचार्य संजय कृष्ण शास्त्री ने मां गंगा के दिव्य स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था, करुणा और आत्मशुद्धि की प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि गंगा कथा का मुख्य उद्देश्य बंदियों के मन में आत्मचिंतन, पश्चाताप, नैतिकता और आध्यात्मिक चेतना का संचार करना है, ताकि वे अपने जीवन की गलतियों से सीख लेकर एक नई और सकारात्मक शुरुआत कर सकें।
उन्होंने कहा कि धर्म और अध्यात्म मनुष्य को भीतर से बदलने की शक्ति रखते हैं। जब व्यक्ति अपने अंतर्मन को पहचानता है और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लेता है, तब उसके जीवन में वास्तविक परिवर्तन आता है। कथा के दौरान सेवा, संस्कार, मानवता, करुणा, क्षमा और समाज के प्रति जिम्मेदारी जैसे विषयों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया।
श्री अखंड परशुराम अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में दूसरा अवसर अवश्य मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपने पूर्व कर्मों से ऊपर उठकर भक्ति, आत्मविश्वास और सत्कर्मों के माध्यम से अपने जीवन को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि गंगा कथा के श्रवण से बंदियों के मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और वे समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक लौटने के लिए प्रेरित होंगे।
जेल अधीक्षक मनोज आर्य ने श्री अखंड परशुराम अखाड़े का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम बंदियों के मानसिक एवं नैतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि मां गंगा की कथा बंदियों के भीतर नई आशा, आत्मबल और सकारात्मक सोच का संचार करेगी तथा उन्हें अपने जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा देगी।
कार्यक्रम के दौरान भागवताचार्य पंडित पवन कृष्ण शास्त्री, जलज कौशिक, स्वामी कार्तिक गिरी, शीतल पंडित, विष्णु शास्त्री, सत्यम शर्मा, बृजमोहन शर्मा, मनोज ठाकुर और सोमेश खत्री सहित अनेक गणमान्य लोगों ने व्यासपीठ का पूजन कर कथाव्यास का आशीर्वाद प्राप्त किया।
आयोजकों ने बताया कि गंगा कथा के आगामी दिनों में भी विभिन्न आध्यात्मिक प्रसंगों के माध्यम से बंदियों को नैतिक जीवन, आत्मअनुशासन, राष्ट्रप्रेम, परिवार के महत्व और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का संदेश दिया जाएगा। कथा का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि बंदियों के व्यक्तित्व निर्माण और उनके पुनर्वास की दिशा में एक सार्थक पहल करना भी है।