हरिद्वार।
 उच्च न्यायालय उत्तराखण्ड द्वारा पंतद्वीप पार्किंग की नीलामी व अवधि विस्तार में अनियमितता व मानकों की अनदेखी के खिलाफ दायर वाद में सीबीआई जांच के आदेश देने के बावजूद भी सिंचाई विभाग उच्च न्यायालय के आदेश की अनदेखी करते हुए अपने चहेते ठेकेदार से पार्किंग का संचालन करवा रहा है।  ज्ञात हो कि सिंचाई विभाग द्वारा पंतद्वीप पार्किंग का ठेका वर्ष 2019 में 3 वर्षों की अवधि के लिए दिया गया था। जिसमें ठेकेदार व विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से दो भाईयों के फर्मों के बीच ही बोली करवाकर पार्किंग का ठेका रिद्धिम एसोसिएट को दे दिया गया था। जिसके खिलाफ रूडकी निवासी अशोक कुमार सिंह ने रिट दायर की थी। रिट में अशोक कुमार सिंह ने निविदा में विभागीय अधिकारियों व ठेकेदारों की मिलीभगत व कोविड के नाम पर बार-बार समय अवधि बढ़ाये जाने को चुनौती दी थी। पंतद्वीप पार्किंग नीलामी का यह प्रकरण 2019 से ही विवादों के घेरे में रहा है। अशोक कुमार सिंह की रिट की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने समय वृद्धि को निरस्त करते हुए मामले को बहुत गम्भीर बताया और पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने के आदेश दिये। इसके साथ ही कहा कि 2 माह में पार्किंग की नीलामी करायी जाये। इसके बाद भी सिंचाई विभाग अपने चहेते ठेकेदार का मोह नहीं छोड रहा है। उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद सिंचाई विभाग ने न तो टेण्डर प्रक्रिया प्रारम्भ की है न ही अपने चहेते ठेकेदार से चार्ज वापस लिया है। न्यायालय के आदेश की अनदेखी कर अपने चहेते ठेकेदार से ही पार्किंग का संचालन कराया जा रहा है। जिससे विभाग को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। इस संदर्भ में समूचे प्रकरण की विभाग में उच्च स्तर पर शिकायत कर चुके शर्मा टे्रडर्स के मधुकर शर्मा ने कहा कि विभाग को न्यायालय के आदेश के उपरान्त त्वरित कार्रवाई करते हुए ठेकेदार से कब्जा वापस लेना चाहिए। निविदा की प्रक्रिया प्रारम्भ करनी चाहिए। नीलामी होने तक अस्थायी रूप से प्रतिदिन की दर पर पार्किंग का संचालन कोटेशन के आाार पर करवाना चाहिए।

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