संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह में राष्ट्र निर्माण, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत पर दिया गया विशेष जोर।

भारत विश्वगुरु था, है और रहेगा : ले. जनरल अजय कुमार
राष्ट्र निर्माण के लिए संघ तैयार कर रहा स्वयंसेवक : संदीप जैन
पंच परिवर्तन से भारत बनेगा परम वैभवशाली राष्ट्र : डॉ. शैलेन्द्र
विश्व में बढ़ रही भारत की पहचान, समाज को भी बनाना होगा समरस : वक्ता

हरिद्वार, 13 जून ।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तराखंड प्रांत के 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग (विद्यार्थी) का समापन सोमवार को सरस्वती विद्या मंदिर, सेक्टर-2, रानीपुर, भेल में उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। वर्ग का शुभारंभ 28 मई को यज्ञ-हवन एवं सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ के साथ हुआ था। समापन समारोह में स्वयंसेवकों ने शारीरिक और बौद्धिक प्रशिक्षण की झलक प्रस्तुत करते हुए राष्ट्र निर्माण के प्रति अपने संकल्प को दोहराया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह में मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार ने कहा कि भारत के सामने बाहरी और आंतरिक दोनों प्रकार की सुरक्षा चुनौतियां मौजूद हैं। पाकिस्तान और चीन के साथ सीमाओं की संवेदनशीलता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश को हर परिस्थिति का सामना करने के लिए सदैव तैयार रहना होगा। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आधुनिक युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गए हैं, इसलिए विज्ञान, तकनीक और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देना समय की मांग है। इसके लिए आवश्यक है कि हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को पहचानें, उसे जीवन में उतारें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें।

उन्होंने स्वयंसेवकों से अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और संवैधानिक कर्तव्यों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत सहित सभी राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान की भावना होना आवश्यक है। भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “भारत विश्वगुरु था नहीं, भारत आज भी विश्वगुरु है और भविष्य में भी विश्वगुरु रहेगा। इसके लिए हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहना होगा।” सभी के प्रति सम्मान की भावना रखते हुए राष्ट्र सुरक्षा और समाज हित के कार्यों में सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। भारत की सांस्कृतिक पहचान ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है, जिसे संरक्षित और सशक्त बनाए रखना हम सभी का दायित्व है।

विशिष्ट अतिथि एवं उद्यमी संदीप जैन ने कहा कि राष्ट्र का निर्माण होगा तो प्रत्येक नागरिक का विकास सुनिश्चित होगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इसी उद्देश्य से कार्य कर रहा है कि प्रत्येक भारतीय में राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीयता की भावना विकसित करना है। उन्होंने कहा कि संघ समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित स्वयंसेवकों का निर्माण कर रहा है।

समारोह के मुख्य वक्ता डॉ. शैलेन्द्र जी ने कहा कि सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध तथा नागरिक कर्तव्य जैसे पंच परिवर्तन के माध्यम से ही भारत परम वैभव को प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि संघ शिक्षा वर्ग व्यक्ति निर्माण की प्रयोगशाला है, जहां कठोर अनुशासन, शारीरिक एवं बौद्धिक प्रशिक्षण के माध्यम से स्वयंसेवकों को राष्ट्र कार्य के लिए तैयार किया जाता है।

उन्होंने कहा कि जी-20 की अध्यक्षता, चंद्रयान मिशन की सफलता और आर्थिक प्रगति के कारण विश्व की निगाहें भारत पर हैं, लेकिन यह उपलब्धियां तभी सार्थक होंगी जब समाज के भीतर व्याप्त छुआछूत, ऊंच-नीच और जातिगत भेदभाव जैसी कुरीतियों का समूल नाश होगा। उन्होंने शिक्षार्थियों से अपने गांव और मोहल्लों में स्वच्छता, शिक्षा अथवा स्वास्थ्य जैसे सामाजिक कार्यों की जिम्मेदारी लेने का आह्वान किया।

समारोह के दौरान शिक्षार्थियों ने दंड युद्ध, नियुद्ध, योगासन, सूर्य नमस्कार तथा सामूहिक समता का आकर्षक प्रदर्शन प्रस्तुत कर उपस्थित जनसमूह की सराहना प्राप्त की।
वर्ग सर्वव्यावस्था प्रमुख वीर प्रताप ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि 15 दिवसीय इस संघ शिक्षा वर्ग में उत्तराखंड के 13 जिलों से कुल 306 शिक्षार्थियों ने भाग लिया। वर्ग के दौरान 40 घंटे का शारीरिक प्रशिक्षण तथा 60 घंटे के बौद्धिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें संघ का इतिहास, भारतीय संस्कृति, वर्तमान चुनौतियां एवं पंच परिवर्तन विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

उन्होंने वर्ग के सफल आयोजन के लिए भेल प्रबंधन, विद्यालय परिवार एवं हरिद्वार के नागरिकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में जिला संचालक डॉ. यतींद्र नाग्यान, वर्गाधिकारी प्रवीण कुमार, प्रांत सह प्रचारक चंद्रशेखर जी, विभाग पालक सुनील जी, विभाग प्रचारक राकेश जी सहित अनेक गणमान्य नागरिक, उद्योगपति एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

वर्ग गीत एवं राष्ट्रगीत “वंदे मातरम्” के सामूहिक गायन के साथ संघ शिक्षा वर्ग का विधिवत समापन हुआ।

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