टाइगर मौत कांड में बड़ी कार्रवाई: श्यामपुर रेंज के रेंजर देहरादून अटैच, PFA संस्था ने कहा- निष्पक्ष जांच तक जारी रहेगा संघर्ष !
पीपुल्स फॉर एनिमल्स (PFA) : जब रंजेर घर सोये, तो सुरक्षा कहा से होए !


हरिद्वार। 24 मई
हरिद्वार वन विभाग की श्यामपुर रेंज में गुरूवार को दो (शावको ) बाघ की संदिग्ध मौत और फिर उनके पंजे काटे जाने के मामले में वन विभाग ने प्रारंभिक जांच में बताया की दोनों बाघो को जहर देकर मारा गया। वन विभाग द्वारा शनिवार को बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए श्यामपुर रेंज के रेंजर विनय राठी को देहरादून मुख्यालय से संबद्ध (अटैच) कर दिया है। यह कार्रवाई उस समय हुई है जब मामले को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी संस्था पीपुल्स फॉर एनिमल्स (PFA) हरिद्वार ने रेंज अधिकारी की भूमिका और कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
संस्था का आरोप है कि टाइगर शिकार और वन्यजीव तस्करी से जुड़े इस गंभीर मामले में क्षेत्रीय स्तर पर लापरवाही बरती गई, जिसके कारण शिकारियों के हौसले बुलंद हुए। PFA का कहना है कि जब तक पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संस्था इस मामले को उठाती रहेगी।
संस्था के पदाधिकारियों का दावा है कि घटना की रात संबंधित अधिकारी अपने क्षेत्र से बाहर निजी निवास पर मौजूद थे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि संवेदनशील वन क्षेत्र में निगरानी और गश्त की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी। संस्था ने अधिकारियों की लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की भी जांच कराने की मांग की है।
चार आरोपी गिरफ्तार, एक अभी फरार
वन विभाग ने टाइगर शिकार मामले में कार्रवाई करते हुए अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों में आशिक पुत्र गामा, जुप्पी पुत्र अल्लू और यूसुफ पुत्र कालू शामिल हैं, जबकि इससे पहले आलम उर्फ फम्मी को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
वन विभाग के अनुसार मामले में कुल पांच आरोपियों के नाम सामने आए हैं। इनमें से एक आरोपी आमिर हमजा उर्फ मियां अभी फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
DFO बोले- जांच जारी, अन्य की भूमिका भी खंगाली जा रही
डीएफओ ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है। मामले की गहन जांच जारी है और यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जंगलों में बढ़ती घुसपैठ पर भी सवाल
स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि श्यामपुर और उससे जुड़े वन क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों में गुज्जर डेरों और बाहरी गतिविधियों में वृद्धि हुई है। राजा जी टाइगर रिजर्व से लगे क्षेत्रों में पशुओं की आवाजाही और अनधिकृत प्रवेश को लेकर भी लंबे समय से चिंताएं जताई जाती रही हैं।
बड़ा सवाल: आखिर जिम्मेदार कौन?
दो टाइगरों की मौत, शवको के पंजे काटे जाने और शिकारियों के जंगल में सक्रिय रहने की घटना ने वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अपराध अचानक नहीं होते, बल्कि इनके पीछे सुनियोजित नेटवर्क और क्षेत्रीय गतिविधियों की जानकारी रखने वाले लोगों की भूमिका हो सकती है।
फिलहाल वन विभाग जांच का दावा कर रहा है, लेकिन जनता और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी संस्थाएं यह जानना चाहती हैं कि आखिर ऐसी घटना होने से पहले सुरक्षा व्यवस्था कहां थी ? और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे ?