नारी सम्मान, मानव सेवा और प्रकृति की रक्षा ही सच्ची भक्ति का स्वरूप…

डरबन/हरिद्वार,18 अक्टूबर 2026।
शारदीय नवरात्र के समापन पर अंतरराष्ट्रीय संत स्वामी रामभजन वन महाराज ने श्रद्धालुओं से कन्या पूजन के साथ नारी सम्मान, मानव सेवा और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया है। श्री तपोनिधि पंचायती अखाड़ा निरंजनी, मायापुर, हरिद्वार से जुड़े महाराज ने कहा कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि बेटियों के सम्मान, जरूरतमंदों की सेवा और प्रकृति की रक्षा में भी दिखाई देती है।

स्वामी रामभजन वन महाराज ने कहा कि कन्याओं में देवी का स्वरूप देखना भारतीय संस्कृति की महान परंपरा है। कन्या पूजन तभी सार्थक होगा, जब समाज में बेटियों को सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर मिलेंगे। उन्होंने श्रद्धालुओं से नारी शक्ति के प्रति आदर को अपने व्यवहार और जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की।

विजयादशमी के संदेश पर प्रकाश डालते हुए महाराज ने कहा कि यह पर्व बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। रावण दहन के साथ मनुष्य को अपने भीतर के अहंकार, क्रोध, लोभ और द्वेष का भी अंत करने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने जरूरतमंदों की सहायता करने और सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करने का संदेश दिया।

धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति की रक्षा भी जरूरी
पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए स्वामी रामभजन वन महाराज ने कहा कि पूजा-पाठ के बाद बची सामग्री, देवी साख (जौ के अंकुर) और अन्य धार्मिक अवशेषों का निस्तारण जिम्मेदारी से करना चाहिए। इन्हें नदियों और तालाबों में फेंकने के बजाय स्थानीय नियमों के अनुरूप उचित स्थान पर विसर्जित या निस्तारित किया जाना चाहिए। प्लास्टिक और अन्य कचरे को जलस्रोतों में डालने से बचना भी प्रत्येक श्रद्धालु की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि प्रकृति की रक्षा करना भी धर्म और मानवता की सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। स्वच्छ जल, स्वच्छ वातावरण और हरियाली आने वाली पीढ़ियों के लिए अनमोल धरोहर हैं, जिन्हें सुरक्षित रखना हम सभी का कर्तव्य है।

स्वामी रामभजन वन महाराज ने श्रद्धालुओं से अपील की कि इस नवरात्र केवल देवी की आराधना ही न करें, बल्कि नारी सम्मान, मानव सेवा और पर्यावरण संरक्षण को अपने जीवन का संकल्प बनाएं। उन्होंने कहा कि जब धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारी और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता जुड़ती है, तभी भक्ति का वास्तविक उद्देश्य पूरा होता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!