हरिद्वार, 8 अक्टूबर।
आधुनिकता और बदलती जीवनशैली के बीच युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन-मूल्यों से जोड़ने की दिशा में अचीवर्स होम विद्यालय में सनातन धरोहर एवं प्राचीन 16 संस्कारों के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व पर प्रभावशाली कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को भारतीय जीवन-दर्शन से जोड़ते हुए संस्कारों की उपयोगिता को आधुनिक संदर्भ में समझाया गया।



कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, अनुशासन और जिम्मेदार जीवनशैली से परिचित कराना रहा। वक्ताओं ने कहा कि संस्कार केवल धार्मिक परंपराएं नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र निर्माण और सामाजिक व्यवस्था को मजबूत करने वाली जीवन-पद्धति हैं।

कार्यक्रम में भारत विकास परिषद एवं शिक्षा जगत से जुड़े विभिन्न विद्वानों ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। एडवोकेट कुशल पाल सिंह चौहान, प्रांतीय संयोजक, ने आधुनिक समय में भारतीय मूल्यों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। कैप्टन विपिन जोशी, अध्यक्ष मायापुरी शाखा, ने अनुशासन और संस्कारों को सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया।



श्री राजेंद्र सिंह राणा, संगठन सचिव, ने सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने में संस्कारों की भूमिका पर अपने विचार रखे। वहीं डॉ. कपिल पांडे, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, ने गर्भाधान से लेकर अन्त्येष्टि तक के 16 संस्कारों के पीछे बताए जाने वाले वैज्ञानिक एवं सामाजिक पक्षों को विद्यार्थियों के समक्ष सरल और रोचक तरीके से प्रस्तुत किया। श्री मनु गुप्ता, पर्यावरण संयोजक, ने संस्कारों और प्रकृति संरक्षण के बीच के संबंध पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के आरंभ में विद्यालय प्रबंधन की ओर से सभी अतिथियों का भावपूर्ण स्वागत किया गया। विद्यालय के निदेशक श्री नितिन अहलूवालिया, प्रधानाचार्य डॉ. एस. सरकार एवं समन्वयक लोकेश सर ने कहा कि भारतीय संस्कृति और संस्कारों से विद्यार्थियों को जोड़ने वाले ऐसे आयोजन उनके सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यशाला के समापन अवसर पर विद्यार्थियों ने 16 संस्कारों में निहित जीवन-मूल्यों को समझने और उन्हें अपने व्यावहारिक जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति गौरव और जागरूकता की भावना को मजबूत किया।