पौष्टिक आहार के प्रति जागरूकता को लेकर विद्यार्थियों ने दिखाई रचनात्मकता, अलीशा ने हासिल किया प्रथम स्थान
हरिद्वार, 08 अक्टूबर 2026।
एस.एम.जे.एन. पी.जी. कॉलेज, हरिद्वार में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई की ओर से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत पौष्टिक एवं संतुलित आहार के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से स्लोगन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने आकर्षक और संदेशपरक स्लोगनों के माध्यम से संतुलित आहार, सुपोषण, स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवनशैली का महत्व प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
विद्यार्थियों ने अपने स्लोगनों के जरिए पौष्टिक भोजन को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने, कुपोषण को दूर करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। फल, हरी सब्जियों एवं पौष्टिक खाद्य पदार्थों के सेवन के साथ नियमित दिनचर्या और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने पर भी विशेष जोर दिया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आयुर्वेद रत्न डॉ. सत्यनारायण शर्मा ने विद्यार्थियों को संतुलित आहार एवं स्वस्थ जीवनशैली के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भोजन केवल शरीर को ऊर्जा देने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने विद्यार्थियों को फल, हरी सब्जियां और पौष्टिक खाद्य पदार्थों को दैनिक आहार में शामिल करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए हमेशा बड़े बदलाव जरूरी नहीं होते, बल्कि दैनिक जीवन की छोटी-छोटी अच्छी आदतें भी सकारात्मक परिणाम देती हैं। समय पर सोना, समय पर जागना और नियमित दिनचर्या अपनाना स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. सुनील कुमार बत्रा ने कहा कि “संतुलित आहार अपनाना जीवन को स्वस्थ बनाने की एक पहल है।” उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन के लिए भोजन की गुणवत्ता एवं संतुलन पर ध्यान देना आवश्यक है। बदलती जीवनशैली के बीच विद्यार्थियों को पौष्टिक भोजन के प्रति जागरूक होने की जरूरत है। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं स्वस्थ आहार अपनाने के साथ परिवार और समाज में भी पौष्टिक भोजन के प्रति जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संजय कुमार माहेश्वरी ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा—“कुपोषण जड़ से मिटाना है, सुपोषण की लहर चलाना है।” उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए कुपोषण के प्रति जागरूकता बेहद जरूरी है तथा प्रत्येक व्यक्ति को अपने दैनिक भोजन में आवश्यक पोषक तत्वों को शामिल करना चाहिए।
कार्यक्रम अधिकारी डॉ. पदमावती तनेजा ने कहा—“जैसा अन्न, वैसा मन।” उन्होंने कहा कि हमारे खान-पान का प्रभाव केवल शारीरिक स्वास्थ्य पर ही नहीं, बल्कि मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। उन्होंने विद्यार्थियों से पौष्टिक भोजन को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने और अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों के अत्यधिक सेवन से बचने की अपील की।
प्रतियोगिता की सह-संयोजक डॉ. पुनीता शर्मा रहीं। स्लोगनों का मूल्यांकन डॉ. पल्लवी, डॉ. मीनाक्षी एवं डॉ. रेनू सिंह ने निर्णायक मंडल के रूप में किया। निर्णायकों ने विषयवस्तु, संदेश की स्पष्टता, रचनात्मकता और प्रभावशीलता के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया।
प्रतियोगिता के परिणाम
प्रथम स्थान — अलीशा
तृतीय स्थान — मयूरी
विजेता विद्यार्थियों को बधाई देते हुए महाविद्यालय परिवार ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम के समापन पर राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विनय थपलियाल ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों, निर्णायक मंडल एवं प्रतिभागी छात्र-छात्राओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने स्वस्थ जीवन में औषधीय एवं प्राकृतिक संसाधनों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इनके उचित ज्ञान और उपयोग को उपयोगी बताया।
इस अवसर पर डॉ. गौरव अग्रवाल, श्रीमती रिचा मिनोचा, श्रीमती रिंकल गोयल, डॉ. गीता शाह, अंकित बंसल, डॉ. अनुरीषा, डॉ. मोना शर्मा, डॉ. लता शर्मा एवं डॉ. सरोज शर्मा सहित महाविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतियोगिता तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों में पौष्टिक आहार, सुपोषण और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति स्थायी जागरूकता विकसित करना रहा। विद्यार्थियों के रचनात्मक स्लोगनों ने स्वस्थ खान-पान और संतुलित जीवनशैली का संदेश प्रभावी ढंग से समाज तक पहुंचाया।