कोर्ट ने जुर्माना राशि में से 9 लाख रुपये शिकायतकर्ता को प्रतिकर के रूप में देने के दिए आदेश
हरिद्वार 3 सितम्बर ।
चेक बाउंस के एक मामले में न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए एक वर्ष की कठोर कैद की सजा सुनाई है। साथ ही न्यायालय ने आरोपी पर 9 लाख 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। मामले की सुनवाई करते हुए एसीजेएम अविनाश कुमार श्रीवास्तव ने यह फैसला सुनाया।
अधिवक्ता राकेश सिंह के अनुसार, रामधाम कॉलोनी निवासी अतुल शर्मा बिल्डिंग मैटेरियल बेचने का कारोबार करते हैं। वहीं आरोपी मनमोहन सिंह रावत पुत्र कुंवर सिंह, निवासी शिवालिक नगर, रानीपुर, सिडकुल क्षेत्र में बिल्डिंग ठेकेदारी का कार्य करता है।
शिकायत के अनुसार, मनमोहन सिंह रावत ने अतुल शर्मा से करीब 9 लाख रुपये का बिल्डिंग मैटेरियल खरीदा था। सामान लेने के बाद जब शिकायतकर्ता ने उससे बकाया रकम का भुगतान करने को कहा तो आरोपी लगातार टालमटोल करता रहा। काफी समय बीतने के बाद आरोपी ने भुगतान के लिए अपने बैंक खाते का 9 लाख रुपये का चेक शिकायतकर्ता को सौंपा और भरोसा दिलाया कि बैंक में जमा करने पर चेक का भुगतान हो जाएगा।
शिकायतकर्ता ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत चेक को अपने बैंक खाते में भुगतान के लिए प्रस्तुत किया, लेकिन आरोपी के खाते में पर्याप्त धनराशि उपलब्ध नहीं होने के कारण बैंक ने चेक को बिना भुगतान के वापस कर दिया।
इसके बाद शिकायतकर्ता की ओर से आरोपी को बकाया धनराशि का भुगतान करने के लिए कानूनी नोटिस भेजा गया। अधिवक्ता के मुताबिक, नोटिस दिए जाने के बावजूद आरोपी ने निर्धारित अवधि में रकम का भुगतान नहीं किया। भुगतान नहीं होने पर शिकायतकर्ता ने न्यायालय की शरण लेते हुए आरोपी के खिलाफ चेक बाउंस का मामला दायर किया।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद एसीजेएम अविनाश कुमार श्रीवास्तव ने मनमोहन सिंह रावत को दोषसिद्ध करते हुए एक वर्ष की कठोर कैद और 9 लाख 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
न्यायालय ने अर्थदंड की राशि के संबंध में भी महत्वपूर्ण आदेश दिया है। फैसले के अनुसार, अर्थदंड में से 9 लाख रुपये शिकायतकर्ता अतुल शर्मा को प्रतिकर के रूप में अदा किए जाएंगे, जबकि शेष 10 हजार रुपये सरकारी खाते में जमा किए जाएंगे।
यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां कारोबार में उधारी अथवा बकाया भुगतान के लिए दिए गए चेक बैंक से अनादरित होने के बाद मामला न्यायालय तक पहुंचता है।