वैदिक परंपरा भारतीय संस्कृति की आत्मा, युवा पीढ़ी को वेद-वेदांग से जोड़ना जरूरी : राज्यपाल

नासिक, महाराष्ट्र, 11 अगस्त।
महर्षि गौतम गोदावरी वेद विद्या प्रतिष्ठान, नासिक में रविवार को चतुर्वेद सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। सम्मेलन में महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री जिष्णु देव वर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर देश के विभिन्न प्रांतों से पहुंचे वैदिक विद्वानों, आचार्यों और वेदपाठी विद्यार्थियों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में वैदिक परंपरा, शास्त्रों के संरक्षण और युवा पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।

सम्मान समारोह के दौरान राज्यपाल श्री जिष्णु देव वर्मा ने विभिन्न राज्यों से आए वैदिक आचार्यों को शाल, श्रीफल एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा सम्मानित 19 वर्षीय युवा वैदिक विद्वान श्री देवव्रत रेखे को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। श्री रेखे ने कुछ समय पूर्व काशी में दण्डक्रम पाठ कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की थी, जिसकी देशभर में सराहना हुई है।

वेद भारतीय संस्कृति की आत्मा : प्रो. रमाकान्त पाण्डेय
सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रमाकान्त पाण्डेय ने कहा कि महाराष्ट्र ने सदैव भारतीय शास्त्रों, संस्कृत भाषा और वैदिक परंपराओं के संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाई है। वैदिक विद्वानों का सम्मान केवल किसी व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और सनातन सांस्कृतिक विरासत का सम्मान है।

उन्होंने कहा कि वेद केवल पाठ या मंत्रों का संग्रह नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। वेदों को कंठस्थ रखने वाले विद्यार्थी और आचार्य हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर के सच्चे संवाहक हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में भी वैदिक शिक्षा और पारंपरिक पाठ पद्धतियों को संरक्षित करना अत्यंत आवश्यक है।

प्रो. पाण्डेय ने महर्षि गौतम गोदावरी वेद विद्या प्रतिष्ठान के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था पिछले कई वर्षों से वैदिक शिक्षा, स्वर-व्यंजन की शुद्धता तथा पारंपरिक वेदपाठ की पद्धतियों को जीवित रखने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। ऐसी संस्थाएं आने वाली पीढ़ियों तक भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

युवा वैदिक विद्वान राष्ट्र की सांस्कृतिक पूंजी : राज्यपाल
राज्यपाल श्री जिष्णु देव वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि वेद और वेदांग भारतीय सभ्यता की महान विरासत हैं। इनके संरक्षण की जिम्मेदारी केवल किसी एक संस्था या वर्ग की नहीं, बल्कि सरकार और समाज दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि सरकार और समाज को मिलकर ऐसी संस्थाओं को अधिक से अधिक सहयोग देना चाहिए, जो युवा पीढ़ी को वेद-वेदांग और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने का कार्य कर रही हैं। उन्होंने युवा वैदिक विद्वान देवव्रत रेखे जैसे प्रतिभाशाली युवाओं को “राष्ट्र की सांस्कृतिक पूंजी” बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

सामूहिक वेदपाठ और शास्त्रार्थ ने बांधा समां
चतुर्वेद सम्मेलन के दौरान वैदिक विद्वानों द्वारा सामूहिक वेदपाठ किया गया। इसके साथ ही प्रवचन एवं शास्त्रार्थ के माध्यम से वेदों और भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न पक्षों पर विचार-विमर्श हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण आध्यात्मिक और ज्ञानमय हो उठा।

सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, अध्यापक, छात्र एवं वैदिक परंपरा से जुड़े लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के समापन अवसर पर गोदावरी तट पर सामूहिक आरती का आयोजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और आरती के साथ चतुर्वेद सम्मेलन का भव्य एवं आध्यात्मिक वातावरण में समापन हुआ।

सम्मेलन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा को जीवित रखने के लिए वैदिक शिक्षा, संस्कृत और गुरु-शिष्य परंपरा का संरक्षण बेहद आवश्यक है। ऐसे आयोजनों से न केवल वैदिक विद्वानों को प्रोत्साहन मिलता है, बल्कि युवा पीढ़ी को भी अपनी प्राचीन सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!