हरिद्वार, 17 जून 2026।
धर्मनगरी हरिद्वार ने बुधवार को एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बनकर विश्व पटल पर अपनी पहचान को और अधिक गौरवान्वित किया। रुड़की रोड स्थित बहादराबाद टोल प्लाजा के समीप श्री साईं शिवगंगा धाम में विश्व के सबसे बड़े 5,211 किलोग्राम वजनी पारदेश्वर महादेव (पारद शिवलिंग) की भव्य प्राण प्रतिष्ठा वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद, घंटों की अनुगूंज और शिव आराधना के बीच संपन्न हुई।
इस अलौकिक अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए संत-महात्माओं, धर्माचार्यों, जनप्रतिनिधियों और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को आध्यात्मिक महाकुंभ का स्वरूप प्रदान कर दिया।
पूरा शिवगंगा धाम हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने पारदेश्वर महादेव का अभिषेक एवं पूजन कर विश्व शांति, राष्ट्र समृद्धि और मानव कल्याण की कामना की। आयोजन स्थल पर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।

संत समागम की अध्यक्षता करते हुए जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि भगवान शिव संपूर्ण सृष्टि के कल्याण और संतुलन के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि पारदेश्वर महादेव की यह स्थापना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विश्वशांति, आध्यात्मिक जागरण और सनातन संस्कृति के संरक्षण का दिव्य अभियान है। भारत की आध्यात्मिक शक्ति ही विश्व को शांति और सद्भाव का मार्ग दिखाने में सक्षम है।


जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी महाराज ने कहा कि शास्त्रों में पारद शिवलिंग की उपासना को अत्यंत फलदायी माना गया है। कलयुग में इसकी पूजा शीघ्र फल प्रदान करती है तथा रोग, शोक और दरिद्रता का नाश कर जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने कहा कि भारत आज पुनः अपने प्राचीन आध्यात्मिक वैभव की ओर अग्रसर हो रहा है।
निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि पारे को बांधकर शिवलिंग का स्वरूप देना भारतीय ऋषियों की अद्भुत रसविद्या और वैज्ञानिक ज्ञान का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह स्थापना सनातन परंपरा की महान उपलब्धि है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य करेगी।
कार्यक्रम में उपस्थित साध्वी ऋतंभरा ने नारी शक्ति, राष्ट्र निर्माण और सांस्कृतिक जागरण पर ओजस्वी उद्बोधन देते हुए कहा कि “शिव ही सत्य हैं, शिव ही सुंदर हैं।” उन्होंने कहा कि पारदेश्वर महादेव की स्थापना से हरिद्वार की आध्यात्मिक महिमा में अभूतपूर्व वृद्धि होगी और यह स्थान देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा।
आध्यात्मिक गुरु सुधांशु महाराज ने इसे विश्व कल्याण के लिए स्थापित एक दिव्य आध्यात्मिक केंद्र बताते हुए कहा कि तीर्थनगरी हरिद्वार के प्रवेश द्वार पर भगवान पारदेश्वर महादेव की स्थापना सम्पूर्ण मानवता के लिए शुभ संकेत है।
विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक दिनेश चंद्र ने कहा कि भारत की सनातन परंपरा विश्व की सबसे प्राचीन, समृद्ध और वैज्ञानिक संस्कृति है। उन्होंने युवाओं से अपने धर्म, संस्कृति और संस्कारों से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक जागरण को नई दिशा प्रदान करते हैं।
श्री साईं शिवगंगा धाम के मैनेजिंग ट्रस्टी राजीव बंसल ने बताया कि विश्व के सबसे बड़े पारदेश्वर महादेव की स्थापना मानव कल्याण, विश्व शांति और सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में श्री साईं शिवगंगा धाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा, साधना और धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनेगा।
कार्यक्रम का संचालन महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद गिरी ने किया। इस अवसर पर प्रदीप बत्रा, राघव चड्ढा, राजेंद्र अग्रवाल, अनीता अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
आयोजन समिति ने इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को सनातन संस्कृति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अध्याय बताते हुए भविष्य में भी ऐसे भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प दोहराया। विश्व के सबसे बड़े पारदेश्वर महादेव की प्राण प्रतिष्ठा ने न केवल हरिद्वार बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं में नई आस्था, ऊर्जा और सांस्कृतिक गौरव का संचार किया।