हरिद्वार, 7 जुलाई।
मंदिरों में चढ़ावे की चोरी और दुरुपयोग के सामने आए मामलों के बाद हरिद्वार के प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट ने सख्त कदम उठाया है। ट्रस्ट की ओर से मंदिर के सभी पुजारियों और कर्मचारियों को धार्मिक आस्था, ईमानदारी और पारदर्शिता बनाए रखने की शपथ दिलाई गई। इस दौरान ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत रविंद्र पुरी ने स्पष्ट कहा कि मंदिर में आने वाला चढ़ावा श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है और उसका किसी भी प्रकार से निजी उपयोग बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
महंत रविंद्र पुरी ने कहा कि यदि कोई पुजारी या कर्मचारी चढ़ावे का निजी इस्तेमाल करता हुआ पकड़ा गया तो उसे तत्काल सेवा से निष्कासित किया जाएगा। इसके साथ ही उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि मंदिर की गरिमा और श्रद्धालुओं का विश्वास सर्वोपरि है, इसलिए किसी भी प्रकार की अनियमितता पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मंदिर में पारदर्शिता और निगरानी सुनिश्चित करने के लिए महंत रविंद्र पुरी ने सात सदस्यीय समिति का गठन भी किया है। यह समिति मंदिर की व्यवस्थाओं, चढ़ावे के रखरखाव और पुजारियों एवं कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर नजर रखेगी, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की शिकायत की संभावना न रहे।
इस अवसर पर महंत रविंद्र पुरी ने हाल ही में गठित अखाड़ा परिषद की दूसरी कार्यकारिणी पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वे स्वयं अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष चुने गए हैं और उनके पास बहुमत का समर्थन है। इसलिए कुंभ मेला 2027 का संचालन और नेतृत्व उनकी अगुवाई में ही होगा। उन्होंने कहा कि बहुमत के आधार पर लिया गया निर्णय ही मान्य होगा और इसी व्यवस्था के तहत आगे की तैयारियां की जाएंगी।
महंत रविंद्र पुरी ने कहा कि धार्मिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है। मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट इसी दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है ताकि श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास हमेशा कायम रहे।