उत्तरांचल पंजाबी महासभा के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि, विभाजन पीड़ित परिवारों को किया नमन

हरिद्वार,15 अगस्त 2026।
भारत विभाजन की त्रासदी में अपने प्राण गंवाने वाले लाखों लोगों की स्मृति में शुक्रवार को हरिद्वार के प्रेम नगर आश्रम में उत्तरांचल पंजाबी महासभा की ओर से विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और विभाजन के दौरान शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन परिवारों के संघर्ष, पीड़ा और बलिदान को नमन किया, जिन्होंने विभाजन का दंश झेला।

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री के पगड़ी पहनाकर एवं त्रिशूल भेंट कर स्वागत से हुई। इसके बाद पंजाबी समाज के लोगों ने विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले निर्दोष नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम स्थल पर विभाजन विभीषिका प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसके माध्यम से विभाजन के दौर की घटनाओं और विस्थापन की पीड़ा को प्रदर्शित किया गया।

विभाजन सिर्फ सीमाओं का बंटवारा नहीं था : धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वर्ष 1947 का विभाजन केवल भारत की भौगोलिक सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि यह करोड़ों लोगों की साझा विरासत, संस्कृति, पहचान और भावनाओं के विस्थापन की त्रासदी भी थी। सदियों से साथ रहने वाले लोगों को अचानक अपने घर-बार छोड़ने पड़े और लाखों परिवारों को विस्थापन का दर्द झेलना पड़ा।

उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि देना और उनके संघर्ष को याद करना हमारा नैतिक दायित्व है। इस दर्दनाक इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना इसलिए भी जरूरी है, ताकि युवा देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव के महत्व को समझ सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने का निर्णय ऐतिहासिक है। इसका उद्देश्य विभाजन पीड़ित परिवारों के संघर्ष और बलिदान को स्मरण करना तथा देशवासियों को इतिहास के उस अध्याय से परिचित कराना है।

सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने का प्रयास
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आज भारत अपनी सांस्कृतिक जड़ों और गौरवशाली विरासत से पुनः जुड़ रहा है। उन्होंने अयोध्या में श्रीराम मंदिर, केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम के पुनर्निर्माण, महाकाल लोक और करतारपुर कॉरिडोर जैसे कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को दिव्यता एवं भव्यता के साथ पुनर्स्थापित कर रहा है।

उन्होंने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों में बदलाव, तीन तलाक की प्रथा पर रोक, नागरिकता संशोधन कानून, वक्फ कानून में संशोधन तथा वर्ष 1984 के सिख दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने जैसे निर्णयों का भी उल्लेख किया।

विकास के साथ देवभूमि की अस्मिता का संरक्षण
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार देवभूमि के विकास, समृद्धि और स्वाभिमान के लिए लगातार कार्य कर रही है। दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छ पेयजल और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ ही राज्य की सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक स्थलों और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आगामी कुंभ मेला ऐतिहासिक, भव्य और सुरक्षित हो, इसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। सरकार का उद्देश्य विकास की गति को बनाए रखते हुए उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और विशिष्ट पहचान को संरक्षित रखना है।

रक्तदान करने वालों को प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने परिसर में लगाए गए ब्लड कैंप का निरीक्षण किया और रक्तदान करने वाले लोगों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने विभाजन विभीषिका प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। विभिन्न जनपदों से पहुंचे उत्तरांचल पंजाबी महासभा के बुजुर्गों को मुख्यमंत्री ने शॉल भेंट कर सम्मानित किया।

त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रेडक्लिफ सीमा निर्धारण का किया उल्लेख
हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विभाजन की ऐतिहासिक परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 14 अगस्त 1947 तक भारत अखंड था और मध्यरात्रि के बाद देश का विभाजन हुआ। उन्होंने कहा कि विभाजन के समय एक बड़ी विडंबना यह थी कि देश का बंटवारा तो हो गया, लेकिन भारत और पाकिस्तान की सीमाएं तत्काल स्पष्ट नहीं थीं।

उन्होंने बताया कि भारत-पाकिस्तान की सीमा निर्धारित करने की जिम्मेदारी अंग्रेज अधिकारी सर सिरिल रेडक्लिफ को दी गई थी। सांसद ने कहा कि जिस व्यक्ति को भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों की पर्याप्त जानकारी नहीं थी, उसे इतने बड़े और संवेदनशील कार्य की जिम्मेदारी सौंपना विभाजन की प्रक्रिया की गंभीरता को दर्शाता है।

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक एवं प्रदीप बत्रा ने भी अपने विचार रखे।

इस अवसर पर मेयर किरण जैसल, नगर पालिका अध्यक्ष शिवालिक नगर राजीव शर्मा, विधायक आदेश चौहान, सविता कपूर, उत्तरांचल पंजाबी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष करण मल्होत्रा, प्रदेश महामंत्री राजकुमार फुटेला, जिला चेयरमैन प्रमोद पांधी, जिला अध्यक्ष प्रवीण कुमार, प्रदेश उपाध्यक्ष राज ओबराय, गढ़वाल मंडल उपाध्यक्ष राजकुमार अरोड़ा, जिला महामंत्री प्रदीप कालरा, राम अरोड़ा, राज्य मंत्री विश्वास डाबर, नितिन गौतम, आदेश सैनी, देशराज कर्णवाल, सुनील सैनी, शोभाराम प्रजापति, महंत लोकेश दास, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) जितेंद्र कुमार सहित विभिन्न जनपदों से आए उत्तरांचल पंजाबी महासभा के पदाधिकारी एवं समाज के लोग मौजूद रहे।

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