हरिद्वार, 1 अगस्त।
श्रावण कांवड़ यात्रा-2026 के तीसरे दिन हरिद्वार में एक और दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। बडेरी राजपूताना पुल के नीचे हुए हादसे में दो कांवड़ियों की मौके पर ही मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पुल के नीचे असुरक्षित तरीके से रखे गए भारी गार्डर अचानक कांवड़ियों के ऊपर गिर पड़े, जिससे दोनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

स्थानीय लोगों के अनुसार, डीजे की तेज आवाज और कंपन के कारण गार्डर खिसककर गिरने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतने भारी निर्माण सामग्री को बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग या चेतावनी संकेतों के आम लोगों और कांवड़ियों की आवाजाही वाले स्थान पर क्यों रखा गया था?



यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा में शामिल हैं और प्रशासन द्वारा सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। ऐसे में NHAI, संबंधित ठेकेदार और निर्माण कार्य की निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
इस मामले में समाजसेवी एवं भीम आर्मी से जुड़े तेजप्रताप सैनी ने दावा किया कि उन्होंने दो दिन पहले ही एक वीडियो जारी कर शासन-प्रशासन और NHAI को संभावित खतरे के प्रति आगाह किया था। उनका कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों को चेताया कि पुल के नीचे रखे भारी गार्डर कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं, लेकिन उनकी चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
तेजप्रताप सैनी ने इस घटना को प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कई मांगें रखी हैं। उन्होंने हादसे की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, दोषी NHAI अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या सहित कठोर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने तथा मृतक कांवड़ियों के परिजनों को तत्काल उचित मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
गौरतलब है कि कांवड़ यात्रा के केवल तीन दिनों के भीतर यह दूसरी बड़ी दुखद घटना है। इससे एक दिन पहले गंगा में डूबने से चार नाबालिगों की मौत हो गई थी, जिसने पूरे प्रदेश को शोक में डाल दिया था। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने कांवड़ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब यह केवल एक हादसे की जांच का विषय नहीं, बल्कि यह भी जांच का विषय है कि क्या संबंधित विभागों ने पहले से मौजूद संभावित खतरों को नजरअंदाज किया? क्या सुरक्षा मानकों का पालन हुआ? और क्या लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में कहीं गंभीर चूक हुई?
फिलहाल पूरे मामले में लोगों की निगाहें शासन, जिला प्रशासन, मेला प्रशासन और NHAI पर टिकी हैं। हर कोई यह जानना चाहता है कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे।
दिवंगत कांवड़ियों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए सभी ने ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवारों को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।