गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, 1 जुलाई
भारतीय कला, संस्कृति और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन को समर्पित संस्था श्रीनृत्यांजलि – ए सेंटर ऑफ ग्लोबल इंडियन आर्ट एंड कल्चर (पंजीकृत) द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय महोत्सव रविवार 28 जून को “श्री शिव गंगा उत्सव–सीज़न 2” का भव्य एवं सफल आयोजन गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय ऑडिटोरियम, हरिद्वार में संपन्न हुआ, 27 एवं 28 जून को आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक महोत्सव ने देश-विदेश के कलाकारों को एक मंच पर लाकर भारतीय संस्कृति की विविधता, समृद्धि और जीवंतता का अद्भुत परिचय कराया।
“एन इंटरनेशनल फेस्टिवल एंड कॉम्पिटिशन ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स एंड विजुअल आर्ट्स” के रूप में आयोजित इस महोत्सव में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से आए लगभग 230 नवोदित एवं प्रतिष्ठित कलाकारों ने सहभागिता की। दो दिनों तक चले इस आयोजन में शास्त्रीय एवं लोक नृत्य, संगीत, वाद्य वादन, काव्य-पाठ, योग तथा ललित कला की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. सत्यदेव निगमालंकार रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में पूजा शर्मा रेखा तथा विशेष अतिथियों के रूप में कनका सुधाकर एवं अरुणा सुब्रमणियन की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की शोभा को और बढ़ाया। अतिथियों ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति के संरक्षण में कला की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए ऐसे आयोजनों को समय की आवश्यकता बताया।

महोत्सव की विशेष आकर्षण प्रस्तुतियों में पूजा शर्मा रेखा और अरुणा सुब्रमणियन ने अपनी टीमों के साथ शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों की भरपूर सराहना प्राप्त की। वहीं सोमनाथ दास, सुगंधा बिस्वास और अनुश्री घोष सहित अनेक ख्यातिप्राप्त कलाकारों ने अपनी कला का ऐसा प्रदर्शन किया जिसने पूरे सभागार को भारतीय सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम का एक अत्यंत प्रेरणादायक पक्ष विशेष प्रतिभाशाली बच्चों की भागीदारी रही। रूपांजन सेन, उर्बी बरुआ और केतकी ने अपनी भावपूर्ण एवं प्रभावशाली प्रस्तुतियों से उपस्थित दर्शकों और अतिथियों का मन मोह लिया। इन बच्चों ने यह संदेश दिया कि प्रतिभा किसी भी शारीरिक या सामाजिक सीमा की मोहताज नहीं होती और अवसर मिलने पर हर व्यक्ति अपनी क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकता है।
इस महोत्सव की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि विभिन्न आयु वर्गों की सहभागिता रही। मंच पर लगभग 80 वर्ष की आयु के वरिष्ठ कलाकारों से लेकर मात्र 3 वर्ष के नन्हे बाल कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। यह दृश्य भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की निरंतरता और पीढ़ियों के बीच कला एवं संस्कृति के हस्तांतरण का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया। वरिष्ठ कलाकारों के अनुभव और बाल प्रतिभाओं के उत्साह ने कार्यक्रम को विशेष रूप से यादगार बना दिया।
प्रतियोगिता के विभिन्न वर्गों का मूल्यांकन निर्णायक मंडल के सदस्य हितिन खुराना एवं अतुल कुमार द्वारा निष्पक्षता और उत्कृष्टता के साथ किया गया। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया तथा सभी कलाकारों, गुरुजनों और सहयोगी संस्थाओं को उनके योगदान के लिए प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान किए गए।
महोत्सव का सफल निर्देशन डॉ. सुमिता दत्ता रॉय ने किया, जबकि आयोजन की समस्त व्यवस्थाओं का कुशल संचालन संदीप रॉय द्वारा किया गया। आयोजन समिति ने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी अतिथियों, निर्णायकों, कलाकारों, अभिभावकों, स्वयंसेवकों, सहयोगी संस्थाओं और मीडिया प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।
समिति ने कहा कि “श्री शिव गंगा उत्सव” केवल एक प्रतियोगिता या सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय कला, संस्कृति और परंपराओं को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का एक सतत प्रयास है। भविष्य में भी संस्था इसी प्रकार के आयोजन कर भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और विश्वव्यापी प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।