एआई के दौर में भी प्रिंट मीडिया की विश्वसनीयता कायम रहेगी : भगत सिंह कोश्यारी
परतंत्र भारत में उदंत मार्तंड ने हिंदी पत्रकारिता की नींव रखी : प्रो. गोविंद सिंह
पत्रकारिता समाज का आईना, हर क्षेत्र में आचार संहिता जरूरी : स्वामी कैलाशानंद गिरी


हरिद्वार, 31 मई 2026।
हिंदी पत्रकारिता के 200 गौरवशाली वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में हिंदी पत्रकारिता दिवस (30 मई 2026) पर प्रेस क्लब हरिद्वार द्वारा भव्य द्विशताब्दी समारोह एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल पद्मभूषण भगत सिंह कोश्यारी मुख्य अतिथि तथा मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।



कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वरिष्ठ पत्रकारों और पत्रकारिता शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। वरिष्ठ पत्रकार गोपाल रावत को स्व. मधुकांत प्रेमी स्मृति पुरस्कार तथा राहुल वर्मा को स्व. पी.एस. चौहान स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं सचिन कुमार, आफरीन बानो और खुशी जायसवाल को गोल्ड मेडल एवं स्मृति सम्मान देकर सम्मानित किया गया।



“हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली 200 वर्ष एवं मीडिया काउंसिल की अपरिहार्यता” विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रो. गोविंद सिंह ने कहा कि परतंत्र भारत में 30 मई 1826 को पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा प्रकाशित ‘उदंत मार्तंड’ ने हिंदी पत्रकारिता की नींव रखी थी। उन्होंने कहा कि हिंदी पत्रकारिता का इतिहास संघर्ष, जनजागरण और राष्ट्रनिर्माण से जुड़ा रहा है। 1857 की क्रांति से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन तक हिंदी पत्रकारिता ने जनमत तैयार करने और राष्ट्रीय चेतना जगाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में अभिव्यक्ति के नए माध्यम विकसित हुए हैं, लेकिन प्रिंट मीडिया आज भी अपनी विश्वसनीयता और गंभीरता के कारण लोगों का भरोसा बनाए हुए है।



मुख्य अतिथि भगत सिंह कोश्यारी ने हिंदी पत्रकारिता के द्विशताब्दी वर्ष को ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि भारतीय भाषाओं का भविष्य उज्ज्वल है। उन्होंने कहा कि आज समय आ गया है कि देश अपनी भाषाई अस्मिता को और मजबूत करे। उन्होंने विश्वास जताया कि जिस तरह दो सौ वर्ष पहले कोलकाता से हिंदी पत्रकारिता का उदय हुआ, उसी प्रकार आने वाले समय में दक्षिण भारत के शहरों, विशेषकर चेन्नई से भी हिंदी पत्रकारिता का व्यापक विस्तार देखने को मिलेगा।
कोश्यारी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बावजूद प्रिंट मीडिया की आवश्यकता कभी समाप्त नहीं होगी। विश्वसनीयता, तथ्यपरकता और सामाजिक उत्तरदायित्व के कारण समाचार पत्रों की प्रासंगिकता हमेशा बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि भारत की आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत विश्व में अद्वितीय है तथा देश विकास और विरासत दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए स्वामी कैलाशानंद गिरी ने कहा कि पत्रकारिता केवल समाचार देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने का दायित्व भी निभाती है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष, निर्भीक और सत्यनिष्ठ पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। समाज में घटित घटनाओं को जिम्मेदारी और विश्वसनीयता के साथ प्रस्तुत करना ही सच्ची पत्रकारिता है। उन्होंने कहा कि केवल पत्रकारिता ही नहीं, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आचार संहिता और नैतिक मूल्यों का पालन आवश्यक है।
प्रेस क्लब अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी और महामंत्री सूर्यकांत बेलवाल ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होना पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। हिंदी भाषा और पत्रकारिता के महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए प्रेस क्लब लगातार विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार दीपक नौटियाल ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पत्रकार, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। समारोह ने हिंदी पत्रकारिता की दो शताब्दियों की गौरवशाली यात्रा को याद करते हुए भविष्य की चुनौतियों और संभावनाओं पर गंभीर विमर्श का मंच प्रदान किया।
यह संस्करण समाचार पत्र और वेब पोर्टल दोनों के लिए अधिक प्रभावशाली, संतुलित और पेशेवर शैली में तैयार किया गया है।