बिना नियमित स्कूलिंग के हासिल किया ग्रेड-8, 16-17 वर्ष की उम्र में दी जाने वाली परीक्षा में कम उम्र में शानदार प्रदर्शन
लंदन, 02 सितंबर 2026
भारतीय मूल के महज सात वर्षीय बच्चे जिव्यान रेड्डी ध्रुवा ने अपनी असाधारण गणितीय प्रतिभा से ब्रिटेन में सबको चौंका दिया है। जिव्यान ने आमतौर पर 16 से 17 वर्ष की उम्र के विद्यार्थियों के लिए आयोजित होने वाली GCSE Maths परीक्षा को महज सात वर्ष की उम्र में पास कर ग्रेड-8 हासिल किया है। इस परीक्षा में सर्वोच्च उपलब्धि ग्रेड-9 मानी जाती है। इतनी कम उम्र में इस स्तर की परीक्षा में सफलता हासिल करना जिव्यान की गणितीय समझ और सीखने की क्षमता को दर्शाता है।
जिव्यान के परिवार की जड़ें भारत के आंध्र प्रदेश से जुड़ी हैं। उसके माता-पिता करीब पांच वर्षों से लंदन के वेस्ट साउथ रुइस्लिप क्षेत्र में रह रहे हैं। बेटे की असाधारण रुचि और गणित के प्रति उसकी गहरी समझ को देखते हुए परिवार ने उसकी शिक्षा को पारंपरिक तरीके से आगे बढ़ाने के बजाय उसकी जरूरत और क्षमता के अनुरूप ढालने का निर्णय लिया।
परिवार के अनुसार, जिव्यान इस वर्ष फरवरी तक लंदन के एक प्राइमरी स्कूल में पढ़ रहा था। इसके बाद उसकी पढ़ाई को लेकर परिवार ने होम एजुकेशन का रास्ता अपनाया। पिता ने घर पर ही उसकी पढ़ाई की जिम्मेदारी संभाली और उसकी सीखने की गति तथा रुचि के अनुसार अध्ययन की व्यवस्था की।
होम एजुकेशन में माता-पिता की बड़ी भूमिका
परिवार का कहना है कि किसी बच्चे को घर पर शिक्षित करना सुनने में जितना आसान लगता है, वास्तव में उतना ही चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए अभिभावकों को लगातार समय देना पड़ता है और अलग-अलग विषयों को बच्चे की रुचि के अनुसार समझाने के लिए काफी मेहनत एवं बेहतर समन्वय की जरूरत होती है।
जिव्यान के मामले में परिवार ने उसकी जिज्ञासा और सीखने की क्षमता को केंद्र में रखते हुए पढ़ाई को अधिक रोचक बनाने का प्रयास किया। कठिन विषयों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें समझने योग्य और इंटरैक्टिव बनाने पर जोर दिया गया।
पढ़ाई को रोचक बनाने में AI की भी मदद
परिवार जिव्यान की पढ़ाई को अधिक इंटरैक्टिव और दिलचस्प बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद भी लेता है। इससे कठिन अवधारणाओं को अलग-अलग तरीकों से समझाने और बच्चे की रुचि के मुताबिक सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाने में सहायता मिलती है।
जिव्यान की उपलब्धि यह भी बताती है कि आज के दौर में शिक्षा केवल पारंपरिक कक्षा और पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रह गई है। सही मार्गदर्शन, अभिभावकों का सहयोग, आधुनिक तकनीक और बच्चे की व्यक्तिगत रुचि को मिलाकर सीखने के नए रास्ते तैयार किए जा सकते हैं।
कम उम्र में बड़ी उपलब्धि ने खींचा ध्यान
GCSE जैसी परीक्षा सामान्य तौर पर किशोर विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होती है। ऐसे में सात वर्ष की उम्र में इस परीक्षा को पास कर ग्रेड-8 हासिल करना निश्चित रूप से असाधारण उपलब्धि है। हालांकि, जिव्यान की सफलता के पीछे केवल उसकी प्रतिभा ही नहीं, बल्कि परिवार का निरंतर सहयोग, घर पर अध्ययन की व्यवस्था और सीखने के प्रति उसका उत्साह भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जिव्यान की कहानी उन अभिभावकों के लिए भी प्रेरणादायक है, जो अपने बच्चों की शिक्षा को उनकी व्यक्तिगत क्षमता और रुचि के अनुरूप आगे बढ़ाने के नए विकल्प तलाश रहे हैं। उसकी उपलब्धि ने यह सवाल भी सामने रखा है कि क्या भविष्य की शिक्षा व्यवस्था बच्चों की अलग-अलग सीखने की गति और प्रतिभा के अनुरूप अधिक लचीली हो सकती है?
फिलहाल, सात वर्षीय जिव्यान रेड्डी ध्रुवा की यह उपलब्धि भारतीय मूल के परिवार के लिए गर्व का विषय बनने के साथ-साथ कम उम्र में असाधारण शैक्षणिक उपलब्धि के कारण चर्चा का केंद्र बन गई है।