शिव गंगा फाउंडेशन की टीम ने मौके पर पहुंचकर जताया विरोध, सिंचाई विभाग और प्रशासन को बुलाकर रुकवाया निर्माण कार्य
हरिद्वार, 8 नवंबर 2026।
मां गंगा की अविरल धारा और धार्मिक आस्था से जुड़े गंगा घाटों पर निर्माण कार्य को लेकर एक नया मामला सामने आया है। महायोगी पायलट बाबा आश्रम के नजदीक गंगा किनारे बनाए जा रहे एक नए घाट के निर्माण को लेकर शिव गंगा फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। फाउंडेशन की टीम का आरोप है कि निर्माण के दौरान गंगा की प्राकृतिक धारा को प्रभावित करते हुए बाउंड्री वॉल बनाई जा रही है। निर्माण कार्य के लिए संबंधित विभागों से अनुमति ली गई है या नहीं, इस पर भी सवाल उठाए गए हैं।
शिव गंगा फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं के अनुसार, स्थानीय लोगों से सूचना मिलने के बाद समाजसेवी दीपक तालियान के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची। वहां चल रहे निर्माण कार्य का निरीक्षण किया गया। टीम का कहना है कि गंगा के भीतर जिस प्रकार से बाउंड्री वॉल और बड़े आकार का स्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है, वह सामान्य घाट निर्माण जैसा प्रतीत नहीं होता। इससे गंगा की अविरलता, प्राकृतिक स्वरूप और स्थानीय श्रद्धालुओं की धार्मिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है।
निर्माणकर्ताओं से जवाब मांगने पर हुआ विवाद
फाउंडेशन की टीम का आरोप है कि मौके पर मौजूद निर्माण से जुड़े लोगों से जब निर्माण की अनुमति और कार्य की प्रकृति को लेकर सवाल किए गए तो उन्होंने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। टीम ने उनके व्यवहार पर भी नाराजगी जताई। इसके बाद सिंचाई विभाग की टीम और हरिद्वार प्रशासन को मौके पर बुलाया गया। अधिकारियों के पहुंचने के बाद वहां चल रहे निर्माण कार्य को बंद करा दिया गया।
गंगा के किनारे आम श्रद्धालुओं के अधिकारों का सवाल
शिव गंगा फाउंडेशन ने सवाल उठाया कि यदि गंगा किनारे इसी तरह बड़े-बड़े निर्माण और बाउंड्री वॉल खड़ी होती रहीं तो स्थानीय लोगों और आम श्रद्धालुओं के लिए गंगा स्नान, आचमन और पूजा-अर्चना के पारंपरिक घाटों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
फाउंडेशन का कहना है कि घाटों का निर्माण आम जनता की सुविधा और धार्मिक उपयोग के लिए होना चाहिए, न कि इस तरह कि घाट का स्वरूप किसी निजी भवन, होटल या विशाल स्मारक जैसा दिखाई देने लगे।
मां गंगा केवल नदी नहीं, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र
शिव गंगा फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं ने कहा कि मां गंगा करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र हैं। हरिद्वार के जगजीतपुर और कनखल क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय लोगों का भी मां गंगा पर समान अधिकार और भावनात्मक जुड़ाव है। यदि गंगा किनारे निर्माण के नाम पर रास्ते और घाट सीमित होते गए तो आम आदमी को गंगा में आचमन करने के लिए हरकी पैड़ी तक जाना पड़ सकता है।
फाउंडेशन ने स्पष्ट किया कि मां गंगा की अविरलता, निर्मलता और धार्मिक स्वरूप से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। संगठन का कहना है कि गंगा के किनारे और नदी क्षेत्र में होने वाले प्रत्येक निर्माण की वैधता, स्वीकृतियां और पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन की जांच होनी चाहिए।
प्रशासन से उठे ये अहम सवाल
- क्या संबंधित निर्माण के लिए सभी आवश्यक विभागीय अनुमतियां ली गई हैं?
- क्या निर्माण गंगा के निर्धारित प्रतिबंधित क्षेत्र के नियमों के अनुरूप हो रहा है?
- क्या बाउंड्री वॉल से गंगा की प्राकृतिक धारा प्रभावित हो सकती है?
- क्या निर्माण का उद्देश्य वास्तव में सार्वजनिक घाट बनाना है?
- क्या प्रशासन इस निर्माण की निष्पक्ष जांच कराएगा?
अब देखने वाली बात होगी कि सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन इस पूरे मामले में जांच के बाद क्या कार्रवाई करते हैं और क्या निर्माण की अनुमति एवं वैधता से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए जाते हैं।
शिव गंगा फाउंडेशन का कहना है कि मां गंगा की रक्षा केवल एक संगठन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक गंगाप्रेमी और हरिद्वारवासी का सामूहिक दायित्व है।