हरिद्वार, 26 अगस्त 2026।
मंगलवार गुरुकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय में नवप्रवेशित 425 विद्यार्थियों के लिए दीक्षारम्भ कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक परंपरा और यज्ञ के साथ किया गया। मैकेनिकल विभाग के समारोह कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विद्यार्थियों ने उच्च शिक्षा की अपनी नई यात्रा का पहला कदम रखा। कार्यक्रम में संकाय के सभी विभागों के शिक्षक, कर्मचारी और नवप्रवेशित विद्यार्थी उपस्थित रहे।
यज्ञ का संचालन ब्रह्मा डॉ. दीनदयाल वेदालंकार एवं अशोक कुमार भट्ट ने वैदिक विधि-विधान के साथ कराया। यज्ञ में संकाय के सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने सहभागिता की। विश्वविद्यालय की परंपरा के अनुरूप विद्यार्थियों के दीक्षारम्भ की शुरुआत यज्ञ से की गई, जिसमें उन्हें ज्ञान, संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के मूल्यों से जोड़ने का संदेश दिया गया।

दीक्षारम्भ कार्यक्रम एक सप्ताह तक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान नवप्रवेशित विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, अनुशासन, विभागीय गतिविधियों, वैदिक शिक्षा तथा आधुनिक तकनीकी शिक्षा के विभिन्न आयामों की जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम में देश के जाने-माने विद्वान भी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करेंगे।
तकनीकी शिक्षा रोजगार तक सीमित नहीं : डॉ. ललित नारायण मिश्रा
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्रा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान युग में विज्ञान एवं तकनीकी ज्ञान अत्यंत महत्वपूर्ण आवश्यकता बन चुका है। तकनीकी शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों में नवाचार, अनुसंधान, रचनात्मकता और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करती है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने अर्जित ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र के विकास के लिए करना चाहिए। विश्वविद्यालय में प्रवेश उनके जीवन की नई यात्रा का प्रारंभ है। इस यात्रा में अनुशासन, समय-प्रबंधन, निरंतर परिश्रम और सकारात्मक सोच को जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है।
डॉ. मिश्रा ने विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक के साथ भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुड़े रहने का आह्वान किया। उन्होंने रामायण के सुंदरकांड की चौपाइयों के माध्यम से विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान, प्रबंधन और जीवन में लक्ष्य के प्रति समर्पण का संदेश दिया। उन्होंने कंप्यूटर विज्ञान को आधुनिक शिक्षा का सशक्त माध्यम बताते हुए कहा कि विज्ञान और तकनीक बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और इनके माध्यम से देश के विकास को नई गति मिल रही है।
24 वर्षों में विदेशों तक पहुंचा गुरुकुल का नाम : कुलपति
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि गुरुकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय के पूर्व विद्यार्थी दुनिया के विभिन्न देशों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर रहे हैं और अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय को स्थापित हुए अभी 24 वर्ष ही हुए हैं, लेकिन इतने कम समय में संकाय ने गुरुकुल कांगड़ी का नाम देश ही नहीं, विदेशों तक पहुंचाया है।
कुलपति ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद महाराज ने वर्ष 1902 में इस संस्था की स्थापना की थी। गुरुकुल की स्थापना और संचालन की यात्रा में समाज के सहयोग और दान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि गुरुकुल ने देश की आजादी के आंदोलन में भी अहम भूमिका निभाई। स्वामी श्रद्धानंद महाराज ने विश्वविद्यालय के संचालन के लिए अंग्रेजों की आर्थिक सहायता स्वीकार करने के बजाय आत्मनिर्भरता और राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उनकी उच्च शिक्षा की शुरुआत यज्ञ की आहुति से हुई है और जब वे अपना पाठ्यक्रम पूर्ण कर डिग्री प्राप्त करेंगे, तब यह यात्रा एक और पूर्ण आहुति के रूप में सामने आएगी। उन्होंने विद्यार्थियों से देश और समाज की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित करने का आह्वान किया।
संस्कार और तकनीकी शिक्षा का समन्वय जरूरी : प्रो. मयंक अग्रवाल
संकाय के अध्यक्ष प्रो. मयंक कुमार अग्रवाल ने कहा कि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय में प्रवेश लेने वाले अधिकांश विद्यार्थी ग्रामीण परिवेश से आते हैं। ऐसे में उनके लिए गुरुकुल पद्धति और उसकी मूल भावना को समझना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि दीक्षारम्भ कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों के भीतर संस्कारों के बीज रोपे जा रहे हैं। एक सप्ताह तक चलने वाले कार्यक्रम में विद्यार्थियों को वैदिक प्रौद्योगिकी सहित शिक्षा और तकनीक के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया जाएगा।
अच्छा विद्यार्थी बनने से पहले अच्छा इंसान बनना जरूरी : प्रो. विपुल शर्मा
इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन विभागाध्यक्ष प्रो. विपुल शर्मा ने कहा कि नवप्रवेशित विद्यार्थियों को वैदिक परंपरा से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एक अच्छा विद्यार्थी बनने से पहले एक अच्छा इंसान बनना जरूरी है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ संस्कार और मानवीय मूल्यों से जोड़ना है।
एप्लाइड साइंस विभागाध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर तिवारी ने कहा कि संकाय के अनेक पूर्व विद्यार्थी प्रशासनिक सेवाओं सहित विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके हैं।
गुरुकुल छात्रों को इंसान बनाने की प्रयोगशाला : डॉ. पंकज कौशिक
संकाय के सहायक कुलसचिव डॉ. पंकज कौशिक ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि गुरुकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाला संस्थान नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को एक बेहतर इंसान बनाने की प्रयोगशाला है। यहां वैदिक शिक्षण और संस्कारों के माध्यम से विद्यार्थियों को ऊर्जावान और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए तैयार किया जाता है।
इसी अवसर पर डॉ. पंकज कौशिक की पुस्तक ‘विज्ञापन, पत्रकारिता एवं मीडिया’ का विमोचन कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्रा एवं प्रो. मयंक कुमार अग्रवाल द्वारा किया गया।
विभागों ने साझा की शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी
मैकेनिकल विभाग के प्रभारी डॉ. संजीव लांबा ने संकाय की शिक्षण एवं शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी विद्यार्थियों के साथ साझा की। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था, अनुशासन, विभागीय गतिविधियों तथा उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए उपलब्ध अवसरों के बारे में विस्तार से बताया गया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. धर्मेंद्र बालियान ने सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया, जबकि संचालन देवेंद्र सिंह ने किया।
इस अवसर पर डॉ. अजय कुमार, डॉ. निशांत कुमार, डॉ. तनुज गर्ग, डॉ. सुयश भारद्वाज, मयंक पोखरियाल, उप संपदा अधिकारी धन सिंह, सोनू, दीपक वर्मा, तरुण ऋषि, रमन कुमार, सोहन सिंह बिष्ट, पवन कुमार, दीपक नेगी, चंद्र सिंह राणा, प्रद्युम्न, संजीव, सुधीर, सुशील, कवीन्द्र सहित संकाय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, कर्मचारी एवं नवप्रवेशित विद्यार्थी उपस्थित रहे।
यज्ञ की आहुति के साथ शुरू हुई यह दीक्षारम्भ यात्रा विद्यार्थियों के लिए केवल तकनीकी शिक्षा की शुरुआत नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना से जुड़ी नई जीवन-यात्रा का संदेश लेकर आई।