नैनीताल,19 सितम्बर 2026।
उत्तराखंड की देवभूमि में आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब सरोवर नगरी नैनीताल में प्रतिष्ठित मां नंदा-सुनंदा देवी महोत्सव का शुभारंभ ब्रह्ममुहूर्त में विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ। प्राण प्रतिष्ठा के बाद जैसे ही मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमा के दर्शन के लिए पर्दा हटाया गया, मंदिर परिसर सहित आसपास का क्षेत्र श्रद्धालुओं के जयकारों से गूंज उठा। मां के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े।
नैनीताल स्थित मां नयना देवी मंदिर प्रांगण में आयोजित इस धार्मिक आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में कई दिनों से उत्साह बना हुआ था। महोत्सव की परंपरा के अनुसार बीती 16 सितंबर को कदली वृक्ष लेने के लिए भक्तों की टोली विधिवत पूजा-अर्चना के साथ रवाना हुई थी। यह टोली 17 सितंबर को कदली वृक्ष लेकर वापस नैनीताल पहुंची, जिसके बाद मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमा निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई।
कदली वृक्ष से तैयार हुई मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमा
प्रतिमा निर्माण का कार्य श्रद्धा और पारंपरिक विधि के अनुसार किया गया, जो 18 सितंबर तक चला। विशेष बात यह है कि मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमा को पर्यावरण के अनुकूल और पूर्णतः ईको-फ्रेंडली स्वरूप दिया जाता है। निर्माण की इस परंपरा में धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी निहित है।
इसके बाद आज ब्रह्ममुहूर्त में विधि-विधान के साथ प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गई। पूजा-अर्चना पूर्ण होने के बाद मां नंदा-सुनंदा के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए। दर्शन होते ही भक्तों में उत्साह की लहर दौड़ गई और पूरा परिसर “जय मां नंदा-सुनंदा” के जयकारों से गूंज उठा।
सवा दो बजे शुरू हुई पूजा, सवा चार बजे पूर्ण हुई
मंदिर के पुजारी भगवत प्रसाद जोशी ने बताया कि मां की पूजा-अर्चना करीब सवा दो बजे शुरू हुई और सवा चार बजे पूर्ण हुई। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए मां के दर्शन खोल दिए गए। उन्होंने श्रद्धालुओं से आस्था के साथ भाव और श्रद्धा को और मजबूत करने का आह्वान किया।
मां के दर्शनों के लिए पहुंच रहे भक्तों का कहना है कि मां नंदा-सुनंदा के प्रति उनकी गहरी आस्था है। श्रद्धालु मां के चरणों में अपनी मनोकामनाएं रख रहे हैं और जीवन में सुख-समृद्धि तथा सपनों के पूरा होने की कामना कर रहे हैं।
23 सितंबर तक होंगे दर्शन, फिर होगा नगर भ्रमण और विसर्जन
मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमा को 23 सितंबर तक श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखा जाएगा। इसके बाद धार्मिक परंपराओं के अनुसार मां की प्रतिमा को नगर भ्रमण कराया जाएगा। नगर भ्रमण के दौरान श्रद्धालु मां को विदाई देंगे और इसके बाद प्रतिमा का नैनीझील में विसर्जन किया जाएगा।
मां नंदा-सुनंदा महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि नैनीताल की सांस्कृतिक और लोक परंपराओं से गहराई से जुड़ा पर्व माना जाता है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस महोत्सव में शामिल होकर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। ब्रह्ममुहूर्त में हुई प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही नैनीताल एक बार फिर भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया।