सोशल मीडिया पर किसानों की फसल नष्ट किए जाने की चर्चा के बीच की ग्राउंड रिपोर्ट; सिंचाई विभाग UP की भूमि पर वृक्षारोपण अभियान, ग्राम प्रधान और पट्टाधारक किसानों ने जताया समर्थन
शांतर शाह, 08 अक्टूबर 2026।
हरिद्वार जिले के शांतर शाह क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से जमीन को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की खबरें और दावे सामने आ रहे थे। इनमें किसानों की फसल नष्ट किए जाने और जमीन को लेकर विवाद की बातें कही जा रही थीं। मामला चर्चा में आने के बाद की प्रेसटीम ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर पूरे मामले की पड़ताल की और संबंधित पक्षों से सीधे बातचीत की।
मौके पर जाकर की गई बातचीत में तस्वीर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं से अलग नजर आई। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ ग्राम प्रधान और मौके पर मौजूद पट्टाधारक किसानों ने भी फसल नष्ट किए जाने के दावों से इनकार किया।
📍 उत्तराखंड-UP सीमा पर स्थित है भूमि
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान संबंधित पक्षों की ओर से बताया गया कि शांतर शाह क्षेत्र में जिस जमीन को लेकर चर्चा चल रही है, वह उत्तराखंड-उत्तर प्रदेश सीमा क्षेत्र में स्थित है और सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश के अधीन बताई जा रही है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार नदी के किनारे स्थित इस क्षेत्र में अवैध खनन को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। इसी के मद्देनजर सरकारी भूमि को सुरक्षित रखने और क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वृक्षारोपण अभियान शुरू किया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, इस अभियान में वन विभाग उत्तराखंड के साथ मिलकर वृक्षारोपण किया जा रहा है।
🌳 वृक्षारोपण को लेकर क्या है विभाग का कहना?
सिंचाई विभाग UP के अधिकारी विकास त्यागी ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर किसानों की फसल नष्ट किए जाने को लेकर जो बातें कही जा रही हैं, वे मौके की वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खातीं।
उन्होंने बताया कि संबंधित भूमि सिंचाई विभाग की है और कुछ भूमि पट्टे पर किसानों को दी गई है। उनके अनुसार पट्टाधारकों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है।
विकास त्यागी ने यह भी कहा कि क्षेत्र में बरसाती नदी होने के कारण बारिश और बाढ़ के समय पानी का बहाव तेज हो जाता है, जिससे नदी किनारे की जमीन और फसल प्रभावित हो सकती है।
उनके अनुसार क्षेत्र में अवैध खनन की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। विभाग का प्रयास सरकारी भूमि की सुरक्षा और नदी क्षेत्र को सुरक्षित रखने का है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभागीय कर्मचारियों को कुछ लोगों द्वारा धमकाने की कोशिश की गई।
👤 ग्राम प्रधान ने भी किया अभियान का समर्थन
शांतर शाह के ग्राम प्रधान आदित्य राज सैनी ने भी मौके पर विभाग की कार्रवाई का समर्थन किया।
ग्राम प्रधान के अनुसार संबंधित जमीन सिंचाई विभाग UP के अधीन है और कुछ हिस्से किसानों को पट्टे पर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि वन विभाग उत्तराखंड के सहयोग से किया जा रहा वृक्षारोपण क्षेत्र के लिए अच्छा कदम है।
उन्होंने नदी किनारे होने वाले कथित अवैध खनन का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि नदी किनारे अवैध खनन से जमीन और फसलों को नुकसान पहुंचने की स्थिति बनती है। ऐसे में सरकारी भूमि की सुरक्षा और अवैध गतिविधियों पर रोक जरूरी है।
👨🌾 पट्टाधारक विजेंद्र बोले- मेरा कोई नुकसान नहीं हुआ
ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान पट्टाधारक विजेंद्र से भी बातचीत की गई।
उन्होंने बताया कि उनकी जमीन यहां पट्टे पर है, लेकिन उनका कोई नुकसान नहीं हुआ है। विजेंद्र के अनुसार जिस स्थान को लेकर फसल नष्ट किए जाने की बात कही जा रही है, वहां उस समय ऐसी फसल मौजूद नहीं थी जिसे नष्ट किया गया हो।
उन्होंने यह भी बताया कि बरसात के दौरान नदी का पानी आने के कारण यहां कई बार स्थिति बदल जाती है और नदी का बहाव जमीन को प्रभावित करता है।
👨🌾 कुंडी ने भी नुकसान से किया इनकार
एक अन्य पट्टाधारक कुंडी ने भी स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि न तो उनकी फसल का कोई नुकसान हुआ और न ही उन्हें वृक्षारोपण अभियान को लेकर कोई आपत्ति है।
👨🌾 शमशाद ने कहा- किसी का नुकसान नहीं हुआ
पट्टाधारक शमशाद ने भी मौके पर बातचीत के दौरान कहा कि किसी का कोई नुकसान नहीं हुआ है।
इस तरह ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान जिन पट्टाधारकों से बातचीत हुई, उन्होंने अपने स्तर पर फसल नष्ट किए जाने के दावे से इनकार किया।
🔎 सोशल मीडिया के दावों और ग्राउंड रिपोर्ट में अंतर
शांतर शाह के इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि सोशल मीडिया पर जहां किसानों की फसल नष्ट किए जाने की बात कही जा रही थी, वहीं मौके पर बातचीत किए गए पट्टाधारकों ने खुद किसी नुकसान से इनकार किया।
वहीं सिंचाई विभाग का कहना है कि भूमि सरकारी है और यहां वृक्षारोपण अभियान भूमि संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।
ग्राम प्रधान ने भी अभियान का समर्थन किया और नदी किनारे अवैध खनन को रोकने की जरूरत बताई।
🌱 सरकारी भूमि की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
विभागीय अधिकारियों के अनुसार नदी किनारे स्थित सरकारी भूमि को सुरक्षित रखना चुनौतीपूर्ण है। बरसात के दौरान नदी का पानी और कथित अवैध खनन जैसी गतिविधियां क्षेत्र को प्रभावित कर सकती हैं।
ऐसे में वृक्षारोपण के माध्यम से क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने और भूमि को संरक्षित करने की पहल की जा रही है। विभाग का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य किसी किसान को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि सरकारी भूमि और नदी क्षेत्र का संरक्षण करना है।
⚠️ जरूरी बात: दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि भी महत्वपूर्ण
हालांकि ग्राउंड जीरो पर संबंधित पक्षों ने अपने-अपने बयान दिए हैं, लेकिन जमीन के स्वामित्व, पट्टे और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े किसी भी विवाद की अंतिम पुष्टि आधिकारिक राजस्व अभिलेखों और संबंधित विभागीय दस्तावेजों से ही की जा सकती है।
फिलहाल मौके पर मौजूद पट्टाधारकों और ग्राम प्रधान द्वारा दिए गए बयानों में फसल नष्ट किए जाने की बात सामने नहीं आई है।
🔴ब्रेकिंग – शांतर शाह जमीन विवाद पर ग्राउंड रिपोर्ट
सोशल मीडिया पर फसल नष्ट किए जाने की चर्चा के बीच मौके पर पहुंचे प्रेसटीम ने संबंधित पक्षों से की बातचीत। सिंचाई विभाग UP ने जमीन को अपने विभाग की भूमि बताते हुए वृक्षारोपण अभियान की जानकारी दी। ग्राम प्रधान आदित्य राज सैनी और पट्टाधारक विजेंद्र, कुंडी व शमशाद ने भी अभियान को लेकर अपना पक्ष रखा और किसी फसल नुकसान से इनकार किया। विभाग ने क्षेत्र में कथित अवैध खनन की शिकायतों का हवाला देते हुए सरकारी भूमि और नदी क्षेत्र के संरक्षण की बात कही।
📍 शांतर शाह, हरिद्वार | उत्तराखंड-UP सीमा