हरिद्वार, 26 अगस्त 2026।
देवभूमि हरिद्वार स्थित उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में सात दिवसीय संस्कृत सप्ताह समारोह का भव्य एवं गरिमामय शुभारंभ वैदिक मंगलाचरण, स्वस्तिवाचन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। विश्वविद्यालय के मुख्य सभागार में आयोजित उद्घाटन समारोह में वेद मंत्रों की गूंज से पूरा परिसर संस्कृतमय हो उठा। इस अवसर पर विद्यार्थियों, आचार्यों और अतिथियों ने संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन तथा दैनिक व्यवहार में इसके अधिकाधिक प्रयोग का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्कृत भारती के प्रांत संगठन मंत्री गौरव शास्त्री ने अपने संबोधन में संस्कृत को भारत की सांस्कृतिक चेतना और ज्ञान-परंपरा की आधारभूत भाषा बताते हुए कहा कि संस्कृत केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, दर्शन और जीवन-मूल्यों की संवाहक है। उन्होंने कहा कि संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन की जिम्मेदारी केवल विद्वानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि युवाओं को भी इसके लिए आगे आना होगा।

उन्होंने कहा कि ‘अमृतं संस्कृतं मित्र, सरसं सरलं वचः’ के भाव को आत्मसात करते हुए संस्कृत को व्यवहार और संवाद की भाषा बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे संस्कृत को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने में योगदान दें।

संस्कृत सप्ताह आत्मगौरव और सांस्कृतिक चेतना का पर्व : कुलपति
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पाण्डेय ने कहा कि उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय देववाणी संस्कृत के प्रचार-प्रसार और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि श्रावण पूर्णिमा से ऋषि पर्व तक मनाया जाने वाला संस्कृत सप्ताह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और अपनी जड़ों के प्रति आत्मगौरव जागृत करने का अवसर है।
कुलपति ने कहा कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। संस्कृत सप्ताह के माध्यम से विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा के साथ-साथ भारतीय चिंतन, साहित्य, दर्शन और संस्कृति से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने सप्ताहभर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और ज्ञानवर्धन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।

पारंपरिक वेशभूषा में निकली भव्य संस्कृत शोभायात्रा
संस्कृत सप्ताह के शुभारंभ अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में छात्र-छात्राओं द्वारा भव्य संस्कृत शोभायात्रा भी निकाली गई। पारंपरिक वेशभूषा में सजे विद्यार्थियों ने वैदिक घोष और संस्कृत उद्घोष के साथ वातावरण को संस्कृतमय बना दिया। शोभायात्रा ने विद्यार्थियों में संस्कृत एवं भारतीय संस्कृति के प्रति उत्साह और गौरव की भावना को प्रदर्शित किया।

सप्ताहभर होंगी विभिन्न प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम
विश्वविद्यालय के कुलसचिव दिनेश कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्कृत सप्ताह के दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि सप्ताहभर संस्कृत निबंध प्रतियोगिता, शुद्ध श्लोकोच्चारण, शास्त्रार्थ एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता, काव्य-पाठ, आशु-भाषण, संस्कृत संभाषण कार्यशाला सहित विभिन्न सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इन आयोजनों का उद्देश्य विद्यार्थियों में संस्कृत भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ-साथ उनके भाषायी कौशल, तर्क क्षमता, अभिव्यक्ति और रचनात्मक प्रतिभा को विकसित करना है।

संस्कृत को दैनिक जीवन में अपनाने का लिया संकल्प
कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित अतिथियों एवं आचार्यों ने छात्र-छात्राओं को संस्कृत के नियमित अध्ययन एवं संभाषण के लिए प्रेरित किया। विद्यार्थियों ने संस्कृत को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखते हुए अपने आचार-विचार और व्यवहार में शामिल करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर प्रो. मोहन चन्द्र बलोदी, प्रो. दिनेश चमोला, प्रो. लक्ष्मी नारायण जोशी सहित विश्वविद्यालय के समस्त संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का कुशल संचालन एवं संयोजन मुख्य संयोजक प्रो. दामोदर परगाईं ने किया। वैदिक मंत्रोच्चार, संस्कृत घोष और विद्यार्थियों के उत्साह से संस्कृत सप्ताह का शुभारंभ विश्वविद्यालय परिसर में ज्ञान, संस्कृति और भारतीय परंपरा के भव्य संगम के रूप में देखने को मिला।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

error: Content is protected !!