ऑपरेशन प्रहार के तहत रानीपुर पुलिस की सलेमपुर में छापेमारी, 47 किलो 400 ग्राम गौमांस और कटान के उपकरण बरामद, एक आरोपी गिरफ्तार, दो फरार…
हरिद्वार, 9 अक्टूबर 2026।
उत्तराखंड में अपराधियों के खिलाफ पुलिस की लगातार कार्रवाई और ऑपरेशन प्रहार के तहत की जा रही ताबड़तोड़ दबिश के बावजूद अपराधों पर पूरी तरह अंकुश लगाना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। हरिद्वार के रानीपुर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम सलेमपुर में कथित गौकशी की सूचना पर पुलिस ने छापेमारी कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि दो अन्य आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस ने घटनास्थल से 47 किलो 400 ग्राम गौमांस और पशु कटान के उपकरण बरामद करने का दावा किया है।

मुखबिर की सूचना पर पुलिस की छापेमारी
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 7 अक्टूबर 2026 को रानीपुर कोतवाली पुलिस को मुखबिर के माध्यम से सूचना मिली कि ग्राम सलेमपुर में तीन व्यक्ति गौकशी कर रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर छापेमारी की। पुलिस कार्रवाई के दौरान वसीम पुत्र नसीम, निवासी दादूपुर गोविंदपुर, थाना रानीपुर, हरिद्वार को पकड़ लिया गया, जबकि दो अन्य व्यक्ति पुलिस को देखकर मौके से फरार हो गए।
47 किलो 400 ग्राम गौमांस बरामद
पुलिस के मुताबिक, मौके से कुल 47 किलो 400 ग्राम गौमांस और कथित अवैध पशु कटान में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए गए हैं। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी व फरार व्यक्तियों के विरुद्ध मुकदमा उत्तराखंड गोवंश संरक्षण अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है। फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस जुटी हुई है।
पुलिस की लगातार कार्रवाई, फिर भी अपराधियों के हौसले बुलंद क्यों?
हरिद्वार में पुलिस द्वारा ऑपरेशन प्रहार के तहत लगातार कार्रवाई की जा रही है। जगह-जगह दबिश, गिरफ्तारियां और अपराधियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं सामने आना कई सवाल खड़े करता है।
जनता के मन में सवाल है कि – आखिर पुलिस की लगातार कार्रवाई के बाद भी ऐसे अपराध रुक क्यों नहीं रहे हैं? क्या अपराधियों में कानून का भय पर्याप्त नहीं है? क्या केवल गिरफ्तारी और मुकदमा दर्ज करना काफी है, या ऐसे मामलों में प्रभावी निगरानी और सख्त कार्रवाई की भी जरूरत है?
पुलिस की कार्रवाई अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन आम जनता यह भी चाहती है कि अपराधों पर प्रभावी रोक लगे और कानून व्यवस्था को लेकर उसका भरोसा और मजबूत हो। अब देखना होगा कि रानीपुर पुलिस फरार आरोपियों को कब तक गिरफ्तार करती है और इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए आगे क्या कदम उठाती है।
पुलिस टीम की भूमिका
इस कार्रवाई में उपनिरीक्षक अशोक सिरसवाल, चौकी प्रभारी गैस प्लांट, अपर उपनिरीक्षक सुबोध घिल्डियाल, कांस्टेबल अजय कुमार और कांस्टेबल संजय रावत शामिल रहे।
मुख्य सवाल यही है—ऑपरेशन प्रहार के तहत ताबड़तोड़ कार्रवाई के बावजूद अपराध जारी हैं, तो इन पर स्थायी रोक लगाने के लिए पुलिस की अगली रणनीति क्या होगी?