कुंभ की तैयारियों, हरिद्वार के विकास और स्थानीय धार्मिक स्थलों को लेकर सरकार की चुप्पी पर उठाए सवाल; अंकिता भंडारी प्रकरण की जांच को लेकर भी साधा निशाना

हरिद्वार, 12 अक्टूबर 2026।
उत्तराखंड की धामी सरकार की हरिद्वार में आयोजित कैबिनेट बैठक को लेकर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने बैठक को जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी और राजनीतिक चुनावी नौटंकी करार देते हुए आरोप लगाया कि सरकार के पास हरिद्वार के विकास, कुंभ की तैयारियों और स्थानीय जनसमस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस कार्ययोजना नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस हरिद्वार को आगामी कुंभ की दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाना चाहिए था, उसी शहर में हुई कैबिनेट बैठक में कुंभ से संबंधित किसी ठोस प्रस्ताव पर चर्चा नहीं होना सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

आज सोमवार को प्रेस क्लब हरिद्वार में पत्रकारों से वार्ता करते हुए आलोक शर्मा ने कहा कि कैबिनेट बैठक से हरिद्वार की जनता को बड़ी उम्मीदें थीं। लोगों को आशा थी कि सरकार शहर के विकास, आधारभूत सुविधाओं, धार्मिक स्थलों के संरक्षण और आगामी कुंभ की तैयारियों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लेगी, लेकिन बैठक के बाद ऐसी कोई ठोस पहल सामने नहीं आई, जिससे स्थानीय जनता को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद जगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि बैठक में लिए गए अधिकांश निर्णय ऐसे थे, जिन्हें अधिकारी स्तर पर भी लिया जा सकता था। ऐसे में सवाल उठता है कि मंत्रिमंडल की पूरी बैठक आयोजित करने का उद्देश्य क्या था और इससे हरिद्वार की जनता को वास्तविक लाभ कितना मिला?

ऋषिकुल विद्यापीठ में शोध संस्थान के निर्णय पर भी उठाए सवाल
आलोक शर्मा ने ऋषिकुल विद्यापीठ में शोध संस्थान खोलने के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि उक्त विद्यापीठ के संचालन के लिए पहले से ही एक संस्था कार्यरत है। उन्होंने सरकार से इस निर्णय की आवश्यकता, उसकी उपयोगिता और हरिद्वार के विकास में उसके प्रत्यक्ष योगदान को स्पष्ट करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि कैबिनेट की बैठक में कोई बड़ा नीतिगत निर्णय सामने नहीं आया। उनके अनुसार, खसरा संख्या में बदलाव जैसे मामलों का निस्तारण भी संबंधित प्रशासनिक अधिकारी के स्तर पर किया जा सकता है। ऐसे निर्णयों को कैबिनेट बैठक की प्रमुख उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करना सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।

कुंभ की तैयारियों पर सरकार की चुप्पी को बताया चिंताजनक
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि हरिद्वार में कैबिनेट बैठक आयोजित किए जाने का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य आगामी कुंभ की तैयारियों को गति देना होना चाहिए था। इसके बावजूद कुंभ से संबंधित किसी ठोस प्रस्ताव की घोषणा नहीं होना निराशाजनक है।

उन्होंने कुंभ से जुड़े निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि इन मामलों पर सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब सामने आना चाहिए। उन्होंने मांग की कि कुंभ की तैयारियों में होने वाले निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, बजट के उपयोग और परियोजनाओं की प्रगति को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, ताकि श्रद्धालुओं की सुविधाओं और सार्वजनिक धन की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

आलोक शर्मा ने कहा कि कुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हरिद्वार की अर्थव्यवस्था, पर्यटन, व्यापार और स्थानीय नागरिक सुविधाओं से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए सरकार को दीर्घकालिक योजना बनाकर समयबद्ध तरीके से काम करना चाहिए।

ज्वालापुर, बहादराबाद और कांगड़ी को कुंभ मेला क्षेत्र में शामिल करने की मांग
आलोक शर्मा ने ज्वालापुर, बहादराबाद और कांगड़ी सहित अन्य क्षेत्रों को कुंभ मेला क्षेत्र में शामिल करने की मांग उठाई। उन्होंने रानीपुर और हरिद्वार के विधायकों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों को क्षेत्र की समस्याओं और धार्मिक महत्व से जुड़े मुद्दों को सरकार के सामने मजबूती से उठाना चाहिए था।

उन्होंने पांडेय वाला स्थित गुघाल मेला स्थल का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां से रमता पंच और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। इसके बावजूद इस धार्मिक स्थल को कुंभ मेला क्षेत्र से बाहर रखा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण स्थलों को कुंभ की व्यवस्थाओं से जोड़ने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, ताकि धार्मिक परंपराओं और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को उचित महत्व मिल सके।

कांग्रेस प्रवक्ता ने दोनों विधायकों से सवाल किया कि हरिद्वार के विकास से जुड़ा कोई ठोस प्रस्ताव कैबिनेट बैठक में क्यों नहीं दिखाई दिया? उन्होंने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे जनता की अपेक्षाओं को सरकार तक पहुंचाएं और क्षेत्र के लिए आवश्यक योजनाओं को स्वीकृति दिलाने का प्रयास करें।

अर्धकुंभ पर श्वेत पत्र जारी करने की उम्मीद थी
आलोक शर्मा ने कहा कि कांग्रेस को उम्मीद थी कि धामी सरकार हरिद्वार में आयोजित कैबिनेट बैठक के दौरान आगामी अर्धकुंभ से संबंधित श्वेत पत्र जारी करेगी। इसके माध्यम से तैयारियों, प्रस्तावित बजट, निर्माण कार्यों, यातायात व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और विकास योजनाओं की स्थिति स्पष्ट की जा सकती थी।

उन्होंने कहा कि सरकार को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि कुंभ और अर्धकुंभ की तैयारियों के लिए क्या योजनाएं बनाई गई हैं, कौन-कौन से कार्य प्राथमिकता पर हैं और उन्हें पूरा करने के लिए क्या समयसीमा निर्धारित की गई है। कांग्रेस प्रवक्ता के अनुसार, धार्मिक आयोजनों की सफलता के लिए केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि योजनाओं का पारदर्शी क्रियान्वयन और जवाबदेही भी जरूरी है।

अंकिता भंडारी प्रकरण की जांच पर भी सरकार को घेरा
पत्रकार वार्ता के दौरान आलोक शर्मा ने उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी प्रकरण को भी उठाया। उन्होंने अंकिता के माता-पिता की ओर से सामने आए आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में न्याय और जांच की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां उन्हीं लोगों से बार-बार पूछताछ कर रही हैं, जिनसे पहले भी पूछताछ की जा चुकी है, जबकि कथित वीआईपी और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका को लेकर पर्याप्त स्पष्टता सामने नहीं आई है। उन्होंने जांच की दिशा और उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलने का भरोसा दिलाना सरकार और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है।

आलोक शर्मा ने मांग की कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और पीड़ित परिवार की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया और जांच की पारदर्शिता पर जनता का विश्वास बनाए रखना बेहद आवश्यक है।

दिल्ली मे छात्र-छात्राओं पर पुलिस कार्रवाई की निंदा
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने दिल्ली में छात्र-छात्राओं पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की भी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीतियों से देश के विभिन्न वर्गों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को सुनना और उनकी समस्याओं का समाधान करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की जिम्मेदारी है।

‘जनता के पैसे का हिसाब दे सरकार’
अपनी प्रेस वार्ता के समापन पर आलोक शर्मा ने धामी सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि जनता के टैक्स के लाखों रुपये खर्च करके हरिद्वार में कैबिनेट बैठक आयोजित करने से आखिर शहर को क्या ठोस लाभ मिला? उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या मुख्यमंत्री हरिद्वार में केवल ‘मोदीनामा’ पढ़ने आए थे?

उन्होंने कहा कि जनता को बैठकों, घोषणाओं और राजनीतिक प्रचार से अधिक विकास के धरातल पर दिखाई देने वाले परिणाम चाहिए। हरिद्वार की जनता कुंभ की बेहतर तैयारियां, धार्मिक स्थलों का संरक्षण, मजबूत आधारभूत ढांचा, पारदर्शी निर्माण कार्य और स्थानीय समस्याओं का समाधान चाहती है। सरकार को इन अपेक्षाओं पर खरा उतरते हुए अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट करनी चाहिए।

प्रेस वार्ता के दौरान वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनोज सैनी, सोम त्यागी, ओबीसी विभाग के जिलाध्यक्ष विकास चन्द्रा, सुरेश राणा, चंदन शर्मा, श्याम सिंह सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता मौजूद रहे।

राजनीतिक संदेश: हरिद्वार में हुई कैबिनेट बैठक को लेकर कांग्रेस ने सरकार की कार्यशैली, कुंभ की तैयारियों और स्थानीय विकास के मुद्दों पर सवाल खड़े किए हैं। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि सरकार इन आरोपों और मांगों पर क्या जवाब देती है तथा आगामी कुंभ और अर्धकुंभ से जुड़ी योजनाओं को लेकर कौन-से ठोस कदम उठाती है।

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