विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने का आह्वान, एक माह तक सेवा, संस्कृति और राष्ट्रनिर्माण से जुड़ी गतिविधियों में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा…

हरिद्वार,17 अक्टूबर 2026।
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार में ‘सेवा संकल्प अभियान–विकसित भारत-2047’ का समापन समारोह उत्साह, उल्लास और राष्ट्रसेवा के संकल्प के साथ संपन्न हुआ। एक माह तक चले इस अभियान के अंतर्गत आयोजित शैक्षणिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने सेवा, सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रनिर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की। समापन समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकान्त पांडे ने की। पद्मश्री डॉ. माधुरी बड़थ्वाल मुख्य अतिथि तथा डॉ. ललित नारायण मिश्र सारस्वत अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कुलसचिव दिनेश राणा की गरिमामयी उपस्थिति में समारोह का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्वेता अवस्थी ने किया, जबकि अभियान की नोडल अधिकारी प्रो. बिंदुमती द्विवेदी ने एक माह के दौरान आयोजित गतिविधियों की विस्तृत आख्या प्रस्तुत की।

सेवा और राष्ट्रहित को जीवन का उद्देश्य बनाएं युवा : कुलपति
समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. रमाकान्त पांडे ने कहा कि विद्यार्थियों को सेवा और राष्ट्रहित को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाना चाहिए। विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को व्यक्तिगत सफलता के साथ समाज के कल्याण और राष्ट्र की प्रगति के लिए भी निरंतर प्रयास करना चाहिए। ऐसे अभियान युवाओं में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, सामाजिक संवेदनशीलता और कर्तव्यबोध विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

समाजसेवा मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा जीवन-मूल्य : पद्मश्री डॉ. माधुरी बड़थ्वाल
मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. माधुरी बड़थ्वाल ने कहा कि समाजसेवा केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ा जीवन-मूल्य है। विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा, ज्ञान और ऊर्जा का उपयोग जरूरतमंद वर्गों के उत्थान तथा राष्ट्र की प्रगति के लिए करना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने कार्यों के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लें।

भारतीय संस्कृति में सेवा और परोपकार का विशेष महत्व
सारस्वत अतिथि डॉ. ललित नारायण मिश्र ने कहा कि भारतीय संस्कृति में सेवा, परोपकार, त्याग और लोककल्याण को विशेष महत्व दिया गया है। विद्यार्थियों को इन मूल्यों को अपने आचरण में अपनाकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन तक सीमित न रखते हुए चरित्र निर्माण, सामाजिक चेतना और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

कुलसचिव दिनेश राणा ने अभियान के अंतर्गत आयोजित गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हैं। सामूहिक सहभागिता से उनमें नेतृत्व क्षमता, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना विकसित होती है। उन्होंने अभियान की सफलता में योगदान देने वाले शिक्षकों, संयोजकों, निर्णायकों और विद्यार्थियों की सराहना की।

11 प्रमुख गतिविधियों के माध्यम से दिया सेवा और राष्ट्रनिर्माण का संदेश
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ‘मेरे सपनों का भारत’, ‘सेवा मेरा योगदान’, ‘सेवा मेरा संकल्प’, ‘सेवा के रंग राष्ट्र के संग’ तथा ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ जैसे विषयों पर आधारित 11 प्रमुख गतिविधियां आयोजित की गईं। इनमें चित्रकला, भाषण एवं निबंध प्रतियोगिताओं के साथ वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, ‘वोकल फॉर लोकल’ जागरूकता रैली, सेवा संकल्प जागरूकता एवं सामाजिक शिक्षण गतिविधि, रंगोली प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक, क्रीड़ा कार्यक्रम और योगासन कार्यक्रम शामिल रहे।

इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को सामाजिक सेवा, स्वदेशी उत्पादों के प्रति जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, अनुशासन और राष्ट्र के विकास में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।

प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने दिखाया हुनर, जानिए विजेताओं के नाम
चित्रकला प्रतियोगिता

  • प्रथम — सूरज चंद्र भट्ट
  • द्वितीय — भारती शर्मा
  • तृतीय — आदर्श कुमार

भाषण प्रतियोगिता

  • प्रथम — अनुज कुमार
  • द्वितीय — हर्षिता
  • तृतीय — आदर्श कुमार

निबंध प्रतियोगिता

  • प्रथम — वंश शर्मा एवं अनिता
  • द्वितीय — आतिका
  • तृतीय — अंकित सेमेल्टी

रंगोली प्रतियोगिता
रंगोली प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने ‘मेरे सपनों का भारत’ और ‘2047 का भारत’ की परिकल्पना को रंगों एवं कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से जीवंत रूप दिया।

  • प्रथम स्थान — सूरज, मानसी, अनुज, अभिनव एवं सुयश का समूह
  • द्वितीय स्थान — अंकित सेमेल्टी, अनुज रतूड़ी, आदर्श कुमार, सूरज चंद्र भट्ट एवं अनुज थपलियाल का समूह
  • तृतीय स्थान — अभिषेक सेमेल्टी, खीमेश परगाई, मनीष भट्ट एवं प्रदीप जोशी का समूह

सामूहिक प्रयासों से सफल हुआ अभियान
समापन समारोह में सह-नोडल अधिकारी श्रीमती मीनाक्षी सिंह रावत ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि एक माह तक आयोजित गतिविधियों की सफलता सभी के सामूहिक प्रयास, समर्पण और सक्रिय सहभागिता का परिणाम है। विद्यार्थियों ने प्रतियोगिताओं और रचनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से सेवा, सामाजिक उत्तरदायित्व, पर्यावरण संरक्षण तथा राष्ट्रनिर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की।

इस अवसर पर प्रो. लक्ष्मीनारायण जोशी, प्रो. अरविंद नारायण मिश्रा, डॉ. अजय परमार, डॉ. विनय सेठी, डॉ. उमेश शुक्ल, डॉ. रूपेश शर्मा, श्री राजेंद्र नौटियाल एवं श्रीमती अनिता कुकरेती सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

राष्ट्रगान एवं शांति पाठ के साथ समारोह का समापन हुआ। सेवा संकल्प अभियान ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि विकसित भारत का निर्माण केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण, सामाजिक जिम्मेदारी और सामूहिक प्रयासों से साकार होने वाला राष्ट्रीय संकल्प है।

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