हरिद्वार/कनखल, 21 जुलाई।
एक ओर केंद्र और राज्य सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही हैं, वहीं धर्मनगरी हरिद्वार के कनखल क्षेत्र में स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय, विद्यालय नंबर-16 की तस्वीर इन दावों की हकीकत बयां कर रही है। विद्यालय के ठीक पीछे वर्षों से कूड़े का ढेर लगा हुआ है, जिससे उठने वाली दुर्गंध के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
विद्यालय के पास ही कनखल थाना और त्यागी मेडिकल स्टोर स्थित हैं, लेकिन इसके बावजूद स्कूल के पीछे फैली गंदगी पर किसी का ध्यान नहीं गया। हालत यह है कि कक्षाओं की खिड़कियां हमेशा बंद रखनी पड़ती हैं। जैसे ही खिड़कियां खोली जाती हैं, बाहर पड़े कूड़े से आने वाली तेज बदबू पूरी कक्षा में फैल जाती है और छोटे-छोटे बच्चों का बैठना मुश्किल हो जाता है।



विद्यालय की शिक्षिका ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार नगर निगम, मेयर और जिला प्रशासन तक शिकायत की जा चुकी है। यहां तक कि जिलाधिकारी को भी इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं हो सका। कुछ समय (सिर्फ एक महीना) के लिए नगर निगम की ओर से एक व्यक्ति को कूड़ा फेंकने से रोकने के लिए तैनात किया गया था, लेकिन उसके हटते ही लोगों ने फिर से वहां कूड़ा डालना शुरू कर दिया।
शिक्षिका के अनुसार, यदि स्कूल स्टाफ लोगों को कूड़ा डालने से रोकता है तो कई बार उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है और गाली-गलौज तक की नौबत आ जाती है। दुर्गंध इतनी अधिक होती है कि विद्यालय के दो कमरों का उपयोग भी बंद करना पड़ा है क्योंकि वहां बच्चों का बैठना संभव नहीं है।

विडंबना यह है कि विद्यालय परिसर के अंदर साफ-सफाई की व्यवस्था बेहद अच्छी है। कक्षाएं व्यवस्थित हैं, भोजन माता बच्चों के लिए भोजन तैयार करती हैं और पूरा स्टाफ विद्यालय को स्वच्छ रखने का प्रयास करता है। लेकिन विद्यालय की चारदीवारी के बाहर फैली गंदगी उनके सभी प्रयासों पर पानी फेर रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब छोटे-छोटे बच्चों को रोजाना इस दुर्गंध और अस्वच्छ वातावरण में पढ़ाई करनी पड़ रही है तो उनके स्वास्थ्य पर इसका क्या असर पड़ेगा? स्वच्छ वातावरण में शिक्षा पाने का उनका अधिकार आखिर कब सुनिश्चित होगा?
यह मामला केवल नगर निगम की कार्यशैली पर ही नहीं, बल्कि उन सामाजिक संगठनों और स्वच्छता अभियान चलाने वाले स्वयंसेवी समूहों पर भी सवाल खड़े करता है, जो समय-समय पर स्वच्छता के बड़े-बड़े अभियान चलाने का दावा करते हैं। यदि विद्यालय जैसे संवेदनशील स्थान के बाहर महीनों से कूड़े का अंबार लगा है, तो ऐसे अभियानों की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
अब स्थानीय लोगों, अभिभावकों और विद्यालय प्रशासन की मांग है कि नगर निगम तत्काल इस स्थान से कूड़ा हटाए, वहां नियमित सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करे तथा कूड़ा फेंकने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि मासूम बच्चों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में शिक्षा मिल सके।