हरिद्वार, 20 अगस्त ।
आस्था, अध्यात्म और सनातन संस्कृति के सबसे बड़े पर्व हरिद्वार कुंभ 2027 की तैयारियां अब धरातल पर अपना भव्य रूप दिखाने लगी हैं। उत्तर प्रदेश की सीमा पर मंडावर-छुटमलपुर में श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए एक ऐसा भव्य प्रवेश द्वार तैयार किया जा रहा है, जो हरिद्वार आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए देवभूमि की पहली आध्यात्मिक झलक बनेगा।
इस प्रवेश द्वार की सबसे खास बात इसकी ‘समुद्र मंथन’ थीम होगी। समुद्र मंथन और उससे निकले अमृत कलश की पौराणिक कथा का कुंभ पर्व से गहरा और भावनात्मक संबंध है। इसी पौराणिक विरासत को आधुनिक स्थापत्य के माध्यम से जीवंत करते हुए यह द्वार श्रद्धालुओं को हरिद्वार की सीमा में प्रवेश करते ही कुंभ की आध्यात्मिकता और सनातन परंपरा का एहसास कराएगा।
2.04 करोड़ की लागत से आकार लेगा भव्य प्रवेश द्वार
करीब 2.04 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे इस प्रवेश द्वार की ऊंचाई लगभग 6.5 मीटर होगी। केवल द्वार ही नहीं, बल्कि इसके आसपास के क्षेत्र का भी व्यापक सौंदर्यीकरण किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि हरिद्वार की ओर बढ़ते श्रद्धालुओं को सीमा में प्रवेश करते ही एक ऐसा वातावरण मिले, जिसमें आस्था, संस्कृति और कुंभ की भव्यता एक साथ दिखाई दे।
कई राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं का बनेगा स्वागत स्थल
मंडावर-छुटमलपुर मार्ग हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। इस रास्ते से उत्तर प्रदेश के साथ-साथ हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं। ऐसे में यह प्रवेश द्वार केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि कुंभ नगरी की ओर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए स्वागत, सम्मान और सनातन आस्था का प्रतीक बनने जा रहा है।
दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य
प्रवेश द्वार का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि तय समयसीमा के अनुसार कार्य पूरा होता है तो कुंभ 2027 के दौरान यह द्वार हरिद्वार की भव्यता में एक नया अध्याय जोड़ता नजर आएगा।
समुद्र मंथन की पौराणिक कथा, अमृत कलश की स्मृति और देवभूमि की आध्यात्मिक पहचान—इन तीनों को समेटे यह प्रवेश द्वार श्रद्धालुओं के लिए महज एक स्वागत स्थल नहीं होगा, बल्कि हरिद्वार की धरती पर कदम रखते ही आस्था से जुड़ जाने वाला एक भावनात्मक अनुभव बनेगा।
जहां समुद्र मंथन की कथा होगी, अमृत की स्मृति होगी और सामने होगी देवभूमि हरिद्वार की पावन धरती—वहीं से कुंभ 2027 के भव्य स्वागत की शुरुआत होगी। 🚩🕉️