2004 से अब तक संपर्कों, चंदे और आय-व्यय की दो चरणों में जांच की मांग

हरिद्वार,14 अगस्त।
मातृ सदन को लेकर महामंडलेश्वर ने गंभीर सवाल खड़े करते हुए आश्रम की गतिविधियों, आर्थिक स्रोतों, आंदोलनों, खनन विरोधी अभियानों तथा पुराने विवादों की व्यापक जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों को लेकर लंबे समय से आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविकता सामने आ सके। उन्होंने अपने वक्तव्य में कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिन्हें उन्होंने जांच का विषय बताया है।

मातृ सदन की गतिविधियों और आर्थिक स्रोतों की जांच की मांग
महामंडलेश्वर का आरोप है कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान मातृ सदन को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था और इसी अवधि में नदी तथा खनन से जुड़ी परियोजनाओं को लेकर आश्रम की गतिविधियों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलनों के माध्यम से आर्थिक लाभ प्राप्त किए जाने की भी जांच की जानी चाहिए।
उन्होंने सरकार से मांग की कि वर्ष 2004 से 2014 तक आश्रम की आय के स्रोत, प्राप्त चंदा, विभिन्न संस्थाओं एवं व्यक्तियों से संपर्क तथा खर्च का विस्तृत ऑडिट कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2014 से वर्तमान समय तक की आर्थिक गतिविधियों की अलग से जांच होनी चाहिए।

युवा संत और साध्वी से जुड़े पुराने मामलों की जांच की मांग
महामंडलेश्वर ने अपने बयान में आरोप लगाया कि आंदोलन की आड़ में एक युवा संत और एक युवा साध्वी की मौत से जुड़े मामलों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि इन घटनाओं को लेकर किसी प्रकार के आरोप या संदेह लंबे समय से मौजूद हैं तो जांच एजेंसियों को तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर वास्तविक स्थिति सामने लानी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे गंभीर आरोपों की सच्चाई केवल जांच के बाद ही सामने आ सकती है।

साध्वी से जुड़े पुराने विवादों का भी उठाया मुद्दा हत्या की आशंका जताई
बयान में एक साध्वी से जुड़े पुराने विवाद का भी उल्लेख किया गया। महामंडलेश्वर ने दावा किया कि वर्ष 2019-20 के दौरान उनके अस्पताल में भर्ती होने को लेकर मीडिया में अलग-अलग प्रकार की खबरें प्रकाशित हुई थीं। बाद में आश्रम की ओर से कथित रूप से कानूनी नोटिस दिए जाने की खबरों का भी उन्होंने हवाला दिया।
उन्होंने कहा कि यदि इस मामले से संबंधित समाचार रिपोर्ट, दस्तावेज अथवा कानूनी नोटिस उपलब्ध हैं तो उनकी भी स्वतंत्र रूप से जांच की जानी चाहिए, ताकि आरोपों और वास्तविक तथ्यों के बीच अंतर स्पष्ट हो सके।

खनन विरोध और मातृ सदन की निर्माण गतिविधियों पर सवाल
महामंडलेश्वर ने खनन विरोधी आंदोलन के साथ-साथ मातृ सदन परिसर में हुए निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि उद्देश्य केवल साधना, सेवा और आंदोलन है तो आश्रम की निर्माण गतिविधियों और उनके लिए आवश्यक संसाधनों की भी पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि आश्रम के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, विशेषकर सीमेंट और बालू की खरीद कहां से हुई तथा इसके लिए धन का स्रोत क्या था। उनका कहना है कि आम जनता के सामने खनन को लेकर सवाल उठाए जाते हैं, इसलिए आश्रम की अपनी निर्माण गतिविधियों और संसाधनों की भी पारदर्शिता जरूरी है।

गंगा संरक्षण के दावे पर बिहार का सवाल
महामंडलेश्वर ने गंगा संरक्षण को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी संस्था का मुख्य उद्देश्य गंगा की रक्षा करना है तो गंगा के दूसरे राज्यों में भी मौजूद गंभीर प्रदूषण और पर्यावरणीय समस्याओं को लेकर समान रूप से आवाज उठाई जानी चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से बिहार का उल्लेख करते हुए कहा कि गंगा वहां भी बहती है और वहां भी नदी संरक्षण की आवश्यकता है। उनका सवाल था कि आंदोलन का केंद्र मुख्य रूप से हरिद्वार ही क्यों बना रहता है।

कानूनी मामलों में संसाधनों को लेकर सवाल
महामंडलेश्वर ने मातृ सदन की कानूनी गतिविधियों और विभिन्न न्यायालयों में मामलों की पैरवी को लेकर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि एक सामान्य व्यक्ति के लिए लंबे समय तक मुकदमे लड़ना आर्थिक रूप से कठिन होता है, जबकि मातृ सदन के पास लगातार कानूनी लड़ाई लड़ने के पर्याप्त संसाधन दिखाई देते हैं।
उन्होंने मांग की कि यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि आश्रम को कानूनी मामलों के लिए आर्थिक एवं अन्य प्रकार का सहयोग किन स्रोतों से प्राप्त होता है और उस धन का हिसाब-किताब क्या है।

आंदोलन, अंतरराष्ट्रीय पहचान और चंदे की जांच की मांग
महामंडलेश्वर ने आरोप लगाया कि हरिद्वार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध धार्मिक एवं आध्यात्मिक केंद्र है। ऐसे में यहां होने वाले किसी भी बड़े आंदोलन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रचार मिल सकता है।
उन्होंने आशंका जताई कि कहीं आंदोलनों की अंतरराष्ट्रीय पहचान का इस्तेमाल विदेशों अथवा अन्य स्रोतों से आर्थिक सहयोग प्राप्त करने के लिए तो नहीं किया जा रहा। हालांकि उन्होंने स्वयं इसे जांच का विषय बताते हुए कहा कि वास्तविकता सामने लाने के लिए संबंधित आर्थिक लेन-देन की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

2004 से अब तक दो चरणों में आर्थिक जांच की मांग
महामंडलेश्वर ने सरकार और प्रशासन से स्पष्ट रूप से मांग की कि मातृ सदन की गतिविधियों की जांच दो चरणों में की जाए।
पहला चरण: वर्ष 2004 से 2014 तक आश्रम से जुड़े लोगों, संस्थाओं, संपर्कों, चंदे और आर्थिक लेन-देन की जांच।
दूसरा चरण: वर्ष 2014 से वर्तमान समय तक प्राप्त चंदे, आय-व्यय, कानूनी खर्च, निर्माण कार्यों और अन्य आर्थिक गतिविधियों की जांच।
उन्होंने कहा कि दोनों अवधियों की आय और खर्च का मिलान किया जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उसकी स्वतंत्र जांच कराई जाए।

विदेशी या बाहरी फंडिंग की भी हो जांच
महामंडलेश्वर ने आशंका व्यक्त करते हुए कहा कि यदि किसी संस्था को देश-विदेश से आर्थिक सहयोग प्राप्त होता है तो उसकी वैधानिकता और उपयोग की जांच होना आवश्यक है। उन्होंने सरकार से मांग की कि विदेशी अथवा बाहरी स्रोतों से प्राप्त धन, यदि कोई हो, उसका रिकॉर्ड संबंधित कानूनों के अनुरूप जांचा जाए।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कहीं किसी बाहरी नेटवर्क के माध्यम से सामाजिक या राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि यह केवल आरोप के स्तर पर नहीं रहना चाहिए, बल्कि जांच के माध्यम से तथ्य सामने आने चाहिए।

अपनी पहचान को लेकर भी दिया स्पष्टीकरण
महामंडलेश्वर ने अपने बयान में अपनी आध्यात्मिक पहचान को लेकर भी स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि वे स्वयं को गृहस्थ सन्यासी के रूप में देखते हैं और बताया कि उन्हें जगद्गुरु शंकराचार्य अनंतानंद सरस्वती जी महाराज, राजगुरु मठ काशी के आशीर्वाद से महामंडलेश्वर पद का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है।
उन्होंने कहा कि सन्यास और समाजसेवा के नाम पर काम करने वाले सभी संतों एवं संस्थाओं की गतिविधियों में पारदर्शिता होनी चाहिए।

निष्पक्ष जांच से सामने आएगी सच्चाई
महामंडलेश्वर ने कहा कि मातृ सदन से जुड़े आरोपों और विवादों को लेकर लंबे समय से सार्वजनिक बहस होती रही है। ऐसे में आरोप-प्रत्यारोप के बजाय सरकार को निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि आश्रम की आर्थिक गतिविधियों, चंदे, आय-व्यय, कानूनी खर्च, निर्माण कार्यों, आंदोलनों तथा पुराने विवादों से जुड़े सभी पहलुओं की जांच दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर हो।
उन्होंने कहा कि यदि आरोप निराधार हैं तो जांच से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और यदि कोई अनियमितता सामने आती है तो उसकी भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

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