हरिद्वार, 7 जुलाई।
मातृ सदन ने दावा किया है कि उसे विश्वसनीय स्थानीय सूत्रों से सूचना मिली है कि जनपद हरिद्वार के महतोली, भुवापुर, बाड़ीटीप, नेहंदपुर, प्रतापपुर तथा आसपास के क्षेत्रों में सोमवार रात बड़े पैमाने पर अवैध खनन की तैयारी की गई है। संस्था का कहना है कि यदि पूर्व सूचना के बावजूद अवैध खनन होता है तो संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों, खनन विभाग और कथित संरक्षण देने वाले लोगों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना सहित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मातृ सदन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार विभिन्न स्टोन क्रेशरों पर दर्जनों जेसीबी, पोकलैंड मशीनें, डंपर और अन्य भारी वाहन पहले से जुटाए जा चुके हैं। संस्था का आरोप है कि अवैध खनन को लेकर स्टोन क्रेशर संचालकों और कथित संरक्षण देने वाले लोगों के बीच हरिद्वार और देहरादून में कई बैठकें भी हुई हैं।
प्रेस विज्ञप्ति में कुछ व्यक्तियों के नाम लेते हुए उनके कथित रूप से इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े होने का दावा किया गया है। हालांकि मातृ सदन ने यह भी कहा है कि ये नाम उसे विश्वसनीय सूत्रों और क्षेत्र में चल रही चर्चाओं के आधार पर प्राप्त हुए हैं तथा इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
मातृ सदन का कहना है कि उसने इस संबंध में जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जिला खनन अधिकारी और संबंधित थाना प्रभारियों को तत्काल सूचना दे दी है। संस्था का दावा है कि अब प्रशासन यह नहीं कह सकता कि उसे पहले से जानकारी नहीं थी।
संस्था ने चेतावनी दी है कि यदि सोमवार दिनांक 6 जुलाई रात या आगामी घंटों में इन क्षेत्रों में अवैध खनन होता है तो यह संबंधित अधिकारियों की गंभीर लापरवाही या कर्तव्यों के निर्वहन में विफलता माना जाएगा। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और अन्य न्यायिक मंचों के आदेशों के बावजूद अवैध खनन होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना सहित अन्य कानूनी विकल्प अपनाए जाएंगे।
मातृ सदन ने प्रशासन से मांग की है कि संवेदनशील क्षेत्रों में तत्काल पुलिस बल और मजिस्ट्रेट तैनात किए जाएं, जेसीबी, पोकलैंड मशीनों और संदिग्ध वाहनों को जब्त किया जाए, सभी स्टोन क्रेशरों की रात्रिकालीन वीडियोग्राफी कराई जाए तथा अवैध खनन को संरक्षण देने वालों की निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए।
संस्था ने कहा कि गंगा और उसकी सहायक नदियों में अवैध खनन किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि अवैध खनन हुआ तो इस मुद्दे को जनआंदोलन, न्यायिक हस्तक्षेप और अन्य वैधानिक माध्यमों से राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा।