नई दिल्ली/देहरादून, 3 जुलाई।
देश की सबसे महत्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं में शामिल करीब 12,000 करोड़ रुपये की लागत से बने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर पहली ही भारी बारिश के बाद बड़े-बड़े गड्ढे दिखाई देने से निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में उत्तर प्रदेश के शामली जिले के हाथी करौंदा गांव के पास एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त दिखाई दे रहा है। वीडियो के वायरल होते ही मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया और विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया।
वीडियो बनाने वाले चालक का दावा है कि सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण कई वाहन असंतुलित हो गए। उसके अनुसार दो कारों के अलॉय व्हील क्षतिग्रस्त हुए और एक वाहन बीच सड़क पर खराब हो गया। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
करीब 212 किलोमीटर लंबे छह लेन वाले इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। इस परियोजना से दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा का समय लगभग आठ घंटे से घटकर दो घंटे रह गया है। एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी विशेषता राजाजी राष्ट्रीय उद्यान से होकर गुजरने वाला लगभग 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है, जिसे एशिया का सबसे लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर माना जाता है।
NHAI ने क्या कहा?
मामला बढ़ने पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना पक्ष रखते हुए बताया कि भारी बारिश के दौरान पानी की निकासी बाधित होने से सड़क का हिस्सा प्रभावित हुआ। प्राधिकरण के अनुसार वहां स्थायी क्रॉस-ड्रेनेज सिस्टम बनाया गया था, लेकिन स्थानीय स्तर पर विरोध और बैलेंसिंग कलवर्ट को जोड़ने की अनुमति न मिलने के कारण उसे चालू नहीं किया जा सका। इसी वजह से बारिश का पानी जमा हुआ और सड़क का हिस्सा धंस गया।
NHAI का कहना है कि क्षतिग्रस्त हिस्से की तत्काल मरम्मत कर दी गई है, यातायात सामान्य कर दिया गया है और स्थायी समाधान होने तक अस्थायी नाले के माध्यम से पानी की निकासी की व्यवस्था की जा रही है।
अधिकारियों पर कार्रवाई
घटना को गंभीर मानते हुए NHAI ने संबंधित प्रोजेक्ट डायरेक्टर, अथॉरिटी इंजीनियर और EPC कॉन्ट्रैक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही अथॉरिटी इंजीनियर के टीम लीडर और ठेकेदार के प्रोजेक्ट मैनेजर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
विपक्ष का हमला
वायरल वीडियो के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरते हुए निर्माण कार्य में कथित भ्रष्टाचार और गुणवत्ता से समझौते के आरोप लगाए हैं। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। वहीं सरकार और NHAI का कहना है कि तकनीकी कारणों से समस्या उत्पन्न हुई थी, जिसे तत्काल ठीक कर दिया गया है।
टिप्पणी
पहली ही बारिश में किसी नई एक्सप्रेसवे पर गड्ढे दिखाई देना स्वाभाविक रूप से जनता का भरोसा कमजोर करता है। यदि समस्या वास्तव में जल निकासी व्यवस्था बाधित होने से हुई है, तो यह भी परियोजना प्रबंधन की जिम्मेदारी का हिस्सा था कि ऐसे जोखिमों का समय रहते समाधान सुनिश्चित किया जाता। दूसरी ओर, केवल वायरल वीडियो के आधार पर व्यापक भ्रष्टाचार के निष्कर्ष निकालना भी उचित नहीं होगा।
सकारात्मक पक्ष यह है कि NHAI ने मामले को छिपाने के बजाय सार्वजनिक रूप से कारण बताया, मरम्मत कराई और संबंधित अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए स्थायी समाधान लागू किया जाएगा और निर्माण की गुणवत्ता का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराया जाएगा।
जनता की अपेक्षा केवल तेज़ रफ्तार एक्सप्रेसवे नहीं, बल्कि सुरक्षित, टिकाऊ और जवाबदेह इंफ्रास्ट्रक्चर भी है। पहली बारिश ने इस परियोजना की मजबूती पर जो सवाल खड़े किए हैं, उनका जवाब केवल बयान नहीं, बल्कि दीर्घकालिक गुणवत्ता और पारदर्शिता से ही मिलेगा।