हरिद्वार, 3 जुलाई।
मानसून के दौरान संभावित प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए हरिद्वार जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट नजर आया। गुरुवार को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशन में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा जनपद की तीन तहसीलों के पांच संवेदनशील स्थानों पर एक साथ व्यापक मेगा मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस अभ्यास का उद्देश्य बाढ़, जलभराव, नदी में डूबने, भूस्खलन और तटबंध टूटने जैसी आपात परिस्थितियों में विभिन्न विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया, आपसी समन्वय तथा राहत एवं बचाव तंत्र की कार्यक्षमता को परखना था।

सुबह करीब 11 बजे जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (ईओसी) को अलग-अलग स्थानों से काल्पनिक आपदा की सूचनाएं प्राप्त होते ही जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम (आईआरएस) सक्रिय कर दिया गया। इसके बाद जिला प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ, अग्निशमन, स्वास्थ्य, राजस्व, होमगार्ड, पीआरडी, लोक निर्माण विभाग सहित सभी संबंधित एजेंसियां तत्काल निर्धारित स्टेजिंग एरिया से आवश्यक संसाधनों के साथ घटनास्थलों के लिए रवाना हुईं।

पांच स्थानों पर बनाई गईं अलग-अलग आपदा की परिस्थितियां
मॉक ड्रिल के दौरान हरकी पैड़ी पर गंगा का जलस्तर बढ़ने से श्रद्धालुओं के डूबने और बहने की स्थिति बनाई गई। श्यामपुर कांगड़ी में बाढ़ का पानी आबादी में घुसने का परिदृश्य तैयार किया गया। भीमगौड़ा रेलवे टनल के समीप भारी वर्षा के कारण पहाड़ी से पत्थर गिरने से रेलवे ट्रैक बाधित होने और यात्रियों के घायल होने की स्थिति का अभ्यास कराया गया। वहीं लक्सर के गंगदासपुर में तटबंध टूटने से बाढ़ आने तथा शिवपुरी गांव में जलभराव और लोगों के फंसने जैसी परिस्थितियां तैयार कर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया।

एनडीआरएफ और बचाव दलों ने दिखाई तत्परता
अभ्यास के दौरान सभी विभागों ने निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के अनुरूप त्वरित कार्रवाई की। एनडीआरएफ, पुलिस, अग्निशमन और अन्य बचाव दलों ने फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने, प्राथमिक उपचार देने तथा उन्हें राहत शिविरों और अस्पतालों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया का सफल प्रदर्शन किया।

मॉक ड्रिल के दौरान हरकी पैड़ी से 16 श्रद्धालुओं को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। भीमगौड़ा रेलवे टनल हादसे में घायल 9 लोगों का प्राथमिक उपचार कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। वहीं शिवपुरी गांव में बाढ़ के पानी में फंसे 30 लोगों को सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला गया। प्रशासन ने बताया कि इस तरह के अभ्यास का उद्देश्य वास्तविक आपदा के समय किसी भी प्रकार की जनहानि और नुकसान को न्यूनतम करना है।

जिलाधिकारी ने कंट्रोल रूम से की निगरानी
मॉक ड्रिल के दौरान जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने जिला आपदा कंट्रोल रूम से पूरे अभियान की लगातार निगरानी की। जबकि अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) पी.आर. चौहान ने जिला स्तर पर राहत एवं बचाव कार्यों का समन्वय संभाला। संबंधित उपजिलाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में इंसीडेंट कमांडर की भूमिका निभाते हुए अभियान का संचालन करते रहे।

डीएम बोले— आपदा में समय पर प्रतिक्रिया सबसे महत्वपूर्ण
समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कहा कि सभी विभागों और एजेंसियों ने निर्धारित रिस्पॉन्स टाइम के भीतर अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी निर्वहन किया। उन्होंने कहा कि आपदा जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया, बेहतर समन्वय और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सबसे महत्वपूर्ण होता है।

उन्होंने कहा कि मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वास्तविक आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य बिना किसी देरी के शुरू किए जा सकें। नियमित अभ्यास से विभागों के बीच बेहतर तालमेल विकसित होता है और भविष्य की किसी भी चुनौती से निपटने की क्षमता मजबूत होती है।

वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वैभव गुप्ता, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आर.के. सिंह, परियोजना निदेशक नलिनीत घिल्डियाल, एसपी सिटी अभय प्रताप सिंह, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी सरिता पवार, मुख्य अग्निशमन अधिकारी वंश बहादुर सहित एनडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य, होमगार्ड, पीआरडी, लोक निर्माण विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

प्रशासन का संदेश स्पष्ट रहा कि आपदा आने का इंतजार नहीं, बल्कि पहले से मजबूत तैयारी ही जनधन की सुरक्षा की सबसे बड़ी कुंजी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

error: Content is protected !!