हरिद्वार, 01 जुलाई
आयुर्वेद विभाग हरिद्वार द्वारा आयुर्वेद उत्कर्ष केंद्र, बहादराबाद में आयोजित त्रिदिवसीय जिला स्तरीय आयुर्वेद चिकित्सा शिविर के दूसरे दिन 150 से अधिक मरीजों ने स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया। शिविर में विशेषज्ञ आयुर्वेद चिकित्सकों ने विभिन्न रोगों से पीड़ित मरीजों का परीक्षण, परामर्श एवं उपचार किया।



शिविर में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल प्रभाकर, शल्य चिकित्सक डॉ. सोरमी सोमकर, क्षारसूत्र विशेषज्ञ डॉ. विजेंद्र कुशवाह, पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. विकास दुबे तथा डॉ. संजय कुमार ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं। पंचकर्म, अग्निकर्म, जलौकावचारण और क्षारसूत्र चिकित्सा जैसी आयुर्वेदिक उपचार पद्धतियों के माध्यम से रोगियों का उपचार किया गया।
विशेष रूप से डॉ. विकास दुबे ने वरिक्से वेइन्स एवं प्लांटर सोरायसिस से पीड़ित मरीजों का सिरावेध एवं रक्तमोक्षण चिकित्सा द्वारा उपचार किया। चिकित्सकों ने मरीजों को रोगों के कारण, बचाव और आयुर्वेदिक जीवनशैली के बारे में भी जानकारी दी।
डॉ. विशाल प्रभाकर ने कहा कि आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि शरीर, मन और जीवनशैली के संतुलन का विज्ञान है। ऐसे शिविर समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं डॉ. विकास दुबे ने बताया कि पंचकर्म एवं रक्तमोक्षण जैसी विधियां पुराने और जटिल रोगों में भी प्रभावी परिणाम दे रही हैं।
शिविर में औषधि वितरण का कार्य मुख्य फार्मेसी अधिकारी कैलाश भट्ट एवं फार्मेसी अधिकारी शशि कला द्वारा किया गया। मरीजों के लिए हीमोग्लोबिन, रक्त शर्करा, रक्तचाप और ईसीजी जांच की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई, जिसका संचालन आयुर्वेदिक परिचारिका श्रीमती शीतल एवं कु. कंचना ने किया।
इसके अतिरिक्त योग अनुदेशक श्रीमती नीतू चौहान और क्षितिज पाठक ने रोगियों को योगाभ्यास कराया तथा स्वस्थ जीवन के लिए नियमित योग अपनाने का संदेश दिया। शिविर के सफल संचालन में गोविंद, सतीश और रघुवीर का विशेष सहयोग रहा।
मीडिया प्रभारी एवं आयुष मिशन विशेषज्ञ डॉ. अवनीश कुमार उपाध्याय ने बताया कि आयुष विभाग का उद्देश्य आयुर्वेद और योग को जन-जन तक पहुंचाकर स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाना है। जिला आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी डॉ. स्वास्तिक सुरेश ने कहा कि उत्तराखंड सरकार और आयुष विभाग जनसामान्य को किफायती एवं प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने लोगों से 1 जुलाई को शिविर के अंतिम दिवस में पहुंचकर स्वास्थ्य लाभ लेने की अपील की। बड़ी संख्या में संत-महापुरुष, श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।