राजनीतिक भागीदारी, आरक्षण और सामाजिक अधिकारों को लेकर एकजुट हुआ पिछड़ा वर्ग समाज, हजारों लोगों के जुटने की संभावना


हरिद्वार, 26 जून।
जनपद हरिद्वार में पिछड़ा वर्ग समाज की राजनीतिक, सामाजिक एवं संवैधानिक भागीदारी को मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को धर्मपाल सिंह ठेकेदार की अध्यक्षता में विभिन्न पिछड़ा वर्ग संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से “पिछड़ा वर्ग संयुक्त मोर्चा हरिद्वार” के गठन की घोषणा की गई।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि हरिद्वार जिले की लगभग 50 प्रतिशत आबादी पिछड़ा वर्ग समाज की होने के बावजूद राजनीतिक एवं प्रशासनिक स्तर पर समाज को अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि विभिन्न राजनीतिक दल चुनाव के समय समाज का समर्थन तो लेते हैं, लेकिन टिकट वितरण और निर्णय प्रक्रिया में ओबीसी वर्ग की उपेक्षा की जाती है।

बैठक में उपस्थित नेताओं ने कहा कि हरिद्वार जनपद की सभी विधानसभा सीटों पर ओबीसी समाज का प्रभाव है और कई क्षेत्रों में चुनावी परिणाम तय करने में समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसके बावजूद विधानसभा और लोकसभा चुनावों में समाज की भागीदारी संतोषजनक नहीं है।

इसी मुद्दे को लेकर आगामी 5 जुलाई 2026 को ज्वालापुर स्थित शुभारंभ बैंक्वेट हॉल में प्रातः 11 बजे विशाल ओबीसी महापंचायत एवं जनसभा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। आयोजकों के अनुसार महापंचायत में जिलेभर से हजारों लोगों के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम में राजनीतिक भागीदारी, सामाजिक न्याय, आरक्षण, जातीय जनगणना और पिछड़ा वर्ग के अधिकारों सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

बैठक को संबोधित करते हुए धर्मपाल सिंह ठेकेदार और विनोद मलिक ने कहा कि ओबीसी समाज अब पहले की अपेक्षा अधिक जागरूक और संगठित हो चुका है। उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल समाज की अनदेखी करेंगे, उन्हें भविष्य में इसका राजनीतिक परिणाम भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “जितनी हमारी भागीदारी होगी, उतनी हमारी हिस्सेदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।”

विजयपाल सिंह और संजय सैनी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य गठन के समय पिछड़ा वर्ग को 14 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त था, लेकिन वर्ष 2014 में पर्वतीय क्षेत्रों के कुछ समुदायों को अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल किए जाने के बाद ओबीसी आरक्षण में कमी आई। उन्होंने मंडल आयोग की सिफारिशों के अनुरूप उत्तराखंड में भी पिछड़ा वर्ग को 21 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की मांग उठाई।

वक्ताओं ने यह भी कहा कि हरिद्वार सहित पूरे उत्तराखंड में ओबीसी समाज की आबादी 20 प्रतिशत से अधिक है, इसलिए विधानसभा और अन्य निर्वाचित संस्थाओं में समाज को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने वर्तमान आरक्षण व्यवस्था के पुनरीक्षण तथा केवल ओबीसी वर्ग पर लागू ‘क्रीमी लेयर’ व्यवस्था की समीक्षा की भी मांग की।

बैठक में मौजूद पदाधिकारियों ने कहा कि जिस प्रकार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्गों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है, उसी प्रकार ओबीसी समाज के लिए भी विधानसभाओं और संसद में राजनीतिक आरक्षण पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समाज की मांगों की लगातार उपेक्षा की गई तो हरिद्वार से लेकर दिल्ली तक व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा।
बैठक के अंत में सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि पिछड़ा वर्ग समाज अपने संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक सम्मान और राजनीतिक भागीदारी के लिए संगठित संघर्ष करेगा तथा 5 जुलाई की महापंचायत इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगी।

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