हरिद्वार, 20 जून
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने गोरक्षा को अपने प्रमुख राष्ट्रीय अभियानों में शामिल करते हुए केंद्र सरकार से संपूर्ण गोवंश की रक्षा के लिए यथाशीघ्र राष्ट्रीय कानून बनाने की मांग की है। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि गोमाता को ‘राष्ट्रमाता’, राष्ट्रवंद्या’ या ‘राष्ट्रपूज्या’ का दर्जा दिए जाने के पक्ष में देशभर में जनमत तैयार किया जाएगा।

VHP अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि गोरक्षा का विषय विश्व हिंदू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1952 में गोहत्या प्रतिबंध के समर्थन में करोड़ों लोगों के हस्ताक्षर एकत्र कर तत्कालीन राष्ट्रपति को सौंपे गए थे, जबकि 7 नवंबर 1966 के ऐतिहासिक गोरक्षा आंदोलन में भी संघ परिवार और विश्व हिंदू परिषद की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।

उन्होंने कहा कि विश्व हिंदू परिषद का बजरंग दल हर वर्ष दो लाख से अधिक गोवंश को अवैध कटान के लिए ले जाए जाने से बचाने का कार्य करता है। यह अभियान देशभर में लगातार चलाया जा रहा है और हजारों कार्यकर्ता गोरक्षा के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।

वीएचपी का स्पष्ट मत है कि केंद्रीय सरकार को संपूर्ण गोवंश की रक्षा के लिए यथाशीघ्र एक समान और प्रभावी कानून बनाना चाहिए। संगठन का मानना है कि गाय, बैल और अन्य गोवंश केवल दूध उत्पादन या कृषि कार्य तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि गोबर, गोमूत्र, प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि और पंचगव्य आधारित उत्पादों के माध्यम से जीवनभर उपयोगी बने रहते हैं।

VHP अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि कुछ राज्यों में ऐसे प्रावधान हैं जिनके तहत अधिक आयु के बैलों या दूध देना बंद कर चुकी गायों के वध की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन विश्व हिंदू परिषद इससे सहमत नहीं है। संगठन का मानना है कि संपूर्ण गोवंश की पूरे जीवनकाल तक रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

उन्होंने ने कहा कि भारतीय संस्कृति और वेदों में गाय को माता का स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार को भी गोमाता के प्रति समाज की आस्था और सम्मान को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि गाय को विशेष राष्ट्रीय सम्मान दिलाने और गोरक्षा के प्रति जनजागरण के लिए विश्व हिंदू परिषद आने वाले दिनों में देशव्यापी अभियान चलाएगी।

उन्होंने कहा कि गोरक्षा के साथ-साथ गौसंवर्धन, प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि और पंचगव्य आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए भी संगठन पहले की तरह समर्पित भाव से कार्य करता रहेगा।

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