📍 धर्मनगरी में प्रशासन पर उठे सवाल
हरिद्वार में मांस बिक्री पर प्रतिबंध के बावजूद उसके उपलब्ध होने का मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिबंध के बाद भी मांस (मीट) का खुलेआम मिलना प्रशासन की नाकामी को दर्शाता है।

🚨 संगठन की सक्रियता से टला संभावित विवाद
मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने हील बाइपास के पास सन्निध मंदिर क्षेत्र में एक ई-रिक्शा को रोका। सूचना के आधार पर जांच करने पर उसमें प्रतिबंधित मांस (मीट) छुपाकर ले जा रहे दो बॉग्लादेशी हिन्दुओ को पकड़ा। कार्यकर्ताओं में कमल उन्नियाल, जिला सह-गोरक्षा प्रमुख तरुण शर्मा सहित अन्य लोग मौजूद रहे, जिन्होंने मौके पर ही मांस (मीट) को नष्ट कर दिया।

👤 आरोपी ने मांगी माफी, चेतावनी देकर छोड़ा
पकड़े गए दो संदिग्धों ने खुद को बंगाल का निवासी बताया और चन्दनधारी हिन्दुओ ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए सार्वजनिक माफी मांगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसा कार्य नहीं करेंगे, जिसके बाद उन्हें संगठन ने चेतावनी देकर छोड़ दिया।

📦 कहां से खरीदा गया था मांस (मीट) ?
आरोपियों के अनुसार, उन्होंने ज्वालापुर मार्केट से मांस (मीट) खरीदा था और उसे माया-देवी मंदिर क्षेत्र में ले जाकर पकाने की योजना थी, फिर वही से देर शाम उनकी बस थी जिससे वह हरिद्वार क्षेत्र से बहार चले जाते ।

प्रशासन पर उठे बड़े सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब धर्मनगरी में मांस (मीट) पूरी तरह प्रतिबंधित है, तो वह बाजारों से मंदिर क्षेत्र तक कैसे पहुंच रहा है? स्थानीय लोगों और संगठनों ने प्रशासन से इस मामले में जवाब देने और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

हिन्दू संगठन से (सनातनिये ) आम जनता का सीधा प्रश्न
आम जनता (सनातनिये ) का विश्व हिन्दू संगठन ( बजरंग दलों ) के पदाधिकारयो से सवाल है की यदि ये आरोपी हिन्दू धर्म के आलावा किसी और धर्मं से होते तो तब भी क्या हिन्दू संगठन उनको माफ़ करता ? या कोई सख्त कार्रवाई की मांग करता ?

⚖️ निष्कर्ष
बैसाखी के अवसर पर विश्व हिन्दू संगठन ( बजरंग दल ) की सतर्कता से एक बड़ा विवाद होने से टल गया, लेकिन यह घटना प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।

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